24 साल पुराने SC/ST एक्ट केस में 7 आरोपी बरी:ललितपुर में कुएं से पानी भरने और दुकान से सामान लेने से रोकने का था आरोप
ललितपुर में 24 साल पुराने एससी,एसटी एक्ट मामले में चल रहे मुकदमे अपर जिला एवं सत्र,विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) विकास कुमार द्वितीय की अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और अभिलेखों के आधार पर सात आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। वहीं राजाराम गोस्वामी की मृत्यु के कारण उनके विरुद्ध विचारण की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। 30 सितंबर को आए फैसले की कॉफी 7 अक्टूबर को मिलने के बाद बुधवार रात 10 बजे रिटायर्ड शिक्षक के पुत्र बब्बू गोस्वामी द्वारा पत्रकारों को फोन पर दी गई। बता दें वर्ष 2002 में थाना बार क्षेत्र के ग्राम चिगलौआ निवासी पुनू ने पांच जुलाई 2002 को गांव के अशोक कुमार, संजय कुमार, प्रीतम, राजकुमार, महेश नारायण, सोबरन सिंह, राजाराम गोस्वामी और पूर्व प्रधान खलक सिंह समेत अन्य के खिलाफ शिकायत की थी। जान से मारने की धमकी आरोप लगाया गया था कि उन्हें कुएं से पानी भरने, चक्की पर आटा पिसाने, दुकानों से सामान लेने और बकरियां चराने से रोका जा रहा है। शिकायत में जान-माल का खतरा होने की बात भी कही गई थी।थाना बार पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एक राय होकर गाली-गलौज करने, जान से मारने की धमकी देने और एससी,एसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। इसके बाद मामला लंबे समय तक न्यायालय में विचाराधीन रहा। 9 जुलाई 2026 को 78 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक राजाराम गोस्वामी ने जहरीला पदार्थ का सेवन का आत्महत्या कर ली थी ,उनके पास से तीन सुसाइड नोट मिले थेसुसाइड नोट में राजाराम ने खुद को रंजिशन झूठे मुकदमे में फंसाए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने लिखा था कि जीवन में उन्होंने किसी को गाली नहीं दी और न ही किसी के साथ मारपीट की, फिर भी उन पर गंभीर आरोप लगाए गए। सुसाइड नोट में लिखा था कि अब वह जीना नहीं चाहते 24 वर्षों से वह उस अपराध की सजा भुगत रहे थे, जो उन्होंने किया ही नहीं था। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा था कि अब वह जीना नहीं चाहते और उनका स्वाभिमान प्राणों से प्यारा है।नोट में उन्होंने कुछ लोगों पर अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की बात भी लिखी थी।
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