राजपाल यादव पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- ‘आपकी जगह जेल में है’

चेक बाउंस के सात मामलों में दोषी अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि उनके रवैये में न्यायालय के प्रति सम्मान नजर नहीं आ रहा है। अदालत ने दो करोड़ रुपये का मांग-पत्र जमा करने के निर्देश का पालन नहीं करने पर नाराजगी जताई और कहा कि उनकी याचिका खारिज करने पर भी विचार किया जा सकता है।

Oct 05, 2026 - 17:24
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राजपाल यादव पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- ‘आपकी जगह जेल में है’

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 5 अक्टूबर 2026

चेक बाउंस के सात मामलों में दोषी ठहराए गए अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने उनके रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि पिछले आदेश के बावजूद निर्धारित रकम जमा नहीं की गई। पीठ ने साफ संकेत दिया कि यदि आदेशों का पालन नहीं हुआ तो राजपाल यादव को जेल जाना पड़ सकता है।सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ में न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से केवल 50 लाख रुपये के मांग-पत्र की प्रति अदालत में पेश की गई। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि जब पांच करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया गया था, तो केवल 50 लाख रुपये ही क्यों लाए गए।

अदालत ने कहा- आपकी जगह जेल में है

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची ने राजपाल यादव के रवैये पर बेहद कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “आपकी जगह जेल में है।” अदालत ने कहा कि अब तक शिकायतकर्ता को कुछ रकम मिल जाने की उम्मीद में उनके टालमटोल वाले रवैये को नजरअंदाज किया जा रहा था। लेकिन अब अदालत उनकी याचिका खारिज करने पर भी विचार कर सकती है।राजपाल यादव के वकील ने 50 लाख रुपये के अंतरिम भुगतान को उचित ठहराने की कोशिश की। उन्होंने अदालत के सामने कहा कि शिकायतकर्ता आर्थिक रूप से कमजोर नहीं हैं। इस दलील पर अदालत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि शिकायतकर्ता कम से कम उतने गरीब जरूर हैं, जितनी रकम राजपाल यादव ने रोक रखी है। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह के घमंड का इलाज करना उसे आता है और अदालत में अभिनय करने से कोई फायदा नहीं होगा।

दो करोड़ रुपये जमा करने के आदेश का नहीं हुआ पालन

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले राजपाल यादव को जेल जाने से अंतरिम राहत दी थी। आठ सितंबर को अदालत ने उन्हें पांच करोड़ रुपये अपनी रजिस्ट्री में जमा करने की शर्त पर राहत दी थी। इसके बाद 15 सितंबर को राजपाल यादव की ओर से बताया गया कि वह अपनी कुछ संपत्तियां बेचकर रकम जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अगली सुनवाई में दो करोड़ रुपये का मांग-पत्र जमा करने की बात कही थी।इसी आश्वासन के आधार पर अदालत ने उनकी अंतरिम राहत को पांच अक्टूबर तक बढ़ा दिया था। लेकिन सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत के सामने केवल 50 लाख रुपये का मांग-पत्र पेश किया गया। अदालत ने कहा कि उन्हें पर्याप्त समय दिया गया था और अब वह अवधि भी समाप्त हो चुकी है। इसी वजह से पीठ ने उनके रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाई थी तीन महीने की सजा

इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने 10 जुलाई 2026 को राजपाल यादव को तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही सातों मामलों में कुल एक करोड़ 35 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इसके बाद राजपाल यादव ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई चल रही है।सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि अदालत के आदेशों का पालन करना जरूरी है। पीठ ने यह भी संकेत दिया कि यदि राजपाल यादव निर्धारित रकम जमा नहीं करते हैं तो उन्हें अंतरिम राहत का लाभ मिलना मुश्किल हो सकता है। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होने की बात कही गई है।

क्या है पूरा मामला

यह मामला वर्ष 2010 का है। फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी निर्माण कंपनी को करीब पांच करोड़ रुपये का ऋण दिया था। फिल्म की रिलीज में देरी होने के बाद रकम वापस करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ था। इसके बाद कंपनी को भुगतान के लिए दिए गए सातों चेक बैंक में बाउंस हो गए।चेक बाउंस होने के बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया था। इस मामले में अप्रैल 2018 में निचली अदालत ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया था। इसके बाद वर्ष 2024 में सत्र अदालत ने भी उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा। बाद में मामला दिल्ली हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

मुख्य बिंदु

  • राजपाल यादव चेक बाउंस के सात मामलों में दोषी हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने उनके रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई।
  • अदालत में 50 लाख रुपये का मांग-पत्र पेश किया गया।
  • पहले पांच करोड़ रुपये जमा करने की शर्त रखी गई थी।
  • अदालत ने कहा- “आपकी जगह जेल में है।”
  • दिल्ली हाई कोर्ट ने तीन महीने की जेल और एक करोड़ 35 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
  • मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

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