15 साल से ₹7,500 स्टाइपेंड पर आयुष इंटर्न:बोले- दूसरे राज्य में 25 हजार मिलता है तो हमे क्यों नहीं
उत्तर प्रदेश के राजकीय आयुर्वेदिक और आयुष महाविद्यालयों के छात्र इंटर्नशिप के दौरान स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पिछले एक महीने से कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि अस्पतालों में ओपीडी, आईपीडी, 24 घंटे की आपातकालीन सेवाओं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में काम करने के बावजूद उन्हें अभी भी ₹7,500 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है। उनकी मांग है कि इसे बढ़ाकर ₹25 हजार प्रतिमाह किया जाए और हर साल बढ़ोतरी का प्रावधान हो। छात्रों के मुताबिक, दूसरे राज्यों में आयुष इंटर्न को ₹25 हजार से ₹30 हजार तक स्टाइपेंड मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में अपनी मांग को लेकर वे कॉलेज स्तर से लेकर लखनऊ और पीएमओ तक ज्ञापन और प्रदर्शन कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि आयुष मंत्री से मुलाकात में 7-10 दिन में का समय मांगा था पर लेकिन अब तक कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ। 24 घंटे की ड्यूटी, स्टाइपेंड सिर्फ ₹7,500
छात्रों का कहना है कि उनकी ड्यूटी सिर्फ सामान्य कॉलेज गतिविधियों तक सीमित नहीं है। अस्पतालों में ओपीडी, आईपीडी, इमरजेंसी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भी इंटर्न डॉक्टर काम कर रहे हैं। एक छात्र ने बताया कि सामान्य ड्यूटी सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक रहती है, लेकिन मॉडर्न मेडिसिन की इंटर्नशिप के दौरान एमबीबीएस इंटर्न की तरह नाइट ड्यूटी और करीब 8 घंटे की ड्यूटी भी करनी पड़ती है। छात्रों का सवाल है कि जब जिम्मेदारी और काम का बोझ काफी हद तक समान है तो स्टाइपेंड में इतना बड़ा अंतर क्यों रखा गया है। दूसरे राज्यों में ₹25-30 हजार, यूपी में अब भी ₹7,500
छात्रों के मुताबिक दूसरे राज्यों में बीएएमएस इंटर्न को ₹25 हजार, ₹27 हजार और ₹30 हजार तक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश में अभी भी ₹7,500 ही मिल रहा है। बीएएमएस बैच-2022 की छात्रा ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में स्टाइपेंड काफी ज्यादा है, जबकि उत्तर प्रदेश में अभी तक बढ़ोतरी नहीं हुई। उनके अनुसार छात्र लगातार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस निर्णय सामने नहीं आया। 28 अगस्त से शुरू हुआ आंदोलन
छात्रों के ज्ञापन के अनुसार, 28 अगस्त को प्रदेश स्तर पर आयुष इंटर्न ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मुहिम शुरू की। इसके अगले दिन 29 अगस्त को अलग-अलग कॉलेजों में छात्रों ने बैठक कर कॉलेज स्तर पर संवाद शुरू किया। 3 सितंबर को प्रदेश के आयुष महाविद्यालयों में प्राचार्यों और जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए। इसके साथ कॉलेज परिसरों में शांतिपूर्ण और सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया गया। 11 सितंबर को प्रदेशभर में धरना
छात्रों का कहना है कि शासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो 11 सितंबर को प्रदेशभर के आयुष इंटर्न ने एकजुट होकर धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद छात्रों के 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की आयुष मंत्री से मुलाकात हुई। मंत्री से मिला आश्वासन, छात्र बोले- शासनादेश नहीं आया
छात्रों के अनुसार, मंत्री से मुलाकात के दौरान उन्हें “हफ्ते-दस दिन में खुशखबरी आ जाएगी” का आश्वासन दिया गया। छात्रों का कहना है कि सोशल मीडिया पर भी इस संबंध में सकारात्मक संदेश दिया गया था। लेकिन छात्रों के मुताबिक तय समय बीतने के बाद भी स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से भी मुलाकात कर अपनी मांग रखी। 21 सितंबर को लखनऊ जीपीओ में प्रदर्शन
छात्रों के मुताबिक आश्वासन के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर 21 सितंबर को लखनऊ के जीपीओ पार्क में प्रदेशभर के आयुष छात्रों ने धरना दिया। छात्रों का कहना है कि वे दिनभर धूप में धरने पर बैठे रहे, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं मिला। शाम को अधिकारियों के साथ बातचीत हुई। मुख्य सचिव से बातचीत को लेकर छात्रों ने जताई नाराजगी
छात्रों ने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि शाम को मुख्य सचिव के साथ बातचीत के दौरान समाधान देने के बजाय उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाली बातें कही गईं। छात्रों के अनुसार, उनसे यह सवाल किया गया कि “आप करते ही क्या हैं कि आपको ₹25 हजार चाहिए?” छात्रों का कहना है कि उन्होंने अपने काम और जिम्मेदारियों से जुड़े तर्क और साक्ष्य भी रखे, लेकिन बातचीत में उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। इंटर्न्स का कहना है कि एनसीआईएसएम के प्रावधानों के अनुसार अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों के इंटर्न के स्टाइपेंड में अंतर नहीं होना चाहिए। 3 अक्टूबर को पीएमओ कार्यालय में दिया ज्ञापन
लगातार आश्वासन के बाद भी निर्णय नहीं होने पर छात्रों ने 3 अक्टूबर को वाराणसी स्थित प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय (पीएमओ कार्यालय) में ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने देश के शीर्ष नेतृत्व से मामले में हस्तक्षेप कर उनकी मांग पर न्याय दिलाने की अपील की। छात्रों का कहना है कि वह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं। कॉलेज स्तर के ज्ञापन से लेकर लखनऊ के प्रदर्शन और पीएमओ कार्यालय तक पहुंचने के बाद भी उनकी मांग पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। “आश्वासन नहीं, अब लिखित आदेश चाहिए”
एक छात्र ने कहा कि वह कई जगह ज्ञापन दे चुके हैं। लखनऊ में प्रदर्शन किया, अधिकारियों से मुलाकात की और आयुष मंत्री के सामने भी अपनी मांग रखी। हर बार उन्हें कुछ दिन इंतजार करने का आश्वासन मिला, लेकिन अभी तक स्टाइपेंड बढ़ने की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। छात्रों का कहना है कि अब उन्हें सिर्फ मौखिक आश्वासन नहीं चाहिए, बल्कि ₹25 हजार स्टाइपेंड और वार्षिक बढ़ोतरी को लेकर लिखित शासनादेश चाहिए। छात्रों ने आगे आंदोलन जारी रखने की बात कही
छात्रों ने कहा कि यदि सरकार की ओर से जल्द कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता है तो वे आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे। छात्रों का कहना है कि उनकी मांग किसी विशेष लाभ की नहीं, बल्कि उनके काम, जिम्मेदारी और दूसरे राज्यों में दिए जा रहे स्टाइपेंड के अनुरूप मानदेय की है।
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