तटबंध के टूटे हिस्से पर रिंग बांध बनना शुरू:बिजनौर-हरिद्वार से विशेषज्ञ टीम जुटी, स्थानीय अधिकारी भी रख रहे निगरानी; पानी कम होने से मिल रही सफलता
कुशीनगर मे गंडक नदी में पानी कम होने के बाद एपी तटबंध के टूटे हिस्से की मरम्मत तेज हो गई है। तटबंध के पास एक रिंग बांध बनाया जा रहा है, ताकि नींव को दोबारा कटने से बचाया जा सके। नदी के अंदर करीब 20 फीट गहराई तक लकड़ी के खंभे लगाए जा रहे हैं। इनके सहारे बोरियों की दीवार बन रही है। दो कतारों के बीच बोरियां भरकर पानी का बहाव रोकने का अस्थायी इंतजाम किया जा रहा है। बाढ़ खंड के इंजीनियर और कर्मचारी मौके पर लगे हैं। बिजनौर और हरिद्वार से आई विशेषज्ञ टीम भी बचाव और मरम्मत में जुटी है। टीम सदस्य राजन शर्मा ने बताया कि टूटे हिस्से को मजबूत करने के साथ ही कटान रोकने के इंतजाम भी हो रहे हैं। टूटे हिस्से को सुरक्षित किया जाएगा तमकुहीराज क्षेत्र में नदी का पानी कम होने से मरम्मत में तेजी आई है। रिंग बांध की पहली परत शुक्रवार को तैयार हुई। विभाग अब इसे मजबूत करने के लिए दोनों तरफ बोरियां लगा रहा है। फिलहाल विभागीय अधिकारी प्रमाणित तौर पर कैमरे के सामने बोलने से कतराते नजर आ रहे हैं, लेकिन सूचना के मुताबिक, अभी किए जा रहे ये इंतजाम अस्थायी हैं। इनके जरिए टूटे हिस्से को सुरक्षित किया जाएगा। इसके बाद स्थिति को देखते हुए तटबंध की स्थायी मरम्मत का काम आगे बढ़ाया जा सकेगा। सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं और सरकार के मंत्री आदि का दौरा आए दिन हो रहा है लेकिन बंधे के टूटने के कारणों पर चर्चा करने से बच रहे हैं, वहीं कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेता पूर्व विधायक अजय कुमार लल्लू ने अपनी प्रतिक्रिया में सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया पर अपना तंज कसते हुए कहा कि ईश्वर की कृपा से ही नदी का पानी कम हुआ है, वर्तमान बचाव का काम तभी संभव हुआ है, इसमें सरकार की कोई काबिलियत नहीं है ।
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