एसबीआई के 3.75 लाख ग्राहकों का आँकड़ा लीक होने का दावा, हैकर समूह की खबर से मचा हड़कंप

भारतीय स्टेट बैंक के 3.75 लाख ग्राहकों का आँकड़ा लीक होने का दावा किया गया है। एक हैकर समूह ने 2,722 पीडीएफ दस्तावेज होने की बात कही है। मामले की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्राहकों को साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

Oct 20, 2026 - 11:02
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एसबीआई के 3.75 लाख ग्राहकों का आँकड़ा लीक होने का दावा, हैकर समूह की खबर से मचा हड़कंप

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 20 अक्टूबर 2026

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक के लाखों ग्राहकों के आँकड़े लीक होने का दावा सामने आया है। एक हैकर समूह ने कथित तौर पर 3 लाख 75 हजार खातों से जुड़ी जानकारी और 2,722 पीडीएफ दस्तावेज अपने पास होने की बात कही है। इस दावे की जानकारी साइबर सुरक्षा से जुड़े एक खाते के माध्यम से सामने आई है। हालाँकि, अभी तक इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और बैंक की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान सामने आने की जानकारी नहीं दी गई है।

एसबीआई के लाखों ग्राहकों की जानकारी लीक होने का दावा

भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहकों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सामने आने का दावा साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में चिंता का विषय बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘सिरियसिम’ नाम के एक हैकर समूह ने लगभग 3.75 लाख खातों से संबंधित जानकारी होने का दावा किया है। समूह के मुताबिक, उसके पास 2,722 पीडीएफ दस्तावेज भी मौजूद हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो इससे ग्राहकों की निजी जानकारी और बैंकिंग सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।

किन दस्तावेजों और जानकारियों के लीक होने की आशंका

सामने आई जानकारी के अनुसार, कथित आँकड़ों में ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी, बैंक खाता खोलने से जुड़े प्रपत्र, ऋण आवेदन और पते से संबंधित विवरण शामिल हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, ग्राहकों द्वारा बैंक में जमा किए गए पहचान संबंधी दस्तावेज भी इस कथित आँकड़ा संग्रह का हिस्सा बताए जा रहे हैं। हालाँकि, इन सभी जानकारियों के लीक होने की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे प्रमाणित घटना के बजाय एक गंभीर दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

 साइबर ठगी और पहचान की चोरी का बढ़ सकता है खतरा

यदि ग्राहकों की निजी जानकारी लीक होने का दावा सही साबित होता है, तो इसका इस्तेमाल साइबर अपराधी धोखाधड़ी के लिए कर सकते हैं। ग्राहकों के पते, पहचान संबंधी दस्तावेजों और ऋण आवेदनों की जानकारी का दुरुपयोग करके फर्जी आवेदन या अन्य वित्तीय अपराध किए जाने का खतरा हो सकता है। अपराधी बैंक अधिकारी बनकर ग्राहकों को फोन कर सकते हैं और उनसे गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में ग्राहकों के लिए सतर्क रहना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है।

एसबीआई के ग्राहकों को किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए

बैंक ग्राहकों को किसी अनजान व्यक्ति के फोन, संदेश या संदिग्ध कड़ी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में अपना एटीएम गोपनीय अंक, इंटरनेट बैंकिंग का गुप्त शब्द, ओटीपी या बैंक खाते से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी बनकर व्यक्तिगत जानकारी माँगता है, तो उसकी पहचान की पुष्टि किए बिना कोई विवरण नहीं देना चाहिए। ग्राहकों को समय-समय पर अपने खाते में होने वाले लेन-देन की जाँच भी करते रहना चाहिए।

एसबीआई ने आँकड़े लीक होने के मामले में क्या कहा

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध समाचार विवरण के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। हैकर समूह द्वारा किया गया दावा अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि बैंक के ग्राहकों का आँकड़ा वास्तव में लीक हुआ है। मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए बैंक की आधिकारिक सूचना और विश्वसनीय साइबर सुरक्षा जाँच का इंतजार करना जरूरी है। ग्राहकों को अपुष्ट संदेशों के आधार पर घबराने के बजाय सावधानी बरतनी चाहिए।

 खाते में धोखाधड़ी होने का पता कैसे चलेगा

यदि आपके बैंक खाते से बिना जानकारी के पैसे निकलते हैं या कोई अनजान लेन-देन दिखाई देता है, तो इसे नजरअंदाज न करें। खाते में प्रवेश करने के प्रयास से जुड़े अनजान संदेश या बिना किसी अनुरोध के लगातार आने वाले ओटीपी भी सावधान होने का संकेत हो सकते हैं। हालाँकि, केवल ऐसा संदेश आने से यह साबित नहीं होता कि आपका खाता हैक हो गया है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत बैंक को दें और अपने खाते की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएँ।

 साइबर ठगी होने पर कहाँ करें शिकायत

यदि खाते से अनधिकृत लेन-देन होता है या आपके साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें। भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायत करते समय लेन-देन का विवरण, प्राप्त संदेश और अन्य संबंधित प्रमाण सुरक्षित रखें, ताकि मामले की जाँच में सहायता मिल सके।

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