बई में डॉन का खौफ लौटा? सलमान से टाइगर श्रॉफ तक निशाने पर!

मुंबई में फिल्म जगत की हस्तियों से जुड़ी गोलीबारी और धमकियों की घटनाओं ने संगठित अपराध को लेकर चिंता बढ़ाई है। जानिए नब्बे के दशक के अंडरवर्ल्ड और आज के कथित गिरोहों के काम करने के तरीकों में क्या अंतर है।

Oct 19, 2026 - 13:02
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बई में डॉन का खौफ लौटा? सलमान से टाइगर श्रॉफ तक निशाने पर!

दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई | 19 अक्टूबर 2026

संक्षिप्त सारांश: मुंबई और फिल्म जगत से जुड़ी हस्तियों को मिल रही धमकियों तथा गोलीबारी की घटनाओं ने संगठित अपराध को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सलमान खान के घर पर गोलीबारी, बाबा सिद्दीकी की हत्या और फिल्म जगत से जुड़े अन्य मामलों के बीच लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का नाम सामने आता रहा है। क्या यह नब्बे के दशक के मुंबई के माफिया दौर की वापसी है, या अपराध का तरीका बदल गया है? जानिए इस पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण।

मुंबई में फिर बढ़ा फिल्म जगत पर हमलों का खतरा

मुंबई में फिल्म जगत की हस्तियों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने एक बार फिर संगठित अपराध को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सलमान खान के घर के बाहर गोलीबारी से लेकर बाबा सिद्दीकी की हत्या और अन्य कलाकारों से जुड़ी धमकियों तक, इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान खींचा है। प्रस्तुत समाचार में 18 अक्टूबर 2026 को अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर गोलीबारी किए जाने का भी दावा किया गया है। हालांकि, इस ताजा घटना और इससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मुंबई में एक बार फिर वही दौर लौट रहा है, जब अपराध जगत के लोग फिल्म निर्माताओं, अभिनेताओं और कारोबारियों को खुलेआम धमकाते थे? नब्बे के दशक में माफिया गिरोहों का फिल्म उद्योग पर प्रभाव चर्चा में रहता था। आज अपराधियों द्वारा कथित रूप से सामाजिक माध्यमों के जरिए धमकी देने और छोटे हमलावरों का इस्तेमाल करने जैसे तरीकों ने चिंता बढ़ाई है।

 टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर गोलीबारी का दावा

प्रस्तुत समाचार के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 की शाम मुंबई के जुहू इलाके में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर तीन हमलावरों ने गोलीबारी की। खबर में सात गोलियां चलने, पांच के गाड़ी पर लगने और दो के निशाने से चूकने का दावा किया गया है। इसमें अभिनेता के सुरक्षित बचने और चालक सहित दो लोगों के घायल होने की बात भी कही गई है। इस घटना तथा कथित गिरोह की जिम्मेदारी से संबंधित दावों की पुष्टि पुलिस के आधिकारिक बयान से की जानी चाहिए।

 आमिर खान को कथित जान से मारने की धमकी

खबर के मुताबिक, जुलाई 2026 में अभिनेता आमिर खान को लेकर सामाजिक माध्यमों पर एक धमकी भरा संदेश और आवाज संबंधी संदेश प्रसारित हुआ था। इसमें कथित रूप से लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े लोगों के नाम सामने आए। संदेश में अभिनेता पर आरोप लगाते हुए उन्हें नुकसान पहुंचाने की धमकी दिए जाने की बात कही गई। ऐसे मामलों में किसी गिरोह की भूमिका तय करने के लिए पुलिस जांच और प्रमाण महत्वपूर्ण होते हैं।

 गुरु रंधावा से जुड़े व्यायाम केंद्र के बाहर गोलीबारी

जून 2026 में दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में गायक गुरु रंधावा से जुड़े एक व्यायाम केंद्र के बाहर गोलीबारी किए जाने की खबर सामने आई थी। प्रस्तुत समाचार में दो मोटरसाइकिल सवार हमलावरों द्वारा सात गोलियां चलाने की बात कही गई है। खबर के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में कथित रूप से लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। हमले के पीछे बताए गए कारणों को जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ही स्वीकार किया जाना चाहिए।

रणवीर सिंह के प्रबंधक को कथित वसूली की धमकी

फरवरी 2026 में अभिनेता रणवीर सिंह के प्रबंधक को कथित तौर पर एक आवाज संबंधी संदेश मिला था, जिसमें बड़ी रकम की मांग की गई थी। खबर में यह रकम 20 करोड़ रुपये बताई गई है। मामले में हरिचंद्र उर्फ हैरी बॉक्सर का नाम सामने आने और उसके विरुद्ध कार्रवाई किए जाने का उल्लेख है। यह घटना दिखाती है कि फिल्म जगत की हस्तियों और उनके प्रतिनिधियों को आर्थिक वसूली के लिए निशाना बनाए जाने की आशंका भी बनी हुई है।

 रोहित शेट्टी के घर के बाहर गोलीबारी

फरवरी 2026 में फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के मुंबई स्थित घर के बाहर गोलीबारी की घटना की खबर आई थी। प्रस्तुत समाचार के अनुसार, रात के समय पांच गोलियां चलाई गईं और एक गोली इमारत के भीतर स्थित व्यायाम कक्ष के शीशे पर लगी। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी। खबर में पुलिस द्वारा कई आरोपियों को गिरफ्तार करने और जांच में अनमोल बिश्नोई की कथित भूमिका सामने आने का दावा किया गया है।

कनाडा में कपिल शर्मा के भोजनालय के पास गोलीबारी

वर्ष 2025 में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर में हास्य कलाकार कपिल शर्मा के भोजनालय से जुड़े परिसर के पास गोलीबारी की कई घटनाएं सामने आने की खबर दी गई थी। प्रस्तुत समाचार में जुलाई, अगस्त और अक्टूबर के दौरान तीन घटनाओं का उल्लेख है। इन घटनाओं को कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जोड़ा गया था। विदेश में हुई ऐसी घटनाओं ने यह सवाल उठाया कि संगठित अपराध से जुड़े खतरे किसी एक शहर या देश तक सीमित नहीं रह सकते।

 बाबा सिद्दीकी की हत्या ने बढ़ाई चिंता

12 अक्टूबर 2024 को महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की मुंबई के बांद्रा पूर्व इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना उनके बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर हुई थी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। प्रस्तुत समाचार के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया था और साजिश में अनमोल बिश्नोई की कथित भूमिका का उल्लेख किया था।

सलमान खान के घर के बाहर गोलीबारी

14 अप्रैल 2024 को मुंबई के बांद्रा इलाके में अभिनेता सलमान खान के आवास गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोलीबारी की थी। इस घटना के बाद पुलिस ने संगठित अपराध से जुड़े होने के आरोपों की जांच की और कई लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की। मामले में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का नाम सामने आया। इस घटना ने अभिनेता की सुरक्षा और फिल्म जगत की अन्य प्रमुख हस्तियों को मिल रही कथित धमकियों पर देशभर में चर्चा शुरू कर दी थी।

नब्बे के दशक में मुंबई के अंडरवर्ल्ड का कितना प्रभाव था

नब्बे के दशक में मुंबई का अंडरवर्ल्ड फिल्म उद्योग और कारोबार जगत के लिए बड़ी चुनौती माना जाता था। दाऊद इब्राहिम के नेतृत्व वाले डी-कंपनी गिरोह, छोटा राजन और अरुण गवली जैसे नाम उस समय अपराध जगत की चर्चाओं में प्रमुख थे। फिल्म निर्माण में धन लगाने, निर्माताओं से वसूली करने और कलाकारों को धमकाने जैसी घटनाओं ने उद्योग में भय का माहौल पैदा किया था।उस दौर में अपराधियों द्वारा फिल्म निर्माताओं और कलाकारों पर दबाव डालने की खबरें आती थीं। कुछ मामलों में विदेश से धमकियां देने और धन की मांग करने के आरोप भी सामने आए। हालांकि, उस समय के सभी फिल्म निर्माण या आर्थिक लेन-देन पर माफिया का नियंत्रण था, ऐसा कहना सही नहीं होगा। फिर भी संगठित अपराध और फिल्म उद्योग के बीच कथित संबंधों ने मुंबई की छवि तथा सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया था।

 गिरोहों का बदलता स्वरूप

आज मुंबई में सामने आने वाली कई चर्चित घटनाओं में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का नाम जांच और समाचारों के केंद्र में रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि संगठित अपराध की दुनिया में पुराने नामों के साथ नए गिरोह भी प्रभाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, किसी गिरोह की वास्तविक ताकत, उसके नेटवर्क और दूसरे गिरोहों की मौजूदा स्थिति का आकलन प्रमाणों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

जेल से नेटवर्क चलाने के आरोप

लॉरेंस बिश्नोई जैसे आरोपियों के संबंध में जेल से गिरोह चलाने और बाहर मौजूद लोगों के जरिए वारदात कराने के आरोप समय-समय पर सामने आए हैं। आधुनिक संचार माध्यमों, इंटरनेट आधारित फोन सेवाओं और सामाजिक माध्यमों के इस्तेमाल से अपराधियों के बीच संपर्क बनाए रखने की आशंका बढ़ती है। लेकिन किसी विशेष घटना में जेल से निर्देश दिए जाने का दावा तभी पुष्ट माना जाना चाहिए, जब जांच में इसके पर्याप्त प्रमाण सामने आएं।

 धमकी और गोलीबारी के जरिए भय पैदा करना

किसी व्यक्ति को धमकी देना, धन की मांग करना या सार्वजनिक स्थान पर गोलीबारी करना केवल संबंधित व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं रहता। इससे उसके परिवार, कर्मचारियों और आसपास के लोगों में भी भय पैदा हो सकता है। चर्चित हस्तियों से जुड़े मामलों में ऐसी घटनाएं व्यापक चर्चा का विषय बनती हैं। यही कारण है कि पुलिस के लिए आरोपियों की पहचान के साथ-साथ संभावित साजिश और पूरे नेटवर्क की जांच करना भी जरूरी होता है।

बदले की भावना और आर्थिक वसूली के आरोप

कुछ मामलों में कथित तौर पर धन की मांग को हमले का कारण बताया गया है, जबकि अन्य मामलों में व्यक्तिगत दुश्मनी या वैचारिक कारणों के दावे सामने आए हैं। सलमान खान से जुड़े मामले में वर्ष 1998 के काले हिरण शिकार प्रकरण का उल्लेख भी लंबे समय से होता रहा है। हालांकि, अलग-अलग घटनाओं के पीछे एक ही कारण मानना उचित नहीं है। हर मामले में पुलिस की जांच और न्यायालय में प्रस्तुत प्रमाणों के आधार पर ही वास्तविक उद्देश्य निर्धारित किया जा सकता है।

क्या मुंबई में फिर लौट आया है डॉन का दौर

मुंबई में हुई गोलीबारी, हत्याओं और धमकियों की घटनाओं की तुलना नब्बे के दशक से जरूर की जा रही है, लेकिन दोनों दौर को पूरी तरह समान मानना जल्दबाजी होगी। उस समय फिल्म उद्योग में माफिया के प्रभाव और धन के लेन-देन से जुड़े आरोप चर्चा में थे। वर्तमान समय में कथित धमकियों, छोटे हमलावरों, आधुनिक संचार साधनों और अलग-अलग स्थानों पर होने वाली घटनाओं ने अपराध की चुनौती को नया स्वरूप दिया है।मुंबई पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे अपराधों के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क की पहचान करना है। केवल गोली चलाने वाले आरोपियों को गिरफ्तार करना पर्याप्त नहीं होता; कथित साजिशकर्ताओं, आर्थिक लेन-देन और संपर्कों की भी जांच आवश्यक है। वहीं, फिल्म जगत की हस्तियों की सुरक्षा, समय पर खतरे का आकलन और प्रमाणों के आधार पर कार्रवाई करना भी महत्वपूर्ण है।

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