TGT-PGT पुरानी नियमावली व पुराने पैटर्न की मांग जारी:अंशनकारी बोले-20 दिन भूख हड़ताल पर बैठे लेकिन परिणाम नहीं,लिखित आदेश जारी हो
प्रयागराज में टीजीटी पीजीटी भर्ती परीक्षा को पुरानी नियमावली व पुराने पैटर्न की मांग लगातार जारी है। अंशनकारी अभ्यर्थियों ने एक बार फिर धरने पर बैठने की बात कही। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासनों के बावजूद एनसीटीई (NCTE) की गाइडलाइन जारी नहीं हुई और न ही उनकी मांगों पर कोई लिखित निर्णय आया। आश्वासन पर उठे सवाल अंशनकारी मीना सरोज ने कहा कि वे लगभग 20 दिन धरने पर बैठे, लेकिन उसका कोई परिणाम नहीं निकला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पीड़ित छात्रों को मौका देने की बात कही है, पर अधिकारी इस दिशा में आगे नहीं बढ़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक लिखित आदेश या नोटिस नहीं मिलेगा, धरना जारी रहेगा। वहीं अंशनकारी शिमला पटेल ने आरोप लगाया कि डीएम और अन्य अधिकारियों ने आश्वासन देकर उनका अनशन तुड़वाया। लेकिन 15 से 20 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी एनसीटीई की गाइडलाइन जारी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि प्रवक्ता भर्ती का विज्ञापन रोका गया है, जबकि टीजीटी के मुद्दे पर भी अब तक कोई ठोस बातचीत नहीं हुई। अभ्यर्थी दीपचंद्र ने कहा कि मुख्यमंत्री, डीएम और एडीएम स्तर से आश्वासन मिला था कि एक सप्ताह में समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन अब तक कोई नोटिस नहीं आया। उन्होंने मुख्यमंत्री, शिक्षा निदेशालय और शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से शीघ्र नोटिस जारी करने की मांग की। टीजीटी भर्ती के 17,740 पदों का विज्ञापन नियमावली में संशोधन और एनसीटीई से छूट की प्रक्रिया के चलते अटका हुआ है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक पुराने नियमों पर विज्ञापन और एनसीटीई संबंधी स्पष्ट निर्णय नहीं आता, वे आंदोलन जारी रखेंगे। अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें इससे पहले प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का आमरण अनशन 19 दिन चला था। अनशन 5 सितंबर 2026 से शुरू हुआ था और 23 सितंबर 2026 को, यानी 19वें दिन, समाप्त कराया गया। अभ्यर्थी 31 अगस्त 2026 से पुरानी नियमावली और पुराने परीक्षा पैटर्न की मांग को लेकर आंदोलनरत थे। 5 सितंबर से शुरू हुआ और 23 सितंबर को 19वें दिन खत्म हुआ। अनशन के दौरान चार अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठे थे; डीएम मनीष कुमार वर्मा और पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया था। अनशन क्यों खत्म हुआ अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप और प्रशासन के आश्वासन के बाद अनशन खत्म किया था। हालांकि, उन्होंने साफ कहा था कि अनशन खत्म हुआ है, आंदोलन नहीं—क्योंकि लिखित आदेश नहीं मिला था।
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