15.40 लाख रुपये रिलीज करने की अर्जी खारिज:मुजफ्फरनगर में नशीली दवाओं के साथ बरामद नकदी पर कोर्ट का रुख सख्त

Oct 14, 2026 - 12:05
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15.40 लाख रुपये रिलीज करने की अर्जी खारिज:मुजफ्फरनगर में नशीली दवाओं के साथ बरामद नकदी पर कोर्ट का रुख सख्त
मुजफ्फरनगर में नशीली दवाओं की बरामदगी से जुड़े ढाई साल पुराने मामले में अदालत ने एक फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने 15.40 लाख रुपये की नकदी रिलीज करने की अर्जी खारिज कर दी। यह रकम नगर कोतवाली पुलिस ने नशीले कैप्सूल और इंजेक्शन की बरामदगी के दौरान कुल 23 लाख 69 हजार 800 रुपये में से जब्त की थी। अंबा विहार निवासी शाजेब सिद्दीकी ने इस रकम को फल कारोबार से हुई कमाई बताया था। कोर्ट ने पूछा कि नशीले पदार्थों और बड़ी रकम की बरामदगी के बावजूद एनडीपीएस एक्ट के तहत संपत्ति जब्ती की कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अदालत ने तत्कालीन एसएसपी अभिषेक सिंह समेत छह पुलिस अधिकारियों की भूमिका का जिक्र किया। आदेश की कॉपी उच्च पुलिस अधिकारियों, शासन और केंद्र सरकार को कानूनी कार्रवाई के लिए भेजने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस की बरामदगी में दो कारें क्या है पूरा मामला, दो फरवरी 2024 को हुई थी गिरफ्तारी मामले के अनुसार, नगर कोतवाली पुलिस ने दो फरवरी 2024 को शाजेब सिद्दीकी और उसके साथियों को नशीली दवाओं की बरामदगी के मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस की बरामदगी में दो कारें, 1,920 स्पास्मो प्रो मैक्स प्लस कैप्सूल, पेंटाजोसिन लैक्टेट के 400 इंजेक्शन और अन्य इंजेक्शन शामिल थे। नशीली दवाओं के अवैध कारोबार इनके साथ कुल 23,69,800 रुपये की नकदी भी बरामद की गई थी। अदालत के आदेश में बरामद प्रतिबंधित पदार्थों की मात्रा को व्यावसायिक मात्रा की श्रेणी में बताया गया है। पुलिस का आरोप था कि बरामद दवाओं और नकदी का संबंध नशीली दवाओं के अवैध कारोबार से था। मामले में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद बरामद रकम को रिलीज कराने की मांग अदालत में पहुंची। इसी दौरान सहआरोपित अनुज की ओर से मांगी गई 5.50 लाख रुपये की नकदी 20 जनवरी 2025 को रिलीज कर दी गई थी। इसके बाद शाजेब सिद्दीकी ने अपनी बताई गई 15.40 लाख रुपये की रकम रिलीज कराने के लिए अर्जी दाखिल की। शाजेब सिद्दीकी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि 15.40 लाख रुपये उसके फल के थोक कारोबार से संबंधित थे। उसका दावा था कि वह फल कारोबार में आपूर्ति और रकम एकत्र करने का काम करता था और बरामद नकदी उसी व्यवसाय से जुड़ी थी। इस दावे के समर्थन में उसने कारोबार के दस्तावेजों की छायाप्रतियां और संग्रह एजेंट के रूप में नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज पेश किए। शाजेब इससे पहले भी नकदी रिलीज कराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा चुका था। उसकी पूर्व अर्जियां खारिज होने के बाद वह हाईकोर्ट पहुंचा। अर्जी दाखिल करने की अनुमति हाईकोर्ट ने 14 सितंबर 2026 को पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए उसे सहायक दस्तावेजों के साथ दोबारा अर्जी दाखिल करने का अवसर दिया था। इसके बाद उसने विचारण न्यायालय में फिर से नकदी रिलीज कराने की मांग की। हालांकि, हाईकोर्ट से दोबारा अर्जी दाखिल करने की अनुमति मिलने का अर्थ यह नहीं था कि रकम रिलीज होना तय हो गया था। विचारण न्यायालय को उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर निर्णय करना था। अभियोजन पक्ष ने शाजेब की अर्जी का विरोध किया। उसका तर्क था कि बरामद रकम नशीली दवाओं की बिक्री से प्राप्त धनराशि थी और इसे फल कारोबार की कमाई बताने के लिए पेश किए गए दस्तावेज पर्याप्त नहीं थे। आदेश के अनुसार अदालत के आदेश में कारोबार से संबंधित दस्तावेजों पर भी सवाल उठाए गए। आदेश के अनुसार, प्रस्तुत दस्तावेजों पर जीएसटी अथवा लाइसेंस नंबर जैसी आवश्यक कारोबारी पहचान नहीं थी और वे प्रथम दृष्टया रकम रिलीज कराने के उद्देश्य से तैयार किए गए प्रतीत हुए। अदालत के सामने पुलिसकर्मियों के बयानों का भी उल्लेख आया, जिनमें कथित तौर पर शाजेब के हवाले से कहा गया था कि रकम नशीली दवाओं की बिक्री से प्राप्त हुई थी और उससे आगे दवाएं खरीदने की योजना थी। यह अभियोजन के पक्ष और केस रिकॉर्ड में दर्ज कथनों का हिस्सा है; इसे किसी अंतिम दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली देखने के बाद अदालत ने शाजेब की 15.40 लाख रुपये की नकदी रिलीज कराने की अर्जी खारिज कर दी। इस प्रकार, इस रकम को फिलहाल रिलीज करने की अनुमति नहीं मिली है। अदालत के आदेश का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा एनडीपीएस एक्ट के अध्याय-5ए से जुड़ा है। अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की पहचान न्यायालय ने टिप्पणी की कि इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों और नकदी की बरामदगी के बावजूद कथित अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की पहचान, जब्ती और समपहरण के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाए जाने का रिकॉर्ड सामने नहीं आया। अदालत की चिंता यह थी कि यदि कानून में निर्धारित संपत्ति संबंधी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता, तो नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े मामलों में बरामद रकम को रिलीज कराने का रास्ता खुल सकता है। आदेश में इस पहलू पर गंभीर असंतोष जताया गया है। यहां एक कानूनी अंतर समझना जरूरी है। नकदी बरामद होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह पूरी रकम अवैध कारोबार से अर्जित हुई है। इसी तरह, किसी व्यक्ति का रकम को वैध कारोबारी कमाई बताना भी अपने आप में पर्याप्त नहीं होता। दावे के समर्थन में दस्तावेज, बरामदगी की परिस्थितियां, केस डायरी और अन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण होते हैं। निर्धारित प्रक्रिया के बाद समपहरण इस मामले में अदालत ने शाजेब की ओर से पेश दस्तावेजों को पर्याप्त नहीं माना और उसकी अर्जी खारिज कर दी। एनडीपीएस एक्ट के अध्याय-5ए में अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की पहचान, उसे जब्त या फ्रीज करने और निर्धारित प्रक्रिया के बाद समपहरण से जुड़े प्रावधान हैं। इसमें धारा 68-ई संपत्ति की पहचान तथा धारा 68-एफ जब्ती या फ्रीज करने की प्रक्रिया से संबंधित है। हालांकि, ये प्रावधान कानून में निर्धारित पात्र व्यक्तियों और परिस्थितियों पर लागू होते हैं, संपत्ति को जब्त या समपहरण करने के लिए वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। इस व्यवस्था का उद्देश्य नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से अर्जित संपत्ति पर कार्रवाई करना है, ताकि ऐसे कारोबार से मिलने वाले आर्थिक लाभ को रोका जा सके। इसलिए अदालत की टिप्पणी का केंद्र यह था कि मामले में बरामद नकदी और संभावित अवैध संपत्ति को लेकर कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई की गई या नहीं। भूमिका और कार्रवाई का उल्लेख अदालत ने आदेश में छह पुलिस अधिकारियों की भूमिका और कार्रवाई का उल्लेख किया है। इनमें तत्कालीन एसएसपी एवं वर्तमान में डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह, तत्कालीन एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापति, तत्कालीन सीओ सिटी व्योम बिंदल, तत्कालीन कोतवाली नगर प्रभारी महावीर सिंह चौहान, विवेचक संजय गिरी और बरामदगी करने वाले उपनिरीक्षक विनोद कुमार शामिल हैं। अदालत ने आदेश की प्रति अपर पुलिस महानिदेशक, मेरठ जोन, पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, और केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को आवश्यक विधिक कार्रवाई के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं। शासन को विधिक कार्रवाई के लिए आदेश आदेश में तत्कालीन एसएसपी की भूमिका के संदर्भ में भी गंभीर टिप्पणी की गई है। शाजेब सिद्दीकी की अर्जी खारिज, अभियोजन ने रकम को नशीली दवाओं के कारोबार से जुड़ा बताया, अदालत ने छह पुलिस अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख कर उच्च अधिकारियों और शासन को विधिक कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति भेजने के निर्देश दिए

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