भारत पर 100% तक शुल्क का खतरा, ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून को दी मंजूरी

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Sep 19, 2026 - 13:32
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भारत पर 100% तक शुल्क का खतरा, ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून को दी मंजूरी

 दि राइजिंग न्यूज़ | अमेरिका | 19 सितंबर 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को रूस और ईरान से संबंधित नए प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर कर उसे कानून का रूप दे दिया। इस कानून के तहत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को मिला है। भारत और चीन जैसे बड़े रूसी ऊर्जा खरीदार इस व्यवस्था के दायरे में आ सकते हैं।

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर बढ़ा दबाव

नए अमेरिकी कानून का मुख्य उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाना और यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी आर्थिक क्षमता को सीमित करना बताया गया है। कानून में रूस के अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े लोगों तथा संस्थाओं पर भी प्रतिबंधों का प्रावधान है। इसके अलावा रूस से तेल और गैस की खरीद तथा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाली गतिविधियों पर भी कार्रवाई का रास्ता खोला गया है।

भारत पर क्यों मंडरा रहा है 100 प्रतिशत तक शुल्क का खतरा

भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल है। नए कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष खरीदारों पर अमेरिकी राष्ट्रपति को उनके सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की शक्ति दी गई है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत पर अभी स्वतः 100 प्रतिशत शुल्क लगा दिया गया है; कानून अमेरिकी प्रशासन को ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार देता है।

चीन भी कानून के दायरे में आ सकता है

भारत के साथ चीन भी रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों में शामिल है। नए कानून में रूस से तेल और गैस के बड़े खरीदारों के खिलाफ शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है। इसलिए अमेरिकी प्रशासन की आगे की कार्रवाई के आधार पर भारत और चीन दोनों पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की संभावना बनती है।

रूस के गुप्त तेल बेड़े पर भी कार्रवाई

कानून में रूस के उस समुद्री बेड़े को भी निशाना बनाया गया है जिसे पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जहाजों के समूह के रूप में बताया जाता है। ऐसे जहाजों और रूस की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य रूस के तेल निर्यात से होने वाली आय को सीमित करना है।

भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती

भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता रहा है। रूस से मिलने वाला तेल भारतीय ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, इसलिए अमेरिकी कानून के संभावित प्रभाव को लेकर भारत के व्यापार और ऊर्जा हित महत्वपूर्ण होंगे। हालांकि, नए कानून के कारण भारत पर वास्तव में कितना शुल्क लगाया जाएगा, यह अमेरिकी प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

भारत-अमेरिका संबंधों पर भी असर की संभावना

नए कानून से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर भी नई चुनौती पैदा हुई है। भारत यदि रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखता है और अमेरिकी प्रशासन कानून के तहत शुल्क लगाने का निर्णय करता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और किफायती ऊर्जा स्रोत भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

ट्रंप ने कानून को दी मंजूरी

व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम 2026 पर हस्ताक्षर किए। कानून रूस पर प्रतिबंधों और शुल्क से संबंधित अधिकारों का विस्तार करता है तथा ईरान से जुड़े मौजूदा प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाता है। इसके बाद रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों पर अमेरिकी कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।

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