1.43 करोड़ के खर्च का हिसाब छह साल से लंबित:संतकबीरनगर में DPRO ने पूर्व एडीओ पंचायत समेत सात सचिवों को नोटिस जारी किया

Oct 15, 2026 - 12:01
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1.43 करोड़ के खर्च का हिसाब छह साल से लंबित:संतकबीरनगर में DPRO ने पूर्व एडीओ पंचायत समेत सात सचिवों को नोटिस जारी किया
संतकबीरनगर में ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों पर खर्च हुई धनराशि से जुड़ी करीब 1.43 करोड़ रुपये की ऑडिट आपत्तियां छह साल से लंबित हैं। वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2020-21 की इन आपत्तियों का जवाब नहीं मिलने पर जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) ने सख्ती शुरू कर दी है। मेंहदावल और अन्य ब्लॉकों में तैनात रहे सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत राजेश कुमार पांडेय समेत सात सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब और जरूरी अभिलेख मांगे गए हैं। नोटिस पाने वालों में बबलू निषाद, सौरभ चौधरी, अभिषेक रावत, अनिल कुमार, अलाउद्दीन और सतीश कुमार शामिल हैं। संबंधित सचिवों को ग्राम पंचायतवार खर्च का हिसाब, अभिलेख और ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। तीन ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में आपत्तियां लंबित उपलब्ध विवरण के अनुसार, बेलहर ब्लॉक की ग्राम पंचायत छपवा में 4.39 लाख और 8.73 लाख रुपये, सोनौंरा गुमान राय में करीब 25.97 लाख रुपये और बटसरा में 84 हजार व 99,960 रुपये से जुड़ी ऑडिट आपत्तियां लंबित हैं। बबलू निषाद के कार्यकाल से जुड़ी खटियांवा, बेरेनिया और कुसरू खुर्द ग्राम पंचायतों में भी विभिन्न धनराशियों का हिसाब मांगा गया है। सौरभ चौधरी के कार्यकाल से संबंधित दुधारा, कुल्हड़ियां, लोहरौली और भेलाखर्ग कला ग्राम पंचायतों में भी ऑडिट आपत्तियां लंबित बताई गई हैं। वहीं सांथा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सांडा, मुसहरा, पसनारा, गहबा, पथरहट, करनजोत, हकीमराई, गोबडौरी, बेलवा मिश्र और बजही में भी वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2020-21 से जुड़े मामलों का निस्तारण नहीं हुआ है। गड़बड़ी मिलने पर होगी वसूली डीपीआरओ अरुण कुमार ने बताया कि लंबित ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण के लिए संबंधित सचिवों को नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें निर्धारित समय में जवाब और जरूरी दस्तावेज देने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमावली, 1947 की धारा 27 और वित्तीय लेखा मैनुअल के नियम 256 व 257 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। धनराशि के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर नियमानुसार आधी रकम तत्कालीन ग्राम प्रधान और आधी संबंधित ग्राम पंचायत सचिव से वसूल की जाएगी।

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