आडवाणी को SIR नोटिस पर खरगे का बड़ा हमला

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत लालकृष्ण आडवाणी समेत कई प्रमुख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग की आलोचना की और इसे लोकतंत्र व मतदाता अधिकारों से जोड़कर अपनी आपत्ति जताई। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार नोटिस मिलना नाम कटने का मतलब नहीं है, बल्कि यह मतदाता विवरण के सत्यापन की प्रक्रिया का हिस्सा है।

Sep 21, 2026 - 14:46
0
आडवाणी को SIR नोटिस पर खरगे का बड़ा हमला

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 21 सितंबर 2026

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान लालकृष्ण आडवाणी, एस. जयशंकर, जगदीप धनखड़ समेत कई प्रमुख लोगों को मतदाता विवरण में विसंगतियों के संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग की आलोचना की और आरोप लगाया कि इससे आम मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार नोटिस जारी होना अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटने का मतलब नहीं है, बल्कि दस्तावेजों और विवरण के सत्यापन की प्रक्रिया का हिस्सा है।

दिल्ली में कई प्रमुख नेताओं को मिला नोटिस

दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों और अधिकारियों के नाम ऐसे मतदाताओं की सूची में सामने आए हैं, जिनके विवरण में विसंगतियां या पुराने अभिलेखों से जुड़ाव की समस्या बताई गई है। इनमें पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और चुनाव आयुक्त एस. एस. संधू समेत अन्य नाम शामिल हैं।

नोटिस मिलने का क्या है कारण

निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार कुछ मतदाताओं के वर्तमान विवरण पुराने मतदाता अभिलेखों से मेल नहीं खा रहे हैं या उनका पुराने पुनरीक्षण के अभिलेखों से मिलान नहीं हो पाया है। लालकृष्ण आडवाणी के मामले में भी पुराने अभिलेखों से जुड़ाव नहीं होने की बात सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक ऐसे मामलों में दस्तावेजों और तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।

नोटिस का मतलब नाम कटना नहीं

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि किसी मतदाता को नोटिस मिलना सीधे तौर पर उसका नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का संकेत नहीं है। संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाता है। इसके बाद ही दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के तहत आगे का निर्णय लिया जाएगा।

खरगे ने निर्वाचन आयोग पर उठाए सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सामाजिक माध्यम पर जारी अपने बयान में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शुरुआत से ही इस प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बताती रही है। खरगे ने आडवाणी समेत कई प्रमुख लोगों को नोटिस मिलने का हवाला देते हुए निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

‘वीआईपी मतदाता’ को लेकर भी खरगे का सवाल

खरगे ने निर्वाचन आयोग द्वारा ‘वीआईपी या चिह्नित मतदाता’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या मतदाताओं की कोई अलग विशेष श्रेणी बनाई जा रही है और क्या इससे समान मताधिकार के सिद्धांत पर असर पड़ता है। यह खरगे की राजनीतिक प्रतिक्रिया और निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर उनकी आपत्ति है, जिसे उन्होंने अपने सार्वजनिक बयान में रखा है।

पश्चिम बंगाल के आंकड़ों का दिया हवाला

खरगे ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान हटाए गए नामों के खिलाफ हुई अपीलों का भी उल्लेख किया। निर्वाचन आयोग की ओर से उच्चतम न्यायालय को दी गई जानकारी के अनुसार करीब 1.02 लाख अपीलों का निपटारा हुआ है, जबकि कुल अपीलों की संख्या लगभग 38.20 लाख बताई गई है। उपलब्ध रिपोर्टों में निपटाए गए मामलों में लगभग 93 प्रतिशत अपीलों के सफल होने की जानकारी सामने आई है।

दिल्ली में बड़ी संख्या में मतदाता जांच के दायरे में

दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत बड़ी संख्या में मतदाता विवरणों की जांच की जा रही है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार इस प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखना और अपात्र नामों को शामिल होने से रोकना है। दिल्ली में इस प्रक्रिया की अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम निर्धारित है।

निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया क्या कहती है

निर्वाचन आयोग के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता विवरण का सत्यापन किया जाता है। पात्र मतदाताओं को सूची से बाहर न रखने और अपात्र लोगों को सूची में शामिल न करने को इसका प्रमुख उद्देश्य बताया गया है। आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर भी विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित प्रपत्र, नाम खोजने और नोटिस के जवाब में दस्तावेज जमा करने की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

मामले में राजनीतिक टकराव बढ़ा

लालकृष्ण आडवाणी समेत प्रमुख हस्तियों को नोटिस मिलने के बाद विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे मतदाता अधिकारों से जोड़कर निर्वाचन आयोग की आलोचना की है, जबकि निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि नोटिस सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इनके आधार पर तत्काल नाम हटाने का निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। ऐसे में आगे की प्रक्रिया में दस्तावेजों और दावों के सत्यापन के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User