क्या चार हिस्सों में बंटेगा उत्तर प्रदेश? राजभर का बड़ा दावा
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल अलग राज्य बना तो राजभर समाज का व्यक्ति वहां मुख्यमंत्री बन सकता है। राजभर ने जातिवार जनगणना और पिछड़े वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण में उप-वर्गीकरण की मांग भी दोहराई।
दि राइजिंग न्यूज़ | देवरिया | 21 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने देवरिया की सभा में दावा किया कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश चार हिस्सों में बंटेगा। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल अलग राज्य बना तो वहां राजभर समाज का व्यक्ति मुख्यमंत्री बनेगा। राजभर ने पिछड़े वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण में उप-वर्गीकरण और जातिवार जनगणना की मांग भी दोहराई।
क्या है उत्तर प्रदेश के बंटवारे को लेकर राजभर का दावा
देवरिया के सोनूघाट स्थित जनता इंटर कॉलेज में आयोजित सामाजिक समरसता महारैली में ओम प्रकाश राजभर ने उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन को लेकर बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में प्रदेश चार हिस्सों में बंटेगा। उनके अनुसार, अलग पूर्वांचल राज्य बनने पर राजभर समाज का व्यक्ति वहां मुख्यमंत्री बनेगा। यह बयान 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल में आया है।
पूर्वांचल को लेकर राजभर ने क्या कहा
राजभर ने कहा कि पूर्वांचल अलग राज्य बनने की स्थिति में वहां पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से होना चाहिए। उन्होंने अपने समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी को इस मांग से जोड़ा है। राजभर के अनुसार, पूर्वांचल में उनके समाज की महत्वपूर्ण आबादी है और इसी आधार पर उन्होंने भविष्य में नेतृत्व की दावेदारी की बात कही। यह उनका राजनीतिक दावा है, जिसे स्वतंत्र रूप से लागू होने वाले किसी सरकारी निर्णय के रूप में नहीं देखा जा सकता।
जातिवार जनगणना और आरक्षण का भी उठाया मुद्दा
राजभर ने उत्तर प्रदेश के बंटवारे के मुद्दे के साथ पिछड़े वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण में उप-वर्गीकरण की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि पिछड़े वर्ग की अलग-अलग जातियों को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने जातिवार जनगणना की जरूरत पर भी जोर दिया और दावा किया कि उन्होंने इस विषय पर प्रधानमंत्री से बातचीत की है। प्रधानमंत्री की ओर से ऐसा आश्वासन दिए जाने का दावा राजभर ने स्वयं किया है।
उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की पुरानी मांग
उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन की मांग नई नहीं है। वर्ष 2011 में तत्कालीन मायावती सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रदेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव पारित किया गया था। उस समय पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिमी क्षेत्र और अवध जैसे अलग क्षेत्रों के गठन की बात सामने आई थी। हालांकि, वह प्रस्ताव आगे राज्य के विभाजन के रूप में लागू नहीं हो सका।
चार हिस्से होने पर बदल सकता है राजनीतिक गणित
यदि भविष्य में उत्तर प्रदेश का पुनर्गठन होता है तो अलग-अलग क्षेत्रों में राजनीतिक और सामाजिक समीकरण भी बदल सकते हैं। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अवध की सामाजिक संरचना एक जैसी नहीं है। इसलिए अलग राज्य बनने की स्थिति में क्षेत्रीय दलों, सामाजिक समूहों और राजनीतिक नेतृत्व के बीच सत्ता की हिस्सेदारी का गणित भी अलग हो सकता है।
पूर्वांचल में राजभर, यादव और अन्य पिछड़े वर्गों की भूमिका
पूर्वांचल की राजनीति में राजभर, यादव, दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़े वर्गों की राजनीतिक भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है। राजभर इसी क्षेत्र में अपने समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग लंबे समय से उठाते रहे हैं। अलग पूर्वांचल राज्य बनने पर मुख्यमंत्री पद को लेकर उनकी ओर से राजभर समाज की दावेदारी का बयान इसी राजनीतिक संदर्भ में आया है। हालांकि, किसी क्षेत्र में सरकार किस सामाजिक समूह के नेतृत्व में बनेगी, यह चुनावी परिणाम और राजनीतिक गठबंधनों पर निर्भर करेगा।
बुंदेलखंड में अलग सामाजिक और राजनीतिक समीकरण
बुंदेलखंड को भी लंबे समय से अलग राज्य बनाने की मांग उठती रही है। इस क्षेत्र में दलित और पिछड़े वर्ग के साथ अन्य सामाजिक समूहों की भी महत्वपूर्ण मौजूदगी है। यदि कभी अलग राज्य का गठन होता है तो वहां राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सत्ता की हिस्सेदारी का नया समीकरण बन सकता है। फिलहाल बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने को लेकर कोई नया सरकारी निर्णय सामने नहीं आया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग समीकरण
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाट, मुस्लिम, दलित और अन्य समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। क्षेत्र में अलग-अलग चुनावों के दौरान इन समूहों के बीच राजनीतिक गठजोड़ बदलते रहे हैं। ऐसे में अलग पश्चिमी राज्य बनने की स्थिति में सत्ता का समीकरण भी मौजूदा उत्तर प्रदेश से अलग हो सकता है। हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई राज्य गठन नहीं हुआ है और इस संबंध में कोई नया सरकारी फैसला सामने नहीं आया है।
अवध क्षेत्र में भी बदल सकता है सत्ता का समीकरण
अवध क्षेत्र में कुर्मी, यादव, दलित, मुस्लिम और अन्य सामाजिक समूहों की राजनीतिक भूमिका अलग-अलग इलाकों में दिखाई देती है। अलग राज्य की स्थिति में इन समूहों के बीच प्रतिनिधित्व और सत्ता की हिस्सेदारी को लेकर नए समीकरण बन सकते हैं। हालांकि, किस समाज का राजनीतिक प्रभाव कितना होगा, इसे लेकर किए जा रहे दावे राजनीतिक विश्लेषण हैं, निश्चित परिणाम नहीं।
क्या 2027 चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश का बंटवारा होगा
राजभर का बयान ऐसे समय आया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। लेकिन अभी तक उत्तर प्रदेश के चार हिस्सों में विभाजन को लेकर केंद्र या राज्य सरकार की ओर से कोई नया आधिकारिक निर्णय घोषित नहीं किया गया है। इसलिए राजभर के बयान को फिलहाल एक राजनीतिक मांग और दावा ही माना जा सकता है, न कि राज्य के तत्काल विभाजन की घोषणा।
राजभर के बयान का राजनीतिक संदर्भ
राजभर की पार्टी का पूर्वांचल में राजनीतिक आधार है और वह लंबे समय से पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग उठाती रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे को फिर से प्रमुखता मिलने से क्षेत्रीय राजनीति में चर्चा तेज हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे बयानों के जरिए क्षेत्रीय नेतृत्व और सामाजिक प्रतिनिधित्व के मुद्दों को चुनावी बहस में प्रमुखता मिल सकती है। हालांकि, इसे चुनावी रणनीति मानना विश्लेषण है, स्थापित तथ्य नहीं।
फिलहाल क्या स्थिति है
फिलहाल उत्तर प्रदेश एक ही राज्य है और चार अलग राज्यों के गठन को लेकर कोई नया सरकारी फैसला लागू नहीं हुआ है। ओम प्रकाश राजभर ने भविष्य में प्रदेश के चार हिस्सों में बंटने का दावा किया है और पूर्वांचल में राजभर समाज के मुख्यमंत्री की बात कही है। इस दावे पर आगे केंद्र और राज्य स्तर पर क्या पहल होती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
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