राजस्थान में चिकित्सा प्रवेश परीक्षा पर बड़ा विवाद, कथित गेस पेपर के 135 सवाल हूबहू मिलने से मचा हड़कंप

राजस्थान में चिकित्सा प्रवेश परीक्षा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कथित गेस पेपर के एक सौ पैंतीस सवाल परीक्षा में शब्दशः मिलने का दावा किया जा रहा है। सवालों की भाषा, उत्तर विकल्प, अल्पविराम और पूर्णविराम तक समान पाए जाने के बाद विशेष अभियान शाखा ने जांच तेज कर दी है। सीकर जिले से जुड़े तारों की जांच की जा रही है और कई संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है।

राजस्थान में चिकित्सा प्रवेश परीक्षा पर बड़ा विवाद, कथित गेस पेपर के 135 सवाल हूबहू मिलने से मचा हड़कंप

दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 12 मई 2026 

देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा पर उठे गंभीर सवाल

जयपुर: देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा को लेकर राजस्थान से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। परीक्षा समाप्त होने के बाद अब कथित गेस पेपर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दावा किया जा रहा है कि परीक्षा से पहले बाजार में एक कथित प्रश्न संग्रह घूम रहा था, जिसमें शामिल कई सवाल परीक्षा में शब्दशः पूछे गए। इस खुलासे के बाद विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षा जगत में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि सवालों की भाषा, उत्तर विकल्प, अल्पविराम और पूर्णविराम तक एक जैसे मिले हैं। अब इस पूरे मामले की जांच राजस्थान की विशेष अभियान शाखा कर रही है।


जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान के सवालों पर सबसे ज्यादा संदेह

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार कथित प्रश्न संग्रह में दिए गए जीव विज्ञान के नब्बे सवाल और रसायन विज्ञान के पैंतालीस सवाल परीक्षा में पूरी तरह समान पाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में कुछ सवालों का मिलना सामान्य माना जा सकता है, लेकिन इतने बड़े स्तर पर सवालों का शब्दशः समान होना बेहद गंभीर विषय है। यह दावा सही साबित होता है, तो यह केवल अनुमान आधारित प्रश्न संग्रह का मामला नहीं बल्कि परीक्षा की गोपनीयता पर बड़ा सवाल होगा। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब हर पहलू को बेहद गंभीरता से देख रही हैं।


सीकर से जुड़ रहे मामले के तार, कई ठिकानों पर छापेमारी

जांच एजेंसियों के अनुसार यह कथित गेस पेपर राजस्थान के सीकर जिले से बाजार में फैलाया गया था। इसके बाद विशेष अभियान शाखा की कई टीमें लगातार सीकर में सक्रिय हैं। कोचिंग संस्थानों, छात्रावासों और संदिग्ध लोगों के ठिकानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। कार्रवाई के दौरान कई स्थानों से मोबाइल फोन, संगणक, संगणकीय यंत्र और निगरानी चित्र भी जब्त किए गए हैं। सूत्रों का दावा है कि जांच एजेंसियों को कई अहम सुराग मिले हैं और आने वाले दिनों में कई लोगों से पूछताछ की जा सकती है।


कई छात्रावास संचालक बताए जा रहे फरार

जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज होने के बाद कई छात्रावास संचालकों और कथित दलालों के गायब होने की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ लोग अपने ठिकाने बंद कर फरार हो गए हैं। जांच एजेंसियां अब ऐसे लोगों की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में करीब तीन दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा सकता है। अधिकारियों का मानना है कि यदि परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी पहले से बाहर पहुंची है, तो इसके पीछे एक बड़ा संगठित तंत्र हो सकता है।


विशेष अभियान शाखा ने क्या कहा

विशेष अभियान शाखा के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने कहा है कि फिलहाल सीधे तौर पर प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और सभी तथ्यों की गहराई से पड़ताल की जा रही है। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि कथित प्रश्न संग्रह किसने तैयार किया, इसे बाजार में किस माध्यम से पहुंचाया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।


राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने भी जारी किया बयान

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने भी इस पूरे मामले को लेकर आधिकारिक बयान जारी किया है। एजेंसी ने कहा है कि राजस्थान की जांच टीम को हर प्रकार की तकनीकी और आंकड़ा संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। एजेंसी ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। साथ ही विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और धैर्य बनाए रखें।


विद्यार्थियों और अभिभावकों में बढ़ी बेचैनी

इस पूरे विवाद के बाद देशभर के विद्यार्थियों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। कई विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा दी है और यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो यह मेहनती छात्रों के साथ अन्याय होगा। सामाजिक माध्यमों पर भी परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो ताकि सच्चाई सामने आ सके।


क्या फिर उठेंगे परीक्षा प्रणाली पर सवाल

देश में पहले भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में यह मामला एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। जांच में कथित प्रश्न संग्रह और परीक्षा के सवालों के बीच समानता साबित होती है, तो यह देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक की साख पर गंभीर असर डाल सकता है। अब पूरे देश की नजर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई है।