54 दिन में तैयार हुई थी 1000 पन्नों की चार्जशीट:नीले ड्रम हत्याकांड में IPS अंतरिक्ष जैन के नेतृत्व में हुई जांच बनी अहम कड़ी
देशभर में चर्चित मेरठ के नीला ड्रम हत्याकांड में बुधवार, 14 अक्टूबर को जिला अदालत ने फैसला सुनाते हुए दोषी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई। सौरभ राजपूत हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। मामले में अदालत के फैसले के साथ ही पुलिस की जांच और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्य भी चर्चा में हैं। इस प्रकरण में तत्कालीन एएसपी ब्रह्मपुरी और वर्तमान में बुलंदशहर में एसपी देहात के पद पर तैनात आईपीएस अंतरिक्ष जैन के नेतृत्व में की गई जांच को अहम माना जा रहा है। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान मेडिकल रिपोर्ट, चाकू की खरीद से संबंधित जानकारी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), लोकेशन ट्रेसिंग और फॉरेंसिक साक्ष्यों को एकत्र किया। इन साक्ष्यों को जोड़कर विस्तृत चार्जशीट तैयार की गई थी। पुलिस टीम ने महज 54 दिनों में करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। इसी विवेचना के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अदालत में अपना पक्ष रखा। गुमशुदगी की शिकायत से हुआ था मामले का खुलासा मार्च 2025 में सौरभ राजपूत की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। तत्कालीन एएसपी ब्रह्मपुरी आईपीएस अंतरिक्ष जैन के नेतृत्व में विशेष टीम ने मामले की पड़ताल की। जांच के दौरान संदिग्धों से पूछताछ की गई और ब्रह्मपुरी स्थित मकान से नीला ड्रम बरामद हुआ। ड्रम में सौरभ का शव सीमेंट से दबाकर रखा गया था। इसके बाद पुलिस ने मामले का पर्दाफाश किया और जांच को आगे बढ़ाया। मेडिकल रिपोर्ट से फॉरेंसिक साक्ष्यों तक को बनाया आधार विवेचना के दौरान पुलिस ने घटना से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जांच की। इसमें मेडिकल रिपोर्ट, कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए चाकू की खरीद से जुड़ी जानकारी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और फॉरेंसिक साक्ष्य शामिल थे। इन सभी तथ्यों को आपस में जोड़कर घटनाक्रम की कड़ियां स्पष्ट करने का प्रयास किया गया। पुलिस टीम ने 54 दिनों के भीतर लगभग 1000 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। इतने कम समय में विस्तृत दस्तावेज और साक्ष्य जुटाकर चार्जशीट तैयार करना इस मामले की जांच का प्रमुख पहलू रहा। अभियोजन पक्ष ने इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत में अपना पक्ष रखा। अंतरिक्ष जैन और जांच टीम की हो रही चर्चा मामले के फैसले के बाद जांच टीम की भूमिका भी चर्चा में है। उस समय ब्रह्मपुरी के एएसपी रहे आईपीएस अंतरिक्ष जैन के नेतृत्व में पुलिस ने गुमशुदगी के मामले की जांच करते हुए हत्या का खुलासा किया था। वर्तमान में वह बुलंदशहर में एसपी देहात के पद पर तैनात हैं। चार्जशीट में शामिल तकनीकी, चिकित्सकीय और फॉरेंसिक साक्ष्य मामले की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रहे। नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, फैसले के विस्तृत न्यायिक आदेश और चार्जशीट के सभी दस्तावेजों के स्वतंत्र सत्यापन के बिना जांच के किसी एक पहलू को सजा का एकमात्र आधार नहीं कहा जा सकता।
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