5.79 करोड़ के टेंडर विवाद में ईओ की बढ़ीं मुश्किलें:निलंबन की संस्तुति, चार दिन की जांच के बाद डीएम ने शासन को भेजी रिपोर्ट

Oct 16, 2026 - 15:56
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5.79 करोड़ के टेंडर विवाद में ईओ की बढ़ीं मुश्किलें:निलंबन की संस्तुति, चार दिन की जांच के बाद डीएम ने शासन को भेजी रिपोर्ट
देवरिया के पथरदेवा नगर पंचायत में 5.79 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों के टेंडर विवाद में अधिशासी अधिकारी (ईओ) हिमांशु प्रताप सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 20 विकास कार्यों के टेंडर निर्धारित समय पर नहीं खुलने के मामले में चार दिन तक चली जांच के बाद समिति ने गुरुवार शाम जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी को रिपोर्ट सौंप दी। जांच में ईओ की लापरवाही सामने आने के बाद डीएम ने शुक्रवार को उनके निलंबन की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेज दी। निलंबन पर अंतिम निर्णय शासन स्तर से लिया जाएगा। दो अधिकारियों की समिति ने की जांच मामले की जांच के लिए मुख्य राजस्व अधिकारी चंद्रेश सिंह और वरिष्ठ कोषाधिकारी अतुल कुमार पांडेय की समिति गठित की गई थी। समिति ने टेंडर प्रक्रिया में हुई देरी, टेंडर अपलोड करने की अंतिम तिथि बढ़ाने के कारणों और टेंडर निरस्त होने से किसी को अनुचित लाभ मिलने की आशंका समेत कई बिंदुओं की पड़ताल की। जांच समिति के अनुसार, यदि निर्धारित समय पर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई होती तो विवाद की स्थिति नहीं बनती। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ईओ की लापरवाही को जिम्मेदार माना गया। इसके बाद जिलाधिकारी ने निलंबन की संस्तुति शासन को भेज दी। 5 अक्टूबर थी टेंडर अपलोड करने की अंतिम तिथि नगर पंचायत ने मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना, सीवरेज एवं जल निकासी योजना और आकांक्षी नगर योजना के तहत 20 विकास कार्यों के लिए ई-टेंडर जारी किए थे। टेंडर अपलोड करने की अंतिम तिथि 5 अक्टूबर और टेंडर खोलने की तारीख 6 अक्टूबर निर्धारित की गई थी। बाद में नगर पंचायत अध्यक्ष के आदेश पर टेंडर अपलोड करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 7 अक्टूबर कर दी गई। इसके बाद टेंडर 8 अक्टूबर को शाम 4 बजे खोले जाने थे, लेकिन निर्धारित समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसी देरी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। 5.79 करोड़ के विकास कार्यों की प्रक्रिया पर उठे सवाल 5.79 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों से जुड़े इस मामले में टेंडर प्रक्रिया की समयबद्धता और पारदर्शिता पर सवाल उठे। जांच समिति ने प्रक्रिया में देरी और अंतिम तिथि बढ़ाने के फैसले की पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी। अब मामले में शासन स्तर पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

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