यूपी की बड़ी खबरें:मथुरा में अनिरुद्धाचार्य बोले- किसी की मौत के लिए संत जिम्मेदार नहीं, प्रेमानंद के शिष्य ने बिल्डिंग से कूदकर जान दी थी
वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत के मामले में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा- किसी की मौत के लिए संत को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है। प्रेमानंद महाराज बड़े संत और भगवत भक्त हैं, यह सभी जानते हैं। कुछ लोग पूरी जानकारी के बिना टीआरपी के लिए बातें करते हैं और खुद ही किसी को आरोपी मानकर फैसला सुनाने लगते हैं। उन्होंने कहा- कुछ लोग मामले की पूरी जानकारी नहीं रखते, फिर भी जज बनकर न्याय करने लगते हैं। प्रेमानंद महाराज रोज प्रवचन करते हैं और करोड़ों लोगों को भक्ति से जोड़ चुके हैं। इसके बावजूद उनके बारे में तरह-तरह की बातें की जा रही हैं। समाज में संतों को लेकर बिना वजह की बयानबाजी से बचना चाहिए। ये बातें उन्होंने 2 अक्टूबर को गौरी गोपाल आश्रम में कहीं। पढ़िए पूरी खबर… मेरठ में पूर्व बसपा सांसद के भाई राशिद अखलाक पर FIR: बिना अनुमति 50 लोगों के साथ जुलूस निकाला और नारेबाजी की मेरठ में केसरगंज मस्जिद के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने के ऐलान को लेकर चल रहे विवाद में अब पूर्व सांसद शाहिद अखलाक के भाई राशिद अखलाक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ है। कोतवाली पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर यह कार्रवाई की है। पुलिस का आरोप है कि राशिद अखलाक ने 29 सितंबर को बिना अनुमति 40 से 50 लोगों के साथ जुलूस निकाला और नारेबाजी की। इसे निषेधाज्ञा का उल्लंघन मानते हुए कोतवाली थाने में तैनात दरोगा शुभम सेंगर ने मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है। पढ़िए पूरी खबर… अमेरिका से चाचा की अस्थियां लेकर काशी पहुंचा जैक्सन: अस्सी घाट पर पिंडदान किया, आत्मा की शांति मांगी; बोला- रोज सपने में आते थे अमेरिका से जैक्सन अपने दिवंगत चाचा नेट की अस्थियां लेकर शनिवार को वाराणसी पहुंचे। यहां अस्सी घाट पर उन्होंने चाचा की आत्मा की शांति के लिए विधि-विधान से अस्थि विसर्जन और पिंडदान कराया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान जैक्सन भावुक दिखे। उन्होंने बताया कि मैं बचपन से अपने चाचा नेट के साथ रहा हूं। मेरा अपने चाचा से गहरा भावनात्मक जुड़ाव था। निधन के बाद भी मैं चाचा को याद करता रहता हूं। वह अक्सर रात में मेरे सपने में आते थे। चाचा के बार-बार दिखाई देने से मैं परेशान रहने लगा। मैंने इसका समाधान तलाशना शुरू किया। इसी दौरान मैंने काशी और यहां होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ा एक वीडियो देखा। इसमें काशी की धार्मिक मान्यताओं और अस्थि विसर्जन-पिंडदान की जानकारी मिली। इसके बाद मैंने चाचा की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए खुद काशी आने का फैसला किया। पढ़िए पूरी खबर…
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