11 साल बाद भी कांस्टेबल के परिवार को मुआवजा नहीं:प्रमुख सचिव गृह को लिखा पत्र, हाईकोर्ट से भी खारिज हो चुकी है अपील

Oct 03, 2026 - 19:01
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11 साल बाद भी कांस्टेबल के परिवार को मुआवजा नहीं:प्रमुख सचिव गृह को लिखा पत्र, हाईकोर्ट से भी खारिज हो चुकी है अपील
रामपुर में मृत कांस्टेबल सोमपाल सिंह के परिवार को 11 साल बाद भी मुआवजा नहीं मिलने पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण रामपुर ने सख्त रुख अपनाया है। पीठासीन अधिकारी ने 7 सितंबर 2026 को प्रमुख सचिव गृह, लखनऊ को पत्र भेजकर स्थानीय प्रशासन को वसूली की कार्रवाई के निर्देश देने को कहा है। अधिकरण ने कहा कि कई बार वसूली अधिपत्र जारी होने और रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद जिला प्रशासन ने आदेश का पालन नहीं किया। जबकि वसूली पर कोई स्थगन आदेश नहीं है और मामला भी विचाराधीन नहीं है। 47.62 लाख रुपए 7% ब्याज समेत देने का आदेश अधिकरण में हादसे के बाद क्षतिपूर्ति के लिए मोटर दुर्घटना दावा याचिका संख्या 367/2014, मिथलेश आदि बनाम डीआईजी पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद आदि दाखिल की गई थी। इसकी संस्थिति तिथि 19 दिसंबर 2014 है। अधिकरण ने 2022 में गुण-दोष के आधार पर याचिका का निस्तारण करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य को जिला मजिस्ट्रेट रामपुर के माध्यम से 47,62,213.90 रुपए प्रतिकर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का निर्देश दिया था। ब्याज 19 दिसंबर 2014 से भुगतान की तारीख तक देय है। कैदी वाहन पलटने से हुई थी कांस्टेबल की मौत सोमपाल सिंह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ कैदी वाहन टाटा-709 (यूपी-22 जी-0339) से बंदियों को जेल से दीवानी न्यायालय रामपुर ले जा रहे थे। इसी दौरान चालक द्वारा तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण नियंत्रण खो गया और वाहन डिवाइडर से टकराकर पलट गया। हादसे में कांस्टेबल सोमपाल सिंह की मौत हो गई। हाईकोर्ट से भी खारिज हो चुकी है अपील राज्य की ओर से धनराशि जमा नहीं किए जाने पर सिविल प्रकीर्ण वाद संख्या 130/2023 के तहत वसूली अधिपत्र जारी किया गया। इसके बाद डीआईजी पुलिस की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में FAFO 178/2024 दाखिल किया गया था, जिसे हाईकोर्ट ने 17 मार्च 2025 को निरस्त कर दिया। इसके बाद भी अधिकरण की ओर से वसूली अधिपत्र जारी किया गया, लेकिन अभी तक धनराशि जमा नहीं हुई है। अधिकरण ने प्रमुख सचिव गृह से स्थानीय प्रशासन को आवश्यक निर्देश जारी कराने की अपेक्षा की है, ताकि मृतक कांस्टेबल के वारिसों को प्रतिकर की धनराशि मिल सके। पत्र की प्रति निर्णय की छायाप्रति के साथ ई-मेल और डाक से भेजी गई है।

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