22 पुलिसकर्मियों की FIR दर्ज करने का आदेश रद्द:महराजगंज के घुघली में SC/ST कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी, हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
महराजगंज में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महराजगंज जिले के घुघली थाना क्षेत्र के बसंतपुर गांव से जुड़े मामले में एक उपनिरीक्षक समेत 22 पुलिसकर्मियों को राहत दी है। हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने का निर्देश देने वाले विशेष एससी/एसटी अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया। यह निर्णय न्यायमूर्ति संतोष राय ने उपनिरीक्षक राकेश कुमार यादव की ओर से दाखिल अपील पर सुनाया। मामले के अनुसार, दो महिलाओं ने पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाया था कि वे उनके घर में घुसे, उनके साथ अभद्रता की, जातिसूचक टिप्पणियां कीं और उन्हें शौचालय जाने से रोका। इन आरोपों के संबंध में विशेष एससी/एसटी अदालत ने संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। पुलिसकर्मियों ने उक्त आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अधिकार-क्षेत्र का ध्यान रखना आवश्यक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों के आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान की गई कार्रवाई से संबंधित मामलों में न्यायिक आदेश पारित करते समय वैधानिक प्रक्रिया का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 173(4) और धारा 175(3) के कानूनी प्रावधानों के संदर्भ में स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज करने अथवा जांच का निर्देश देने के लिए निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया और अधिकार-क्षेत्र का ध्यान रखना आवश्यक है। धारा 173(4) के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक को शिकायत देने से संबंधित प्रक्रिया का प्रावधान है, जबकि धारा 175(3) मजिस्ट्रेट द्वारा जांच का आदेश दिए जाने की शक्ति और उससे जुड़ी प्रक्रिया से संबंधित है। ऐसे मामलों में केवल शिकायत प्रस्तुत किए जाने के आधार पर स्वतः एफआईआर दर्ज करने का न्यायिक आदेश नहीं दिया जा सकता; संबंधित कानूनी शर्तों का अनुपालन आवश्यक है। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के एफआईआर दर्ज करने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया। इस निर्णय से संबंधित 22 पुलिसकर्मियों को राहत मिली है।
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