इंडोनेशिया का शेयर बाजार 11.57 प्रतिशत टूटा, 28 साल का रिकॉर्ड प्रभावित
इंडोनेशिया के शेयर बाजार में शुक्रवार को 11.57 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। एमएससीआई की चेतावनी, बाजार की पारदर्शिता पर उठे सवाल और विदेशी निवेशकों की चिंता के बीच प्रमुख बैंकिंग कंपनियों के शेयर भी टूट गए।
दि राइजिंग न्यूज़ | इंडोनेशिया | 17 अक्टूबर 2026
संक्षिप्त सार: इंडोनेशिया के शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। जकार्ता संयुक्त सूचकांक 11.57 प्रतिशत तक टूट गया, जिसे जनवरी 1998 के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट बताया गया है। वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई की चेतावनी से निवेशकों की चिंता बढ़ी। बाजार में तेज बिकवाली के कारण कारोबार को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा और प्रमुख बैंकिंग कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट देखी गई।
इंडोनेशिया के शेयर बाजार में भारी बिकवाली
इंडोनेशिया के शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी गिरावट के कारण निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई। जकार्ता संयुक्त सूचकांक 11.57 प्रतिशत तक नीचे आ गया, जो जनवरी 1998 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट बताई गई है। बाजार में अचानक आई इस गिरावट से निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि बाजार में कारोबार को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।
28 साल बाद दर्ज हुई इतनी बड़ी गिरावट
शुक्रवार को इंडोनेशिया का शेयर बाजार लगभग आठ प्रतिशत की गिरावट के साथ खुला था। कारोबार शुरू होने के बाद बिकवाली और तेज हो गई, जिसके कारण बाजार में लगभग 30 मिनट के लिए कारोबार रोक दिया गया। इस दौरान प्रमुख बैंकिंग कंपनियों के शेयरों पर विशेष दबाव देखने को मिला। बाजार में आई इस गिरावट ने निवेशकों के बीच वित्तीय अनिश्चितता को लेकर चिंता बढ़ा दी।
एमएससीआई की चेतावनी से बढ़ी निवेशकों की चिंता
इंडोनेशिया के शेयर बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई की चेतावनी को माना जा रहा है। एमएससीआई ने इंडोनेशिया के बाजार का दर्जा घटाकर उसे स्वतंत्र बाजार की श्रेणी में रखने का प्रस्ताव दिया है। फिलहाल इंडोनेशिया को उभरते बाजारों की श्रेणी में रखा जाता है। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो वैश्विक निवेश कोषों के निवेश संबंधी फैसलों पर इसका असर पड़ सकता है।
प्रमुख बैंकिंग कंपनियों के शेयर भी टूटे
बाजार में आई गिरावट का असर इंडोनेशिया की प्रमुख बैंकिंग कंपनियों पर भी दिखाई दिया। बैंक सेंट्रल एशिया, बैंक राक्यत इंडोनेशिया और बैंक मंदिरी के शेयरों में लगभग 15 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज किए जाने की खबर है। इन कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली से बाजार पर दबाव और बढ़ गया। बैंकिंग क्षेत्र में गिरावट का असर निवेशकों की धारणा पर भी पड़ सकता है, क्योंकि बड़ी वित्तीय कंपनियां शेयर बाजार का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई इंडोनेशियाई मुद्रा
शेयर बाजार में गिरावट के साथ इंडोनेशिया की मुद्रा पर भी दबाव देखने को मिला। खबर के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इंडोनेशियाई रुपिया कमजोर होकर लगभग 18,070 के स्तर तक पहुंच गया। मुद्रा की कमजोरी से विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि इससे निवेश के मूल्य और उससे मिलने वाले प्रतिफल पर असर पड़ता है। हालांकि, मुद्रा विनिमय दरों में बदलाव के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण हो सकते हैं।
बाजार की पारदर्शिता पर एमएससीआई ने उठाए सवाल
एमएससीआई ने इंडोनेशिया के शेयर बाजार में पारदर्शिता, कंपनियों के शेयरों के स्वामित्व और कारोबार से संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताई है। निवेशकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होता है कि किसी कंपनी के शेयरों का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है और उनका कारोबार किस प्रकार हो रहा है। इन जानकारियों में अस्पष्टता होने पर बाजार की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से इंडोनेशिया के बाजार के वर्गीकरण में संभावित बदलाव को लेकर निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी है।
विदेशी निवेशकों के पैसा निकालने का खतरा
यदि एमएससीआई इंडोनेशिया के बाजार का दर्जा घटाता है, तो कुछ वैश्विक निवेश कोष अपने निवेश की समीक्षा कर सकते हैं। इससे विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली बढ़ने और शेयर बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। हालांकि, निवेशकों का वास्तविक व्यवहार इस बात पर निर्भर करेगा कि एमएससीआई क्या अंतिम निर्णय लेता है और बाजार की स्थिति आगे कैसी रहती है। फिलहाल इस घटनाक्रम ने इंडोनेशिया के वित्तीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
वैश्विक निवेशकों की नजर इंडोनेशिया के बाजार पर
इंडोनेशिया के शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों की नजर आगे के घटनाक्रम पर बनी हुई है। बाजार की पारदर्शिता से जुड़े सवालों और एमएससीआई के प्रस्ताव पर होने वाले फैसले का असर निवेशकों के विश्वास पर पड़ सकता है। यदि अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रहती है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि, भविष्य की दिशा एमएससीआई के अंतिम निर्णय, आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।
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