विधानसभा चुनाव तक अयोध्या में रहेंगे चंपत राय:चढ़ावा चोरी की जांच पूरी होने के बाद ऐसा क्यों हो रहा, जानिए वजह
अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच पूरी हो चुकी है। पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसमें पूर्व ट्रस्ट महासचिव चंपत राय को आरोपी नहीं बनाया गया है। उनका नाम गवाहों की सूची में शामिल है। अब चर्चा है कि चंपत राय फिलहाल अयोध्या से बाहर नहीं जाएंगे और 2027 के विधानसभा चुनाव तक यहीं रह सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय को पहले अयोध्या से बाहर भेजे जाने की चर्चा थी। हालांकि अब इस योजना को फिलहाल टाल दिया गया है। इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। आइए आपको 5 प्रमुख कारण बताते हैं। 1. अयोध्या से बाहर जाने पर विरोध का खतरा सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा मामले को लेकर अभी भी लोगों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। ऐसे में चंपत राय के अयोध्या से बाहर जाने पर उन्हें विरोध या लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए फिलहाल उन्हें अयोध्या में ही रहने देने पर विचार किया गया है। हालांकि इस संबंध में ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। 2. अयोध्या से उनका पुराना जुड़ाव चंपत राय लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण से जुड़े रहे हैं। 2020 में ट्रस्ट बनने के बाद वे महासचिव के तौर पर मंदिर निर्माण से जुड़े कामों में सक्रिय रहे। जुलाई में भी रिपोर्ट सामने आई थी कि चंपत राय ने अपने करीबियों से कहा था कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने तक वह अयोध्या नहीं छोड़ेंगे। अयोध्या के संत समाज के एक वर्ग से भी उनके समर्थन की बात सामने आती रही है। जुलाई में संतों की एक बैठक में चंपत राय के समर्थन में बातें कही गई थीं। 3. उम्र और अयोध्या में रहने की इच्छा चंपत राय 79 वर्ष के हैं। लंबे समय से अयोध्या में रहने के कारण उनका यहां से जुड़ाव भी काफी पुराना है। सूत्रों के मुताबिक, वह फिलहाल अयोध्या छोड़ना नहीं चाहते। ऐसे में उनकी इच्छा और उम्र को देखते हुए उन्हें यहीं रहने देने की बात कही जा रही है। 4. विधानसभा चुनाव से पहले मामला फिर चर्चा में न आए राम मंदिर से जुड़ा यह मामला अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले फिर राजनीतिक चर्चा में आ सकता है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी हाल में कहा कि इस मामले को विधानसभा चुनाव का मुद्दा बनाने की कोशिश हो रही है। ऐसे में चंपत राय को अयोध्या से बाहर भेजने का फैसला नए सवाल खड़े कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, इसी वजह से भी फिलहाल उनके अयोध्या में रहने की संभावना जताई जा रही है। 5. नई व्यवस्था के बीच अचानक बदलाव से बचने की कोशिश राम मंदिर ट्रस्ट में पिछले कुछ महीनों में बड़े बदलाव हुए हैं। चंपत राय ने महासचिव पद से इस्तीफा दिया और ट्रस्ट ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया था। इसके बाद नई व्यवस्था में अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी कृष्ण मोहन को दी गई थी। अब ट्रस्ट की नई व्यवस्था के तहत मंदिर से जुड़े काम आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में चंपत राय को अचानक अयोध्या से बाहर भेजने के बजाय फिलहाल यहीं रहने देने की चर्चा है। चढ़ावा मामले में आरोपी नहीं हैं चंपत राय राम मंदिर चढ़ावा मामले में दाखिल चार्जशीट में चंपत राय को आरोपी नहीं बनाया गया है। पुलिस ने उन्हें गवाहों की सूची में शामिल किया है। उनके साथ डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम भी गवाहों में है। मामले में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसलिए फिलहाल चंपत राय की भूमिका मामले में आरोपी की नहीं, बल्कि गवाह की है। आगे अदालत में उनकी गवाही और मामले की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उनकी भूमिका स्पष्ट होगी। अभी अयोध्या में ही हैं चंपत राय चढ़ावा मामले की जांच के दौरान भी चंपत राय अयोध्या में ही रहे थे। उन्होंने अपने करीबियों से कहा था कि जांच पूरी होने तक वह अयोध्या नहीं छोड़ेंगे। अब जांच और चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी उनके अयोध्या में बने रहने की चर्चा है। हालांकि विधानसभा चुनाव तक अयोध्या में रहने का कोई आधिकारिक आदेश या ट्रस्ट की ओर से सार्वजनिक घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल सूत्रों के हवाले से चल रही चर्चा के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
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