उन्नाव में 'गीत कलश' कवि सम्मेलन में प्रेम पर कविताएं:देशभर से जुटे कवि-शायरों ने देर रात तक बांधे रखा श्रोताओं को
उन्नाव में शनिवार की रात पार्क व्यू पैलेस में साहित्य, प्रेम और संवेदनाओं का ऐसा संगम देखने को मिला, जहां देशभर से जुटे कवि-शायरों की पंक्तियों ने देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। अभ्युदय सेवा संस्थान के दसवें विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह ‘गीत कलश’ में गीतकारों ने प्रेम की कोमल अनुभूतियों से लेकर सामाजिक सरोकारों तक को शब्द दिए। कभी श्रोता तालियों से दाद देते नजर आए तो कभी भावपूर्ण पंक्तियों पर पूरा सभागार शांत होकर रचनाओं को सुनता रहा। उन्नाव के नवोदित गीतकार शिवांश को भी इस बड़े साहित्यिक मंच पर काव्य पाठ का अवसर मिला। उन्होंने प्रेम की अनुभूति को सरल शब्दों में पिरोते हुए कहा “प्यार की कोई जात नहीं होती है, किसी को फुर्सत होती है तो बात कर लेता है।” प्रेम में दूरी, इंतजार और भावनाओं को व्यक्त करती उनकी पंक्तियों ने श्रोताओं को खूब प्रभावित किया। शिवांश ने अपनी रचनाओं में प्रेम की मासूमियत के साथ आत्मस्वीकार का भाव भी रखा। उनकी पंक्तियां “माफ करना, मैं तुम्हारे प्यार के लायक नहीं हूं” सुनकर साहित्यप्रेमी भावुक नजर आए। वहीं प्रकृति के बिंब के जरिए प्रेम को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा “तुम सरल सरिता जैसी बह रही हो और मैं जल में अभागा सा हूं।” प्रेम गीत की इन पंक्तियों पर सभागार तालियों से गूंज उठा। उन्होंने आगे कहा “तुम पर गीत जो लिख रहा हूं...”, जिसमें प्रेम को शब्दों में संजोने की कोशिश दिखाई दी।
अभ्युदय सेवा संस्थान की ओर से आयोजित इस दसवें साहित्यिक अनुष्ठान में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कवि, गीतकार, शायर और कवयित्रियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। गीतकार मणिका दुबे, ओजस्वी कवयित्री श्रद्धा शौर्य, गीतकार मुरारी मंडल, श्रृंगार रस की कवयित्री पल्लवी मिश्रा और ओज के कवि प्रख्यात मिश्रा ने अपनी प्रस्तुतियों से खूब तालियां बटोरीं। शायर डॉ. नदीम शाद ने गंगा-जमुनी तहजीब और सांस्कृतिक एकता से जुड़ी रचनाएं सुनाईं। जबलपुर की मणिका दुबे, सुदीप भोला, अनुराग मिश्र, श्रद्धा शौर्य नागपुर, प्रख्यात मिश्रा लखनऊ सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए रचनाकारों ने मंच को यादगार बना दिया। संस्था के अध्यक्ष डॉ. प्रभात सिन्हा ने आयोजन की रूपरेखा रखी। महामंत्री अनिरुद्ध सौरभ ने बताया कि नवोदित
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