लखनऊ में सिपाही बना फरिश्ता, सीपीआर देकर बचाई बुजुर्ग की जान
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के महानगर क्षेत्र में एक बुजुर्ग की जान बचाने में पुलिसकर्मी की तत्परता अहम साबित हुई। बताया गया है कि 60 वर्षीय अनिल अपनी पत्नी के साथ थे, तभी उन्हें सीने में दर्द हुआ और उनकी हालत बिगड़ गई। ऐसे समय में पुलिसकर्मी ने तुरंत हृदय-फुफ्फुस पुनर्जीवन (सीपीआर) की सहायता से उनकी जान बचाने का प्रयास किया। यह घटना आपात स्थिति में समय पर सहायता और प्राथमिक उपचार के महत्व को सामने लाती है।
दि राइजिंग न्यूज़ | लखनऊ | 17 अक्टूबर 2026
लखनऊ में पुलिसकर्मी की तत्परता और सूझबूझ से एक बुजुर्ग की जान बचाने का मामला सामने आया है। महानगर क्षेत्र में 60 वर्षीय अनिल कुमार अचानक सीने में तेज दर्द होने के बाद सड़क पर बेसुध होकर गिर पड़े। उस समय उनकी हालत देखकर आसपास मौजूद लोग घबरा गए, लेकिन मौके पर तैनात सिपाही संदीप यादव ने बिना देर किए उनकी सहायता शुरू कर दी। सिपाही के समय पर उठाए गए कदम से बुजुर्ग को आवश्यक उपचार मिल सका।
सीने में तेज दर्द के बाद सड़क पर गिरे बुजुर्ग
जानकारी के अनुसार, अनिल कुमार अपनी पत्नी के साथ बाजार से सब्जी खरीदकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान महानगर चौराहे के पास उनके सीने में अचानक तेज दर्द उठा और वह सड़क पर गिरकर बेसुध हो गए। बुजुर्ग की हालत बिगड़ते देखकर उनकी पत्नी घबरा गईं और आसपास मौजूद लोगों का ध्यान भी घटना की ओर गया। ऐसी आपात स्थिति में कुछ ही मिनट बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते थे।
सिपाही संदीप यादव ने तुरंत शुरू की सहायता
घटना के समय रहीमनगर पुलिस चौकी में तैनात सिपाही संदीप यादव आसपास ही मौजूद थे। बुजुर्ग को सड़क पर गिरा देखकर वह तुरंत उनके पास पहुंचे और उनकी गंभीर हालत को देखते हुए हृदय-फुफ्फुस पुनर्जीवन यानी सीपीआर देना शुरू किया। उन्होंने लगभग डेढ़ से दो मिनट तक लगातार प्रयास किया, जिसके बाद बुजुर्ग की हालत में सुधार होने लगा। सिपाही की त्वरित कार्रवाई इस घटना में बेहद महत्वपूर्ण रही।
अस्पताल पहुंचाने की कराई व्यवस्था
प्राथमिक सहायता के बाद बुजुर्ग को आगे के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। पुलिसकर्मियों ने उनके परिवार को भी घटना की सूचना दी, ताकि परिजन समय पर अस्पताल पहुंच सकें। बुजुर्ग की सहायता के लिए आसपास मौजूद लोगों ने भी सहयोग किया। इस पूरे घटनाक्रम में पुलिसकर्मी की तत्परता के साथ-साथ समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की भूमिका भी अहम रही।
पुलिसकर्मी के कार्य की हुई सराहना
सिपाही संदीप यादव की इस मानवीय पहल की लोगों ने सराहना की। घटना का दृश्य सामने आने के बाद उनकी सूझबूझ और कर्तव्यनिष्ठा की चर्चा होने लगी। समाचारों के अनुसार, पुलिस आयुक्त तरुण गाबा ने भी बुजुर्ग की जान बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले सिपाही को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। यह घटना बताती है कि पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ जरूरत के समय नागरिकों की सहायता करना भी है।
आपात स्थिति में समय पर सहायता का महत्व
सीने में अचानक तेज दर्द, बेहोशी या सामान्य रूप से सांस न ले पाने जैसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। ऐसी परिस्थिति में प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा उचित तरीके से सीपीआर दिए जाने से जीवन बचाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, सीपीआर चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है और आपातकालीन सहायता भी तुरंत बुलानी चाहिए। लखनऊ की यह घटना प्राथमिक उपचार के प्रशिक्षण और संकट के समय तत्परता की अहमियत को उजागर करती है।
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