8वीं पास मौलाना बना फर्जी डॉक्टर, सेक्सवर्धक दवाओं का भंडाफोड़:कॉल सेंटर खोल इंस्टाग्राम पर बेच रहे थे नकली आयुर्वेदिक दवाएं, करोड़ों का लेनदेन मिला

Oct 06, 2026 - 17:56
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8वीं पास मौलाना बना फर्जी डॉक्टर, सेक्सवर्धक दवाओं का भंडाफोड़:कॉल सेंटर खोल इंस्टाग्राम पर बेच रहे थे नकली आयुर्वेदिक दवाएं, करोड़ों का लेनदेन मिला
बरेली की इज्जतनगर पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर की आड़ में नकली सेक्सवर्धक दवाएं बेचने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। खुद को हकीम और डॉक्टर बताकर लोगों को ठगने वाले 8वीं पास मुख्य आरोपी समेत दो जालसाजों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जबकि इनका एक साथी मौके से फरार हो गया। एसपी सिटी मानुष पारीक और एएसपी शिवम आशुतोष ने इज्जतनगर थाने में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा किया। जांच में आरोपियों के बैंक खातों से करोड़ों रुपयों के संदिग्ध लेनदेन के सुराग मिले हैं। राजीव एन्क्लेव में चल रहा था अवैध कॉल सेंटर इज्जतनगर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि राजीव एन्क्लेव कॉलोनी के एक मकान में कॉल सेंटर चलाकर ऑनलाइन नकली दवाइयां बेची जा रही हैं। पुलिस टीम ने जब मौके पर छापा मारा तो वहां कंप्यूटर सिस्टम, मोबाइल और पैकिंग का सेटअप देखकर दंग रह गई। कमरे में एक युवक कंप्यूटर पर ग्राहकों का डेटा संभाल रहा था, जबकि दूसरा जमीन पर बैठकर खाली कैप्सूलों में पाउडर भरकर डिब्बियों में पैक कर रहा था। पुलिस ने मौके से देवरनियां निवासी समीरउद्दीन (24) और बड़ी बिहार निवासी यूसुफ (25) को दबोच लिया, जबकि यूसुफ का भाई इलियास खान पीछे के दरवाजे से भाग निकला। इंस्टाग्राम पर 'हर्बल एंड जड़ीबूटी' नाम से पेज बनाकर फंसाते थे पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे सहारनपुर और मुरादाबाद के खुले बाजारों से सस्ता पाउडर व कच्चा माल खरीदते थे। इसके बाद इंस्टाग्राम पर 'हर्बल एंड जड़ीबूटी' नाम से फर्जी आईडी बनाकर भ्रामक विज्ञापन चलाते थे। खुद को बड़ा हकीम और डॉक्टर बताकर मर्दाना कमजोरी दूर करने का दावा करते थे। 8वीं पास समीरउद्दीन ग्राहकों से डॉक्टर बनकर बात करता था और कॉल सेंटर के जरिए उन्हें झांसे में लेकर ऑनलाइन ऑर्डर बुक करता था। दवाइयों की कीमत 250 से 300 रुपये या इससे अधिक लेकर यूपीआई के जरिए सीधे बैंक खातों में भुगतान लिया जाता था। छापेमारी से बचने के लिए बनाया फर्जी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस आरोपियों ने किसी भी तरह की कानूनी जांच या प्रशासनिक छापेमारी से बचने के लिए एक फर्जी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस भी तैयार कर रखा था। गिरोह की एक दुकान देवरनियां कस्बे में भी चल रही थी। यह गिरोह पिछले करीब एक साल से सक्रिय था और पार्सल के जरिए देशभर में नकली दवाओं की सप्लाई कर रहा था। जो भी कमाई होती थी, उसे तीनों आरोपी आपस में बराबर बांट लेते थे। 12 मोबाइल, 6 कंप्यूटर और दवाओं के 85 बंडल बरामद पुलिस ने मौके से 6 कंप्यूटर, 8 मॉनिटर, 1 लैपटॉप, 3 प्रिंटर, 1 स्कैनर, 12 मोबाइल फोन, दवाओं के 85 पैकेट, पैकिंग सामग्री, फर्जी लाइसेंस, विभिन्न बैंकों की 6 चेकबुक, 14 एटीएम कार्ड और 1 लाख 99 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है, वहीं फरार साथी इलियास की तलाश में दबिश दी जा रही है। साइबर फ्रॉड और नकली दवाओं के सिंडिकेट पर सख्त कार्रवाई "यह गिरोह तकनीकी संसाधनों और सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा था। फर्जी लाइसेंस और कॉल सेंटर के जरिए देशभर में नेटवर्क फैलाया गया था। आरोपियों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कराई जा रही है। इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और सप्लायर्स को भी बख्शा नहीं जाएगा।" - मानुष पारीक, एसपी सिटी, बरेली पार्सल और यूपीआई से चल रहा था नेटवर्क, फरार आरोपी की तलाश जारी "छापेमारी के दौरान मौके से बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, नकली दवाएं और पैकिंग सामग्री बरामद की गई है। आरोपी ऑनलाइन ऑर्डर लेकर पार्सल के जरिए दवाओं की डिलीवरी करते थे और भुगतान डिजिटल माध्यम से लेते थे। मौके से फरार अभियुक्त इलियास की गिरफ्तारी के लिए टीमें दबिश दे रही हैं, जल्द ही उसे भी गिरफ्तार किया जाएगा।" - शिवम आशुतोष, एएसपी, बरेली

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