सहारनपुर में ठेकेदार ने वन विभाग दफ्तर में खाया जहर:बोला-एक लाख रुपए रिश्वत मांग रहे, अधिकारी कर रहे परेशान, मैं दिव्यांग हूं...मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं

Oct 08, 2026 - 10:47
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सहारनपुर में ठेकेदार ने वन विभाग दफ्तर में खाया जहर:बोला-एक लाख रुपए रिश्वत मांग रहे, अधिकारी कर रहे परेशान, मैं दिव्यांग हूं...मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं
सहारनपुर के रामपुर मनिहारान वन रेंज कार्यालय में एक दिव्यांग लकड़ी ठेकेदार ने जहरीला पदार्थ खा लिया। ठेकेदार का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारी उससे एक लाख रुपए की मांग कर रहे थे। उसका कहना है कि विभागीय अधिकारियों के दबाव और उत्पीड़न से परेशान होकर उसने यह कदम उठाया। मामला बीते बुधवार का बताया जा रहा है। घटना के बाद कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और अन्य लोगों में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि कर्मचारियों ने ठेकेदार को जहरीला पदार्थ खाने से रोकने का प्रयास भी किया, लेकिन तब तक उसने पदार्थ का सेवन कर लिया था। हालत बिगड़ते ही उसे आनन-फानन में उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। पहले उसे सीएचसी में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने उसे हरियाणा के मुलाना मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। फिलहाल उसका इलाज चल रहा है। अधिकारी के पास पहुंचा था ठेकेदार मामला गांव संभलहेड़ी निवासी दिव्यांग लकड़ी ठेकेदार बिजन राणा पुत्र यशपाल सिंह से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि वो वन विभाग से जुड़े एक मामले को लेकर रामपुर मनिहारान रेंज कार्यालय पहुंचा था। ठेकेदार की अधिकारियों से बातचीत हुई। इसी दौरान मामला पैसों की मांग को लेकर गरमा गया। ठेकेदार ने आरोप लगाया कि उससे एक लाख रुपए मांगे जा रहे थे। वो अधिकारियों के सामने अपनी परेशानी बताता रहा। इसी बीच उसने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ निकाल लिया। कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों ने उसे रोकने की कोशिश की। अचानक हुई इस घटना से वहां मौजूद लोगों के होश उड़ गए। ठेकेदार की हालत बिगड़ने के बाद उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। ठेकेदार ने वन विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि वह दिव्यांग है और उसके छोटे-छोटे बच्चे हैं। उसकी पत्नी भी बीमार रहती है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी उस पर एक लाख रुपए देने का दबाव बना रहे थे। ठेकेदार के मुताबिक, मामला एक बाग की कटाई से जुड़ा है। उसने बाग काटने का ठेका लिया था, लेकिन इसके लिए वन विभाग से अनुमति नहीं ली गई थी। विभाग ने बाग कटाई का काम रुकवा दिया। इसके बाद उससे एक लाख रुपए की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया। ठेकेदार का कहना है कि वह लगातार अधिकारियों से अपनी स्थिति बताता रहा, लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई। आरोप है कि दबाव और कथित पैसों की मांग से परेशान होकर उसने कार्यालय में ही जहरीला पदार्थ खा लिया। एसडीओ पर भी लगाए गंभीर आरोप ठेकेदार ने वन विभाग के एसडीओ वीरेंद्र सिंह रावत पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि विभागीय कार्रवाई और पैसों की कथित मांग को लेकर उसे लगातार परेशान किया जा रहा था। घटना के बाद यह मामला विभागीय अधिकारियों के लिए भी सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर कार्यालय के भीतर ऐसी स्थिति कैसे बनी कि एक व्यक्ति ने जहरीला पदार्थ खा लिया। वन विभाग बोला-रिश्वत का आरोप निराधार, अवैध कटान पर लगाई गई थी पेनल्टी वहीं, वन विभाग ने ठेकेदार के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। रामपुर रेंज की रेंज अधिकारी वैशाली चौधरी ने कहा कि ठेकेदार द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। उनके अनुसार, संबंधित प्रकरण में एसडीओ वीरेंद्र सिंह रावत की ओर से कार्रवाई की गई थी। विभाग का कहना है कि बाग में अवैध रूप से कटान किया जा रहा था। इसी मामले में नियमों के तहत पेनल्टी लगाई गई। रेंज अधिकारी के मुताबिक, इसी कार्रवाई को लेकर ठेकेदार नाराज था और उसने कार्यालय में हंगामा किया। विभाग ने एक लाख रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप से भी इनकार किया है।

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