9 महीने में 1.89 करोड़ के नशीले पदार्थ पकड़े:RPF ने 'ऑपरेशन नारकोस' के तहत 21 केस दर्ज दिए, 25 तस्कर गिरफ्तार

Oct 16, 2026 - 18:40
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9 महीने में 1.89 करोड़ के नशीले पदार्थ पकड़े:RPF ने 'ऑपरेशन नारकोस' के तहत 21 केस दर्ज दिए, 25 तस्कर गिरफ्तार
उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध परिवहन के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। ऑपरेशन ‘NARCOS’ के तहत जनवरी से सितंबर 2026 तक मंडल में एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत 21 मामलों का पता लगाकर कार्रवाई की गई। इस दौरान 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया और करीब 1.89 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए। मंडल रेल प्रबंधक रजनीश अग्रवाल के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत रेलवे परिसर और ट्रेनों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। आरपीएफ की कार्रवाई में गांजा, अल्प्राजोलम और डायजापॉम जैसे नशीले पदार्थों की बरामदगी की गई। जब्त मादक पदार्थों की कुल अनुमानित कीमत 1,89,46,665 रुपये बताई गई है। रेलवे सुरक्षा बल के अनुसार, जनवरी से सितंबर तक दर्ज 21 मामलों में कानपुर में सबसे अधिक 12 मामले सामने आए। इसके अलावा प्रयागराज और अलीगढ़ में तीन-तीन, टूंडला में दो तथा मिर्जापुर में एक मामला दर्ज किया गया। इन मामलों में 20 मामलों के दौरान 1,88,50,550 रुपये मूल्य का गांजा जब्त किया गया। वहीं, प्रयागराज छिवकी में कोडीन युक्त कफ सिरप की 470 नग बरामद की गईं। सितंबर महीने में भी आरपीएफ ने अभियान के तहत विशेष सतर्कता बरती। इस दौरान एनडीपीएस अधिनियम के तहत तीन मामलों का पता लगाया गया और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। सितंबर में की गई कार्रवाई के दौरान 9,95,950 रुपये मूल्य का गांजा जब्त किया गया। रेलवे सुरक्षा बल का कहना है कि ऑपरेशन ‘NARCOS’ का उद्देश्य रेल परिसर और ट्रेनों के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाना तथा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ विभिन्न स्तरों पर समन्वित कार्रवाई की जा रही है। आरपीएफ ने स्पष्ट किया है कि रेलवे परिसर और ट्रेनों में मादक पदार्थों के अवैध परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह की कार्रवाई से तस्करी में शामिल लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई को मजबूती मिलेगी और रेल यात्रियों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने में मदद मिलेगी। आयुषी गुप्ता को एक दिन की महिला थाना प्रभारी बनाने की पहल भी इसी दिशा में एक कदम है। इस तरह के कार्यक्रमों से महिलाओं और बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने तथा उन्हें अपनी समस्याओं के प्रति जागरूक करने में मदद मिलती है।

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