ताजमहल या तेजोमहालय: मामले में 25 नवंबर को सुनवाई:पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर रहने से टली कार्यवाही, आगरा कोर्ट में दायर है वाद
ताजमहल को तेजोमहादेव मंदिर बताने के दावे से जुड़े मुकदमे में अब 25 नवंबर को सुनवाई होगी। मंगलवार को अदालत में वादी पक्ष की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई होनी थी, लेकिन पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण कार्यवाही नहीं हो सकी। यह मामला अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन)-2 की अदालत में विचाराधीन है। इसमें ताजमहल के ऐतिहासिक स्वरूप को लेकर वादी पक्ष ने अपना दावा पेश किया है। अब अगली सुनवाई पर आदेश छह नियम 17 सीपीसी के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र पर कार्यवाही आगे बढ़ेगी। वादी अजय प्रताप सिंह के अनुसार, इस मुकदमे का नाम ‘श्री भगवान श्रीतेजोमहादेव आदि बनाम सचिव, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार आदि’ है। वादी पक्ष का दावा है कि ताजमहल मूल रूप से तेजोमहादेव मंदिर यानी तेजोमहालय है। इसी दावे के आधार पर न्यायालय में दीवानी वाद दाखिल किया गया है। मामले में केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय सहित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संबंधित अधिकारियों और अन्य विभागों को प्रतिवादी बनाया गया है। आरटीआई से जानकारी मांगने के बाद उठा था मामला वादी पक्ष की ओर से ताजमहल के निर्माण और उसके ऐतिहासिक स्वरूप से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं। अजय प्रताप सिंह ने मार्च 2024 में बताया था कि उन्होंने वर्ष 2023 में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत एएसआई से ताजमहल के निर्माण और उसकी आयु के संबंध में जानकारी मांगी थी। इसके बाद ताजमहल को तेजोमहालय बताने के दावे को लेकर न्यायालय में वाद की कार्यवाही आगे बढ़ी। इस मामले में वादी पक्ष अपने दावे के समर्थन में न्यायालय के समक्ष पक्ष रख रहा है। संशोधन के प्रार्थना पत्र पर होनी है सुनवाई मंगलवार को अदालत में सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश छह नियम 17 के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई होनी थी। यह प्रावधान दीवानी मुकदमे में वादपत्र या लिखित बयान में संशोधन की अनुमति से संबंधित है। हालांकि, इस मामले में दाखिल प्रार्थना पत्र के जरिए किस संशोधन की मांग की गई है, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई टल गई। अब अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 25 नवंबर की तारीख तय की है।
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