10,000 बांस-बल्लियों से काशी में बन रहा विश्व का आठवां-अजूबा:कंबोडिया के भगवान विष्णु के अंग्कोरवाट मंदिर में विराजेंगी मां दुर्गा,नवरात्र की सप्तमी से होंगे दर्शन

Oct 04, 2026 - 07:43
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10,000 बांस-बल्लियों से काशी में बन रहा विश्व का आठवां-अजूबा:कंबोडिया के भगवान विष्णु के अंग्कोरवाट मंदिर में विराजेंगी मां दुर्गा,नवरात्र की सप्तमी से होंगे दर्शन
धर्म की नगरी काशी में मां दुर्गा की पूजा का समारोह शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होगा। ऐसे में काशी में मां दुर्गा का पूजनोत्सव भी होगा। जिसके लिए शहर में भव्य पंडाल बनाए जा रहे हैं। इसी क्रम में वाराणसी के हथुआ मार्केट स्थित प्रीमियर बॉयज क्लब द्वारा विश्व प्रसिद्ध कंबोडिया का विष्णु मंदिर अंग्कोरवाट मंदिर बनाया जा रहा है। यह मंदिर साल 2023 में विश्व का आठवां अजूबा बना है। जिसमें मां दुर्गा की 12 फिट की प्रतिमा सौम्य रूप में विराजेगी। इस पंडाल का निर्माण 10 हजार बांस-बल्लियों से मिलाकर हो रहा है। बता दें की यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर अब बौद्ध धर्म का प्रसिद्ध मंदिर है। ऐसे में दैनिक भस्कर ने प्रीमियर बॉयज क्लब के पदाधिकारियों से बात की और जाना की इस बार क्या खास रहेगा और कितने वर्ष से यह क्लब प्रतिमा बैठा रहा है। साथ ही कितने मजदूर दिन रात यहां काम कर रहे हैं। सबसे पहले देखिये दुर्गा पंडाल की तीन तस्वीरें… अब जानिए क्या है इस वर्ष की खासियत… कंबोडिया के विष्णु मंदिर की प्रतिकृती शुभम सिंह ने बताया - प्रीमियर बॉयज क्लब की हमेशा से यह सोच रही है की सनातन को मजबूत करने के लिए देश विदेश के हिंदू मंदिरों की छायाकृति बनाई जाती रही है। इसी क्रम में इस वर्ष पूरे विश्व में मशहूर भगवान विष्णु के मंदिर जो की कंबोडिया में है। उसे बनाया जा रहा है। इसे बनाने में बंगाल के 50 कारीगर लगे हैं। यह पंडाल इतना बड़ा है कि एक बार में 10 हजार श्रद्धालु प्रतिमा का दर्शन करेंगे। 10 हजार बांस-बल्लियों से बन रहा पंडाल शुभम ने बताया - प्रतिमा हमारी काशी में बन रही है। यह भी कंबोडिया के मंदिर से प्रेरित है। यह भी सौम्य रूप में प्रतिमा खड़ी मुद्रा में रहेगी। जिसकी लंबाई मानक के अनुरूप ही रहेगी। शुभम ने बताया इस बार करीब 10 हजार बांस बल्लियों से यह पंडाल बनाया जा रहा है। जिसमें 20 किलो से अधिक कीलें लगाईं जा चुकी हैं। यह पंडाल पिछले दो महीने से बनना शुरू हुआ है और हमारे यहां सप्तमी से दर्शन शुरू होगा। पहली बार नहीं रहेंगे कानू बाबू हथुआ मार्केट के प्रसिद्ध पंडाल को डेकोरेट करने वाले कानू बाबू इस बार इस पंडाल में सहयोग नहीं कर रहे हैं। शुभम ने बताया पहली बार साल 1980 से कानू बाबू डेकोरेटर्स जो इस पंडाल का काम करते आ रहे थे। उनकी जगह किरण डेकोरेटर्स को इस पंडाल का ठेका दिया गया है। पंडाल में कई शिफ्ट में कई टीमें काम कर रही हैं। अब जानिए कंबोडिया के विष्णु मंदिर के बारे में… दुनिया का आठवां अजूबा है कंबोडिया का विष्णु मंदिर कंबोडिया के अंग्कोरवाट मंदिर इटली के पोम्पेई को पछाड़कर साल 2023 में दुनिया का आठवां अजूबा बन गया है। 800 वर्ष पुराने इस मंदिर का निर्माण राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने करवाया था। अंकोर वाट मूल रूप से हिंदू धर्म के भगवान विष्णु को समर्पित था, लेकिन बाद में यह बदल कर एक बौद्ध मंदिर बन गया। यह दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर है। यह करीब 500 एकड़ के क्षेत्र में फैला है। हिंदू धर्म के ग्रन्थ भी उल्लेखित हैं अंकोरवाट यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट लिस्ट में शामिल दुनिया का सबसे विशाल हिंदू मंदिर है। यह मंदिर मूल रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसकी दिवारों पर विभिन्न हिंदू ग्रंथों में उल्लेखित विभिन्न प्रसंगों का विस्तार से चित्रण किया गया है। बता दें की यह हिंदू मंदिर, एक बौद्ध मंदिर में परिवर्तित हो चुका है। मंदिर का हिंदू धर्म से बौद्ध धर्म में परिवर्तित होने का इसकी दिवारों की जटिल नक्काशियों में स्पष्ट दिखाई देता है। जहां हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं के साथ-साथ बौद्ध धर्म से जुड़ी कथाओं के दृश्यों को भी दर्शाया गया है। वास्तुकला की वजह से बना 8वां अजूबा अंकोरवाट मंदिर को अपनी शानदार वास्तुकला की वजह से ही दुनिया का 8वां अजूबा कहा गया है। 500 एकड़ के क्षेत्र में फैला यह मंदिर चारों तरफ से बेहद मजबूत चहारदीवारी से घिरा हुआ है। मंदिर के केंद्रीय परिसर में कमल के आकार के 5 गुंबद बने हुए हैं। जो माउंट मेरु का प्रतिनिधित्व करते हैं। मंदिर के दिवारों की सज्जा काफी जटिल है। जिसमें खमेर शास्त्रिय शैली का प्रभाव दिखता है।

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