40 साल से रावण के पुतले बना रहा मुस्लिम परिवार:इब्राहिम का परिवार निभा रहा परंपरा, 43 जगह होगा पुतले का दहन
श्रावस्ती के नासिरगंज में एक मुस्लिम परिवार पिछले करीब 40 सालों से रावण और मेघनाद के पुतले बनाकर हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश कर रहा है। मोहम्मद इब्राहिम और उनका परिवार इस परंपरा को आज भी पूरी शिद्दत से निभा रहा है। सोमवार को महानवमी के मौके पर रावण के पुतले को अंतिम रूप दिया गया। परिवार की मेहनत से तैयार पुतले विजयादशमी पर बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक बनकर खड़े होंगे। मोहम्मद इब्राहिम के मुताबिक, उनके पिता ने करीब चार दशक पहले रावण के पुतले बनाने का काम शुरू किया था। अब वह अपने बच्चों के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके लिए यह काम केवल रोजी-रोटी का जरिया नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द से जुड़ी जिम्मेदारी भी है। इब्राहिम का कहना है कि जब तक हिंदू भाइयों का त्योहार पूरा नहीं हो जाता, उन्हें तसल्ली नहीं मिलती। त्योहार सभी के होते हैं और मिल-जुलकर मनाना ही देश की पहचान है। इब्राहिम के परिवार के इस हुनर और समर्पण की स्थानीय लोग भी सराहना करते हैं। रामलीला कमेटी के सदस्यों का कहना है कि इब्राहिम का परिवार वर्षों से दशहरे की तैयारियों में सहयोग करता आ रहा है। उनके हाथों से तैयार पुतलों के बिना त्योहार की तैयारियां अधूरी-सी लगती हैं। चार दशकों से कायम यह परंपरा बताती है कि आपसी विश्वास, सहयोग और भाईचारा किसी धर्म की सीमा में बंधा नहीं होता। जिले में करीब 43 स्थानों पर दशहरे की धूम श्रावस्ती जिले के भिनगा, इकौना और जमुनहा तहसील क्षेत्रों में करीब 43 स्थानों पर दशहरा मनाया जाता है और रावण के पुतले का दहन किया जाता है। भिनगा के रामलीला मैदान में करीब 20 फीट ऊंचा रावण का पुतला जलाया जाता है। यहां दशहरा मनाने की परंपरा सैकड़ों साल पुरानी बताई जाती है। वहीं, जमुनहा बाजार के रामलीला मैदान में वर्ष 1985 से करीब 25 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जा रहा है। इकौना क्षेत्र में भी दशहरा मैदान पर बड़े स्तर पर रावण दहन का आयोजन होता।
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