120 गांवों तक पहुंचा वन्यजीव संरक्षण का संदेश:बलरामपुर में सर्दियों में सतर्क रहने की अपील, लोगों को किया जागरूक
बलरामपुर- भारत-नेपाल सीमा से सटे सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग में वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग की ओर से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। 2 से 8 अक्टूबर तक आयोजित वन्यजीव सप्ताह के तहत जंगल से सटे करीब 120 गांवों में लोगों को वन्यजीवों की सुरक्षा, प्राकृतिक आवास के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के प्रति जागरूक किया गया। वन्यजीव सप्ताह के समापन के बाद वन विभाग ने आगामी सर्दियों के मौसम को देखते हुए स्थानीय लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। वन विभाग की ओर से स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्राम प्रधानों के सहयोग से लोगों तक वन्यजीव संरक्षण का संदेश पहुंचाया गया। इस दौरान चित्रकला प्रतियोगिताओं, पर्चों और ऑडियो-विजुअल माध्यमों से वन्यजीवों के महत्व और उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार की जानकारी दी गई। जंगल का भ्रमण कराया गया जरवा इको टूरिज्म स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में करीब 100 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों को वन्यजीवों के महत्व की जानकारी देने के साथ जंगल का भ्रमण कराया गया। उन्हें जंगली जानवरों से बचाव, वन क्षेत्र में बरती जाने वाली सावधानियों और वन्यजीवों के दिखाई देने पर अपनाए जाने वाले व्यवहार के बारे में भी बताया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वन्यजीव प्रकृति और पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनके संरक्षण से पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। जंगलों और जैव विविधता की सुरक्षा के साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। वन्यजीव दिखाई देने पर उनके नजदीक जाने, उन्हें परेशान करने या उकसाने के बजाय वन विभाग को सूचना देने की अपील की गई। वन्यजीव सप्ताह का उद्देश्य सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी गौरव गर्ग ने बताया कि वन्यजीव सप्ताह का उद्देश्य लोगों को वन्यजीवों की उपयोगिता, जंगलों में उनकी मौजूदगी और मानव जीवन में उनके महत्व के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि सोहेलवा वन क्षेत्र में कई प्रकार के वन्यजीव पाए जाते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहने के साथ अपनी सुरक्षा को लेकर भी जागरूक रहना चाहिए।
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