TRF: लश्कर का मुखौटा, ISI की ढाल — कौन है 'द रेजिस्टेंस फ्रंट'?
दि राइजिंग न्यूज। 22 अप्रैल 2025 जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने एक बार फिर उस आतंकवादी संगठन की पहचान को उजागर कर दिया है, जो पिछले कुछ सालों से लगातार घाटी में सक्रिय है। इस संगठन का नाम है – ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (The Resistance Front – TRF)।
TRF: लश्कर का मुखौटा, ISI की ढाल — कौन है 'द रेजिस्टेंस फ्रंट'?
दि राइजिंग न्यूज। 22 अप्रैल 2025
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने एक बार फिर उस आतंकवादी संगठन की पहचान को उजागर कर दिया है, जो पिछले कुछ सालों से लगातार घाटी में सक्रिय है। इस संगठन का नाम है – ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (The Resistance Front – TRF)।
पहलगाम में खौफनाक हमला – TRF ने ली जिम्मेदारी
मंगलवार को पहलगाम के बैसरन इलाके में आर्मी की वर्दी में आए तीन आतंकियों ने करीब 50 राउंड फायरिंग की, जिसमें 26 से अधिक पर्यटकों की मौत की आशंका है। हमले में घायल दर्जनों लोग अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। TRF ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
यह हमला जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला बताया जा रहा है।
TRF: कब और क्यों बना यह आतंकी संगठन?
TRF की स्थापना 2019 में हुई थी, जब पुलवामा हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को आतंकवाद फैलाने के आरोपों से घिरना पड़ा। ऐसे में लश्कर-ए-तैयबा और ISI ने मिलकर TRF को एक ‘प्रॉक्सी’ संगठन के रूप में खड़ा किया।
इसका मकसद था – भारत में आतंक फैलाना, लेकिन बिना ‘पाकिस्तान’ के नाम के। यही कारण है कि TRF खुद को एक कश्मीरी विद्रोही संगठन बताता है, जबकि असल में यह लश्कर की शाखा है और पाकिस्तान की ISI की रणनीति के तहत काम करता है।
TRF की रणनीति: टारगेट किलिंग और डर का माहौल
TRF का मुख्य फोकस टारगेट किलिंग पर है। यह संगठन गैर-कश्मीरियों, प्रवासी श्रमिकों, अल्पसंख्यक समुदायों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाता है।
कुछ चर्चित हमले जिनकी जिम्मेदारी TRF ने ली:
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2020 कुलगाम हत्याकांड
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बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्याएं (फिदा हुसैन, उमर राशिद बेग)
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पुलवामा में कश्मीरी पंडित संजय शर्मा की हत्या (2023)
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श्रीनगर, बारामूला, और बडगाम में प्रवासी मजदूरों पर हमले
ऑनलाइन भर्ती और प्रचार तंत्र
TRF की एक और बड़ी ताकत है इसका सोशल मीडिया नेटवर्क। यह संगठन युवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए कट्टरपंथ की ओर धकेलता है और उन्हें हथियार उठाने के लिए उकसाता है।
लश्कर और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के साथ मिलकर TRF ऑनलाइन ट्रेनिंग मॉड्यूल चला चुका है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि 2022 में 74 युवा TRF के जरिए आतंक से जुड़े थे।
ISI की सुरक्षा और फंडिंग
TRF को फंडिंग, शरण और रणनीतिक सहयोग ISI और पाकिस्तानी सेना से मिलता है। यह संगठन लश्कर के चैनलों से हथियार और पैसे हासिल करता है और एक ‘क्लीन इमेज’ बनाए रखने की कोशिश करता है ताकि पाकिस्तान सीधे तौर पर घिरे न।
भारत की रणनीति और जवाबी कदम
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने TRF के खिलाफ लगातार ऑपरेशन चलाए हैं। 2022 में TRF से जुड़े 108 आतंकी मारे गए, जिनमें 42 विदेशी नागरिक थे।
अब पहलगाम हमले के बाद केंद्र सरकार ने एनआईए को जांच सौंप दी है, और गृह मंत्री अमित शाह ने आपात बैठक बुलाई है। सीआरपीएफ, सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस मिलकर TRF के नेटवर्क को खत्म करने की रणनीति पर काम कर रही है।
निष्कर्ष: TRF – नया नाम, पुराना खेल
TRF भले ही खुद को ‘कश्मीरी प्रतिरोध’ के रूप में पेश करता हो, लेकिन सच्चाई यह है कि यह पाकिस्तान द्वारा संचालित एक आतंकवादी संगठन है, जो कश्मीर के युवाओं को भटकाकर उन्हें भारत के खिलाफ खड़ा करता है।
भारत के लिए यह समय है सजग और संगठित होने का — ताकि लश्कर, TRF और उनके जैसे संगठनों को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।