60 फीट ऊंचा रावण बना रहे अफरोज अहमद:पिता से सीखा हुनर, लाल आंखें और मुंह से निकलेंगे शोले
कानपुर देहात के अकबरपुर मे दशहरा और रामलीला का पर्व आपसी भाईचारे और कौमी एकता का संदेश भी देता है। अकबरपुर की 156 साल पुरानी रामलीला में इस बार सचेंडी, कानपुर नगर के अफरोज अहमद अपने कारीगरों की टीम के साथ रावण, मेघनाद समेत कई आकर्षक पुतले और झांकियां तैयार कर रहे हैं। उनके हाथों से तैयार होने वाला 50 फीट ऊंचा रावण इस बार मेले में आकर्षण का केंद्र रहेगा। अफरोज अहमद ने बताया कि पुतले बनाने का हुनर उन्हें अपने पिता खलील अहमद से मिला है। उनके पिता करीब 32 साल तक इस काम से जुड़े रहे। छह साल पहले उनके निधन के बाद अफरोज ने अपने परिजनों के साथ इस पारंपरिक काम को आगे बढ़ाया। वह पिछले करीब 12 से 14 साल से अकबरपुर की रामलीला के लिए पुतले और अन्य आकर्षक प्रतीक तैयार करने आ रहे हैं। उनके दो भाई भी इस काम में हाथ बंटाते हैं। पूरी तैयारी में करीब डेढ़ महीने का समय लगता है। इस बार अकबरपुर में 60 फीट ऊंचा रावण और 45 फीट ऊंचा मेघनाद का पुतला बनाया जा रहा है। अफरोज के मुताबिक, रावण की आंखें लाल दिखाई देंगी और उसके मुंह से आग के शोले निकलेंगे। दहन के दौरान उसके दसों सिर अलग-अलग तेज धमाकों के साथ फटेंगे और आतिशबाजी दर्शकों को आकर्षित करेगी। इसके अलावा वह हिरण, लंका, जटायु और संजीवनी बूटी के प्रतीक भी तैयार कर रहे हैं। रामलीला के महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत बनाने वाली कई झांकियां भी उनकी टीम बनाती है। रामलीला समिति अकबरपुर के अध्यक्ष रामजी मिश्रा और मेला प्रभारी अभिषेक गुप्ता नीकू ने बताया कि मेले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। मेले में दुकानों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। रावण वध के बाद होने वाली सतरंगी आतिशबाजी भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेगी। अफरोज और उनकी टीम की मेहनत इस आयोजन में कला, परंपरा और आपसी सद्भाव की झलक पेश करेगी।
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