उन्नाव में गंगा का जलस्तर 113.07 मीटर तक पहुंचा:गांवों में घुसा बाढ़ का पानी, गौशाला और पावर हाउस तक पहुंचा
उन्नाव में मैदानी इलाकों से मानसून की विदाई के बाद भी पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश का असर गंगा के जलस्तर पर दिखाई दे रहा है। नरौरा और हरिद्वार से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण गंगा का जलस्तर एक बार फिर खतरे के निशान को पार कर गया। शुक्रवार रात 10 बजे जलस्तर 113.02 मीटर दर्ज किया गया, जो शनिवार को बढ़कर 113.07 मीटर तक पहुंच गया। हालांकि रविवार सुबह जलस्तर घटकर 113.04 मीटर हो गया। करीब 12 घंटे में तीन सेंटीमीटर की गिरावट के बावजूद जलस्तर अभी खतरे के निशान के आसपास बना हुआ है। गंगाघाट क्षेत्र के कई इलाकों में पहुंचा बाढ़ का पानी
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के पार पहुंचने के बाद तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति फिर गंभीर हो गई है। गंगाघाट क्षेत्र के गोताखोर, कर्बला, हुसैन नगर, तेजी पुरवा और सैय्यद कंपाउंड समेत आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। रविदास नगर, मालवीय नगर, श्रीनगर और इंद्रा नगर में भी पानी प्रवेश कर गया है। कई स्थानों पर रास्तों पर पानी भरने से लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। घरों के आसपास तक बाढ़ का पानी पहुंचने से लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। दूसरी बार खतरे के निशान के पार पहुंची गंगा
पिछले करीब एक सप्ताह से गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस वर्ष गंगा का जलस्तर दूसरी बार चेतावनी बिंदु को पार कर चुका है। इसके बाद शुक्रवार रात जलस्तर दूसरी बार खतरे के निशान को भी पार कर गया। इसका असर तटीय क्षेत्रों के साथ ग्रामीण इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। गगनीखेड़ा, फत्तेखेड़ा समेत आसपास के कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गौशाला और पावर हाउस तक पहुंचा पानी
जलस्तर बढ़ने के कारण नेतुआ कान्हा गौशाला में एक बार फिर बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। इससे गौशाला में मौजूद पशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। वहीं त्रिभुवन खेड़ा पावर हाउस के पास भी बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। जलस्तर में और बढ़ोतरी होने पर आसपास के अन्य क्षेत्रों में भी जलभराव बढ़ने की आशंका है। अभी खतरे के निशान से नीचे आने का इंतजार
रविवार सुबह गंगा का जलस्तर 113.04 मीटर दर्ज किया गया। पिछले करीब 12 घंटे में तीन सेंटीमीटर की गिरावट जरूर हुई है, लेकिन जलस्तर अभी भी खतरे के निशान के आसपास बना हुआ है। केंद्रीय जल आयोग की ओर से जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। पानी में मामूली गिरावट के बावजूद तटीय क्षेत्रों के लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। नरौरा और हरिद्वार से पानी छोड़े जाने की मात्रा बढ़ने या पहाड़ी क्षेत्रों में दोबारा तेज बारिश होने पर जलस्तर फिर बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की निगाहें गंगा के जलस्तर पर टिकी हैं।
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