उन्नाव में गंगा खतरे के निशान से 7 सेंटीमीटर ऊपर:घरों में घुसा बाढ़ का पानी, गंगा बैराज पर भी असर दिखा
उन्नाव में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। शनिवार सुबह गंगा का जलस्तर 113.07 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 113 मीटर से 7 सेंटीमीटर ऊपर है। गुरुवार शाम छह बजे जलस्तर 112.82 मीटर था, जो शुक्रवार सुबह 112.91 और शनिवार सुबह 113.07 मीटर पहुंच गया। जलस्तर बढ़ने से गंगाघाट और आसपास के तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। कई कालोनियों में पानी घरों के अंदर तक पहुंच चुका है। प्रभावित परिवारों के सामने घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाने की चुनौती है, जबकि कई लोग घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण नरोरा और हरिद्वार बांधों में पानी का दबाव बढ़ा है। इसके चलते वहां से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। इसका असर कानपुर स्थित गंगा बैराज पर भी पड़ा है। पानी का दबाव बढ़ने के कारण बैराज के सभी 30 गेट पिछले पांच दिनों से पूरी तरह खुले हैं। इससे उन्नाव की ओर गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। कई मोहल्लों में घरों तक पहुंचा पानी तेजीपुरवा, कर्बला, गोतखोर, सैय्यद कंपाउंड और मनसुख खेड़ा में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। मालवीय नगर में भी पानी लगातार बढ़ रहा है। श्रीनगर में बड़ी संख्या में मकान बाढ़ की चपेट में हैं। यहां 18 फीट रोड पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ है। लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। गांवों में रास्ते डूबे, फसलों पर खतरा बाढ़ का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रहा है। फत्तेखेड़ा, गगनीखेड़ा और लक्ष्मीखेड़ा में पानी पहुंचने से प्रमुख मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। पीपरखेड़ा और गजियाखेड़ा में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लेखपाल तैनात गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार करने के बाद जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। तहसील प्रशासन को सक्रिय करते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और बाढ़ केंद्रों पर लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है। लेखपाल जलस्तर और प्रभावित इलाकों की स्थिति की जानकारी लगातार प्रशासन को दे रहे हैं। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।
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