शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा:सृष्टि की रचयिता मानी जाती हैं, आराधना से मिलता है सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
शारदीय नवरात्र के चौथे दिन बुधवार को औरैया में मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता माना जाता है। कहा जाता है कि जब चारों ओर अंधकार था और सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब मां ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें मां कूष्मांडा के नाम से जाना जाता है। शहर के मंगला काली मंदिर, आवास विकास स्थित काली माता मंदिर और फूलमती मंदिर समेत कई देवी मंदिरों पर सुबह से ही भक्तों की भीड़ रही। मां कूष्मांडा का स्वरूप अन्नपूर्णा का प्रतीक भी है। उनकी आराधना से भक्तों को सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। नवरात्र के चौथे दिन मां की पूजा के साथ जप और ध्यान का खास महत्व है। श्रद्धालु मां को फल, फूल और नैवेद्य चढ़ाकर परिवार की सुख-शांति मांगते हैं।
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