तामेश्वरनाथ धाम कॉरिडोर में जमीन अधिग्रहण बाधा:प्रशासन किसानों की सहमति से मामला सुलझाने में जुटा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बाबा तामेश्वरनाथ धाम में कॉरिडोर की घोषणा के बाद परियोजना को जमीन पर उतारने की कवायद तेज हुई है, लेकिन जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अब तक पूरी तरह गति नहीं पकड़ पाई है। किसानों की सहमति, अधिग्रहित की जाने वाली जमीन का क्षेत्रफल जैसे बिंदु प्रक्रिया की राह में प्रमुख अड़चन बना हुआ है। हालांकि डीएम अनुज मलिक ने पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ प्रभावित किसानों और अन्य लोगों के साथ बैठक कर समस्याओं को दूर करने की दिशा में चर्चा की। शासन की महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत बाबा तामेश्वरनाथ धाम को विकसित करने के लिए मंदिर परिसर, पोखरा और आसपास के क्षेत्र को कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है। जमीन अधिग्रहण पर डीएम ने ली पूरी जानकारी एडीएम वित्त एवं राजस्व सत्य प्रकाश की मौजूदगी में डीएम ने पर्यटन और राजस्व विभाग के अधिकारियों से परियोजना की अब तक की प्रगति पूछी। प्रस्तावित नक्शे का अवलोकन करने के साथ आवश्यक भूमि के क्षेत्रफल, गाटों की संख्या और प्रभावित किसानों व अन्य लोगों की संख्या की जानकारी ली। भूमि अधिग्रहण के लिए कितने लोगों की सहमति मिली है और किन मामलों में अभी सहमति बाकी है, इस पर भी चर्चा हुई। डीएम ने कहा कि पर्यटन विकास का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों और अन्य प्रभावित लोगों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। किसी को अनावश्यक नुकसान या अहित न हो, यह सुनिश्चित किया जाएगा। मुआवजे को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं कॉरिडोर की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी जमीन अधिग्रहण और उसके बदले मुआवजा है। अधिकारियों के स्तर पर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रभावित लोगों से सहमति लेने पर जोर दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता आरके पांडेय ने बताया कि कॉरिडोर के क्रम में सड़क और नालियों का काम तेजी से चल रहा है। भूमि से संबंधित मुआवजे की प्रक्रिया भी चल रही है और सहमति के आधार पर इसे पूरा कराया जा रहा है।
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