114 राफेल से एएमसीए तक, भारत की बड़ी लड़ाकू विमान रणनीति!
भारत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। इसके साथ तेजस एमके-2 की पहली उड़ान अगले वर्ष और एएमसीए परियोजना को भी आगे बढ़ाने की तैयारी है। भारत का जोर स्वदेशी हथियारों, तकनीक और रक्षा उत्पादन को बढ़ाने पर है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 2 अक्टूबर 2026
भारत की 114 राफेल लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार, इस खरीद प्रक्रिया पर वित्त वर्ष के अंत तक निष्कर्ष आने की उम्मीद है। भारत का जोर केवल विदेशी लड़ाकू विमान खरीदने पर नहीं, बल्कि उनमें स्वदेशी हथियारों, प्रणालियों और तकनीक का अधिकतम समावेश करने पर है। इसके साथ ही तेजस एमके-2 और पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान एएमसीए के विकास पर भी सरकार का विशेष ध्यान है।
114 राफेल विमानों की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ी
भारत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि इस खरीद प्रक्रिया में वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले किसी निष्कर्ष तक पहुंचने की उम्मीद है। रक्षा मंत्रालय ने फरवरी 2026 में बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान कार्यक्रम के तहत राफेल की खरीद के लिए प्रारंभिक मंजूरी दी थी। प्रस्तावित योजना में बड़ी संख्या में विमानों का निर्माण भारत में किए जाने पर जोर है।
भारत में ही तैयार होंगे बड़ी संख्या में राफेल
नई खरीद योजना में भारत केवल तैयार लड़ाकू विमान लेने के बजाय देश में उनके निर्माण और संयोजन को बढ़ावा देना चाहता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बड़ी संख्या में राफेल विमानों को भारत में तैयार किया जाएगा। इससे देश में लड़ाकू विमान निर्माण से जुड़ी औद्योगिक क्षमता को बढ़ाने का अवसर मिलेगा। सरकार का लक्ष्य विदेशी तकनीक के साथ स्वदेशी प्रणालियों की हिस्सेदारी बढ़ाना भी है।
राफेल में भारतीय हथियार और प्रणालियां शामिल करने की तैयारी
रक्षा सचिव के अनुसार, प्रस्तावित 114 राफेल विमानों में भारतीय हथियारों और स्वदेशी प्रणालियों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भारत पहले भी नौसेना के लिए खरीदे जा रहे राफेल विमानों में भारतीय हथियारों के एकीकरण पर काम कर चुका है। नई योजना में स्वदेशी हिस्सेदारी को पहले की तुलना में और बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को लड़ाकू विमान कार्यक्रम से जोड़ने का रास्ता मजबूत होगा।
खरीद के लिए कंपनियों से प्रस्ताव मिल चुके हैं
114 राफेल विमानों की खरीद के लिए कंपनियों को प्रस्ताव भेजने का अनुरोध किया गया था। इसके जवाब में संबंधित कंपनियों की ओर से बोली जमा की जा चुकी है और फिलहाल प्रस्तावों का औपचारिक मूल्यांकन किया जा रहा है। मूल्यांकन पूरा होने के बाद खरीद प्रक्रिया के अगले चरण पर निर्णय लिया जाएगा। रक्षा सचिव ने संकेत दिया है कि इस प्रक्रिया को वर्ष समाप्त होने से पहले आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
राफेल मरीन में भी भारतीय हथियारों का एकीकरण
भारत और फ्रांस के बीच अप्रैल 2025 में भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन विमानों की खरीद का अंतर-सरकारी समझौता हुआ था। इस समझौते में प्रशिक्षण, उड़ान अभ्यास, हथियार, अनुचर सामग्री और अन्य सहायता से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इसके साथ ही भारतीय हथियारों को विमान में शामिल करने के लिए तकनीक हस्तांतरण की व्यवस्था भी रखी गई है। इससे नौसेना के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में स्वदेशी प्रणालियों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
तेजस एमके-2 की पहली उड़ान अगले साल प्रस्तावित
स्वदेशी तेजस एमके-2 लड़ाकू विमान परियोजना पर भी काम जारी है। रक्षा सचिव ने बताया कि इसकी पहली उड़ान अगले वर्ष के मध्य में कराने का कार्यक्रम है। पहले प्रोटोटाइप के तैयार होने और भारतीय वायुसेना द्वारा उसके मूल्यांकन के बाद आगे की जरूरतों पर निर्णय लिया जाएगा। भारतीय वायुसेना ने शुरुआत में लगभग 120 तेजस एमके-2 विमानों की आवश्यकता बताई थी।
तेजस एमके-2 में चरणबद्ध विकास की रणनीति
तेजस एमके-2 के विकास में चरणबद्ध तरीके से नई क्षमताएं जोड़ने की रणनीति अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य विमान को एक साथ सभी अंतिम क्षमताओं के साथ तैयार करने के बजाय समय के साथ नई प्रणालियों और तकनीकों को शामिल करना है। इससे विमान के विकास के दौरान तकनीकी सुधारों को शामिल करने की गुंजाइश बनी रहेगी। स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को इसी प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ाने की योजना है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की प्रमुख भूमिका
तेजस एमके-2 के विकास में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहेगी। रक्षा सचिव के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के नेतृत्व में इस परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, अब निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी उत्पादन प्रक्रिया में अधिक व्यापक भूमिका दी जा रही है। निजी कंपनियां छोटे हिस्सों के अलावा विमान के बड़े ढांचे और महत्वपूर्ण हिस्सों के निर्माण में भी भाग ले रही हैं।
निजी उद्योग और छोटे उद्योगों की भागीदारी बढ़ेगी
तेजस एमके-2 कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने कुछ हिस्सों के निर्माण के लिए निजी क्षेत्र की उत्पादन व्यवस्था को भी जोड़ा है। इससे देश में लड़ाकू विमान निर्माण के लिए एक बड़ा औद्योगिक तंत्र तैयार करने में मदद मिल सकती है। छोटे और मध्यम उद्योगों को भी रक्षा उत्पादन श्रृंखला से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
एएमसीए पर भारत का स्वदेशी फोकस कायम
पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एएमसीए को लेकर भी भारत ने अपनी रणनीति स्पष्ट रखी है। रक्षा सचिव के अनुसार, भारत ने फिलहाल किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में शामिल होने का निर्णय नहीं लिया है। देश का मुख्य ध्यान अपने स्वदेशी एएमसीए कार्यक्रम को आगे बढ़ाने पर है। यह परियोजना अब उस चरण में पहुंच चुकी है, जहां चयनित कंपनियों से विस्तृत प्रस्ताव मांगे गए हैं।
एएमसीए परियोजना में कंपनियों से मांगे गए प्रस्ताव
एएमसीए कार्यक्रम के लिए चयनित कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। परियोजना की जटिलता को देखते हुए संबंधित कंपनियों ने प्रस्ताव तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है। सरकार की ओर से उन्हें कुछ अतिरिक्त समय देने की बात कही गई है। इसके बाद प्रस्तावों का मूल्यांकन कर कार्यक्रम के अगले चरण को आगे बढ़ाया जाएगा।
भारत की लड़ाकू विमान नीति में तीन स्तरों पर जोर
भारत की मौजूदा लड़ाकू विमान रणनीति में विदेशी तकनीक के साथ स्वदेशी क्षमता विकसित करने पर जोर दिखाई देता है। 114 राफेल विमानों की खरीद में भारत में निर्माण और भारतीय हथियारों के एकीकरण की योजना है। दूसरी ओर तेजस एमके-2 को स्वदेशी मध्यम भार वाले लड़ाकू विमान के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ पांचवीं पीढ़ी के एएमसीए कार्यक्रम के जरिए भविष्य की उन्नत लड़ाकू विमान क्षमता तैयार करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
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