308 पहियों वाला ‘बाहुबली’ ट्रक वाराणसी पहुंचा:14 गाड़ियों और 40 सदस्यीय टीम, गाजीपुर सीमा तक पहुंचने में लगेंगे 48 घंटे

Sep 30, 2026 - 06:50
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308 पहियों वाला ‘बाहुबली’ ट्रक वाराणसी पहुंचा:14 गाड़ियों और 40 सदस्यीय टीम, गाजीपुर सीमा तक पहुंचने में लगेंगे 48 घंटे
ओडिशा के पारादीप पोर्ट से बेल्जियम से आए भारी-भरकम शुगर वेसल को लेकर निकला 308 पहियों वाला ‘बाहुबली’ ट्रक अब वाराणसी पहुंच गया है। झारखंड और बिहार होते हुए चंदौली के रास्ते उत्तर प्रदेश में दाखिल हुआ यह विशालकाय ट्रेलर डाफी टोल प्लाजा के पास पहुंच चुका है। इसे देखने के लिए नेशनल हाईवे पर लोगों की भीड़ जुट रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके इस ट्रक को देखने के लिए आसपास के जिलों से भी लोग वाराणसी पहुंच रहे हैं और मोबाइल में इसकी तस्वीरें और वीडियो कैद कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि वाराणसी में रुकने के बाद मंगलवार सुबह यह विशेष ट्रेलर आगे बढ़ेगा। इसके लिए डाफी टोल प्लाजा के पास वैकल्पिक रास्ता तैयार किया जा रहा है। यहां लोहे की स्लीपर प्लेट डालकर भारी वाहन को आगे निकाला जाएगा। इसके बाद ट्रक राजातालाब होते हुए हरहुआ रिंग रोड पहुंचेगा और फिर गाजीपुर की सीमा में प्रवेश करेगा। वाराणसी से गाजीपुर सीमा तक पहुंचने में करीब 48 घंटे लगने का अनुमान है। 100 किलोमीटर दूर से ट्रक देखने पहुंचे लोग बाहुबली ट्रक के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इसे देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह है। नेशनल हाईवे के किनारे जगह-जगह लोग रुककर इस विशालकाय वाहन को देख रहे हैं। कई लोग 100 किलोमीटर तक का सफर तय करके वाराणसी पहुंचे हैं। जौनपुर से वाराणसी पहुंचे सुनील कुमार ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर इस ट्रक की कई रील देखी थीं। जब उन्हें जानकारी हुई कि यह ट्रक वाराणसी से होकर गाजीपुर और फिर लखीमपुर खीरी जाएगा, तो वे इसे देखने के लिए वाराणसी चले आए। वहीं चंदौली निवासी महेश यादव ने बताया कि उन्होंने भी इस ट्रक और उस पर लदे वेसल के बारे में काफी सुना था। इसी वजह से वह इसे देखने पहुंच गए। 308 पहियों पर दौड़ रहा है ‘बाहुबली’ इस ट्रक की सबसे बड़ी खासियत इसका आकार और पहियों की संख्या है। इसमें हाइड्रोलिक मॉड्यूलर ट्रेलर का इस्तेमाल किया गया है। करीब 20 ट्रॉलियों को जोड़कर इसे तैयार किया गया है। प्रत्येक ट्रॉली में कई एक्सल हैं और पूरे मॉड्यूलर ट्रेलर में करीब 308 पहिए बताए जा रहे हैं। इसकी एक और खासियत यह है कि इसके पहियों को अलग-अलग दिशा में मोड़ा जा सकता है। इससे भारी-भरकम ट्रेलर को मोड़ने और संकरे रास्तों से निकालने में मदद मिलती है। इसी तकनीक की वजह से इतनी बड़ी मशीन को हाईवे और शहर के अलग-अलग हिस्सों से गुजारा जा रहा है। 100 फीट लंबा और 20 फीट से अधिक ऊंचा वेसल इस बाहुबली ट्रक पर शुगर मिल में इस्तेमाल होने वाला भारी वेसल लदा है। इसकी लंबाई करीब 100 फीट और ऊंचाई 20 फीट से अधिक बताई जा रही है। वेसल का वजन करीब 200 टन बताया गया है। इतनी ऊंचाई और वजन के कारण इसके रास्ते में आने वाले पुल, ओवरब्रिज, बिजली के तार और अन्य संरचनाओं को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है। कंपनी की टीम के मुताबिक, इससे पहले भी इससे ज्यादा वजन का सामान सड़क मार्ग से ले जाया गया है, लेकिन इस वेसल की ऊंचाई अधिक होने के कारण रास्ते में कई तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं। डाफी टोल के पास बनाया जा रहा वैकल्पिक रास्ता वाराणसी की सीमा में प्रवेश करने के बाद बाहुबली ट्रक डाफी टोल प्लाजा के पास पहुंच गया है। आगे बढ़ाने के लिए टोल प्लाजा के बगल से वैकल्पिक रास्ता तैयार किया जा रहा है। इस रास्ते पर लोहे की स्लीपर प्लेट बिछाई जाएगी, ताकि भारी ट्रेलर को सुरक्षित तरीके से निकाला जा सके। इसके बाद ट्रक राजातालाब की ओर बढ़ेगा और हरहुआ रिंग रोड से होते हुए गाजीपुर की सीमा में प्रवेश करेगा। रास्ते में ऊंचाई की समस्या को देखते हुए हरहुआ रिंग रोड और वाराणसी-गाजीपुर मार्ग पर दो फुट ओवरब्रिज हटाने की तैयारी भी की जा रही है। इसके अलावा जरूरत के अनुसार पेड़ों की छंटाई भी की जा रही है। 14 गाड़ियों और करीब 40 लोगों की टीम साथ इस विशालकाय ट्रेलर के साथ बड़ी टीम लगातार चल रही है। टीम में सिविल, मैकेनिकल और टेक्निकल विशेषज्ञ शामिल हैं। करीब 14 गाड़ियां इसके साथ चल रही हैं। इनमें जेसीबी, हाइड्रा, ट्रेलर, क्रेन और अन्य तकनीकी वाहन शामिल हैं। एक वाहन ट्रक की ऊंचाई और रास्ते की स्थिति को देखते हुए आगे-पीछे की निगरानी में लगाया गया है। टीम में करीब 40 लोग बताए जा रहे हैं। इसके अलावा दो पुलर भी ट्रेलर के साथ चल रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर मुख्य पावर यूनिट को बदला जा सके। रास्ते में कैसे भरा जाता है इतना डीजल? इस बाहुबली ट्रक को लेकर लोगों के बीच सबसे ज्यादा जिज्ञासा इसके ईंधन को लेकर है। इतनी बड़ी मशीन में डीजल कैसे पहुंचाया जाता है और यह कितना ईंधन खर्च करती है, इसे लेकर भी चर्चा है। टीम से जुड़े कर्मचारियों के मुताबिक, ट्रक में करीब 400 लीटर क्षमता का ईंधन टैंक है। जरूरत पड़ने पर ट्रेलर को पेट्रोल पंप के पास रोककर डीजल भराया जाता है। पावर यूनिट यानी पुलर को हाइड्रोलिक मॉड्यूलर ट्रेलर के एक्सल से अलग भी किया जा सकता है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर दूसरे पुलर को जोड़कर सफर जारी रखा जा सकता है। टीम के पास आपात स्थिति के लिए अतिरिक्त डीजल भी रखा जाता है। कर्मचारियों के मुताबिक ट्रेलर की प्रतिदिन करीब 200 से 300 लीटर डीजल की खपत हो रही है। हालांकि स्टैंडबाई मोड में मशीन के चालू रहने और रास्ते में रुकने के कारण वास्तविक खपत दूरी के हिसाब से तय करना मुश्किल है। अब तक दो करोड़ रुपये से अधिक के डीजल का दावा ट्रक चालक सुरेश चंद्रा और टीम से जुड़े कर्मचारियों के अनुसार, ओडिशा से वाराणसी तक के सफर में डीजल पर करीब दो करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि यह आंकड़ा कंपनी की ओर से आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया है। ट्रक की अधिकतम गति करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जा रही है, लेकिन भारी वेसल, ट्रैफिक और रास्ते को सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया के कारण इसकी वास्तविक रफ्तार काफी कम रहती है। कई जगह रास्ता साफ करने और तकनीकी तैयारियों में भी समय लग रहा है। एक साल पहले हुआ था रूट का सर्वे टीम के लोगों के मुताबिक, इस भारी वेसल को सड़क मार्ग से ले जाने के लिए करीब एक वर्ष पहले रूट का सर्वे किया गया था। हालांकि इसके बाद कई जगह सड़क और पुल निर्माण जैसे काम शुरू होने से कुछ स्थानों पर नई चुनौतियां सामने आई हैं। रास्ते में ओवरब्रिज की ऊंचाई, पेड़ों की शाखाएं, बिजली के तार और सड़क की क्षमता जैसी चीजों को लगातार देखा जा रहा है। टीम के साथ तकनीकी कर्मचारी भी चलते हैं, जो आगे के रास्ते की स्थिति के अनुसार जरूरी बदलाव कराते हैं।

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