आजमगढ़ में भारत रक्षा दल ने किया पिंडदान,:लावारिस मृतकों का किया तर्पण, 701 का करा चुका है अंतिम संस्कार

Oct 09, 2026 - 17:59
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आजमगढ़ में भारत रक्षा दल ने किया पिंडदान,:लावारिस मृतकों का किया तर्पण, 701 का करा चुका है अंतिम संस्कार
आजमगढ़ जिले में जिनका कोई अपना नहीं होता, उनकी मृत्यु के बाद भारत रक्षा दल उनका अपना बनकर अंतिम संस्कार करता है। इसी मानवीय सेवा के तहत भारत रक्षा दल की ओर से पितृ पक्ष में तमसा नदी के किनारे राजघाट पर लावारिस मृतकों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध का आयोजन किया गया। संगठन वर्ष 2013 से लगातार यह जिम्मेदारी निभा रहा है और अब तक 701 लावारिस शवों का दाह संस्कार करा चुका है। राजघाट पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में पंडित सभाजीत पांडेय और पंडित सुजीत पाठक ने विधि-विधान से कर्मकांड संपन्न कराया। इस दौरान भारत रक्षा दल के प्रदेश अध्यक्ष हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव सहित विनोद शर्मा, जैनेंद्र चौहान, प्रदीप चौहान, आरपी श्रीवास्तव, सुनील वर्मा, हरेंद्र यादव और अनूप श्रीवास्तव ने लावारिस मृतकों के वारिस के रूप में यजमान की भूमिका निभाई। अनुष्ठान के माध्यम से उन मृतकों के प्रति श्रद्धा अर्पित की गई, जिनका इस दुनिया में कोई अपना नहीं था। कर्मकांड के बाद कुंदीगढ़ (कटरा) स्थित भारत रक्षा दल के केंद्रीय कार्यालय पर ब्राह्मण भोज का आयोजन किया गया। ब्राह्मणों को कराया भोजन दी गई दक्षिणा ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ अंगवस्त्र, बर्तन और दक्षिणा भी प्रदान की गई। इसके बाद सामूहिक भोज शुरू हुआ, जिसमें संगठन के सदस्यों सहित सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। भोजन करने से पहले लोगों ने लावारिस मृतकों के प्रतीकात्मक चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। त्योहार के दिन भी निभाते हैं जिम्मेदारी अनुष्ठान का नेतृत्व कर रहे भारत रक्षा दल के प्रदेश अध्यक्ष हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव ने कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके परिजन अपनी परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार करते हैं, लेकिन लावारिस मृतकों की सुध लेने वाला कोई नहीं होता। मानव शरीर की दुर्गति देखकर संगठन के सदस्यों ने ऐसे मृतकों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया था। वर्ष 2013 में शुरू हुआ यह सिलसिला लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि अब तक संगठन की ओर से 701 लावारिस शवों का दाह संस्कार कराया जा चुका है। इस कार्य के लिए प्रतिदिन कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी निर्धारित रहती है। त्योहार के दिन भी यदि किसी लावारिस शव का अंतिम संस्कार करना पड़ता है तो कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटते। उन्होंने कहा कि इस सेवा कार्य को निरंतर जारी रखने में संगठन के कार्यकर्ताओं का समर्पण सबसे महत्वपूर्ण है।

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