4एफ संकट क्या है? भारत पर कितना बड़ा खतरा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की 4एफ संकट की चेतावनी में भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त चार प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर उसका असर दूसरे क्षेत्रों पर पड़ सकता है और महंगाई बढ़ सकती है। भारत के पास खाद्यान्न, उर्वरक और विदेशी मुद्रा का पर्याप्त भंडार है, लेकिन कच्चे तेल के आयात और सीमित रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के कारण बाहरी संकट का जोखिम बना हुआ है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 8 अक्टूबर 2026
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान 4एफ संकट को लेकर चेतावनी दी थी। 4एफ का अर्थ भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त से है। इन चारों क्षेत्रों में किसी एक पर दबाव बढ़ने से उसका असर दूसरे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है और अंततः महंगाई का बोझ आम लोगों पर आ सकता है।
4एफ संकट की पूरी कड़ी कैसे काम करती है
किसी क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ने पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे ईंधन महंगा होता है और उर्वरक उत्पादन की लागत भी बढ़ जाती है। उर्वरक महंगा होने से खेती की लागत बढ़ती है और इसके बाद खाद्यान्न की कीमतों पर दबाव आता है। वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर विकासशील देशों के लिए कर्ज लेना भी महंगा हो सकता है।
भोजन के मोर्चे पर भारत की स्थिति
अगस्त 2026 तक भारत में खाद्य महंगाई 5.95 प्रतिशत बताई गई है। अगस्त में प्याज की कीमत में 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि जुलाई में टमाटर 31.92 प्रतिशत तक महंगा हुआ था। इस वर्ष मानसून में 10 प्रतिशत कम बारिश और अल नीनो की स्थिति से भी चिंता बढ़ी है। हालांकि, 28 मई 2026 तक सरकारी गोदामों में गेहूं का भंडार 513 लाख मीट्रिक टन था, जो जरूरी बफर भंडार से काफी अधिक था।
ईंधन को लेकर भारत की सबसे बड़ी चुनौती
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल और करीब आधी गैस आयात करता है। अप्रैल 2026 में ईंधन और बिजली की कीमतों में सालाना आधार पर 24.71 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है, जो लगभग आठ दिन की खपत के बराबर बताया गया है। सरकार ओडिशा के चंडीखोल और कर्नाटक के पडूर में अतिरिक्त भंडारण क्षमता विकसित कर रही है।
उर्वरक पर भी आयात की निर्भरता
भारत अपनी डीएपी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, जबकि पोटाश के लिए देश पूरी तरह आयात पर निर्भर है। मार्च 2026 में उर्वरक उत्पादन में 24.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और फरवरी से अप्रैल के बीच अंतरराष्ट्रीय उर्वरक कीमतों में 66 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, खरीफ 2026 से पहले देश में 199.65 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडार बताया गया है। सरकार ने 2026-27 के बजट में उर्वरक सहायता के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
वित्तीय मोर्चे पर भारत मजबूत
4एफ संकट के वित्तीय हिस्से में भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बताई गई है। अगस्त 2026 के अंत में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 740.80 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जो करीब 11 महीने के आयात को पूरा करने के लिए पर्याप्त बताया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार देश के बैंक मजबूत स्थिति में हैं और गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां कम हैं। विपरीत परिस्थितियों की जांच में भी बैंकिंग व्यवस्था को सक्षम पाया गया।
क्या भारत को 4एफ संकट से डरने की जरूरत है
विशेषज्ञों के अनुसार घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही भी नहीं की जा सकती। भारत के पास पर्याप्त अनाज भंडार, उर्वरक का भंडार और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। इसके बावजूद बाहरी घटनाओं का असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
हॉर्मुज और वैश्विक तनाव बढ़ा तो बढ़ सकती है महंगाई
यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है, काला सागर से खाद्यान्न की आवाजाही बाधित होती है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक की कीमतें और बढ़ती हैं, तो भारत में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। देश की कच्चे तेल के आयात पर भारी निर्भरता इस जोखिम को और महत्वपूर्ण बनाती है। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की सीमित क्षमता भी ऐसी स्थिति में चुनौती बन सकती है।
4एफ संकट से निपटने के लिए क्या करना होगा
भारत को बाहरी निर्भरता कम करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने, अधिक भंडारण क्षमता विकसित करने और दूसरे देशों के साथ मजबूत आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने की जरूरत होगी। संकट की स्थिति में भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त की उपलब्धता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। विदेश मंत्री की चेतावनी के मुताबिक इस चुनौती को अपने आप खत्म होने का इंतजार करने के बजाय वैश्विक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत नियमों की जरूरत है।
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