आगरा के एसएन में हुआ क्रिटिकल ब्रेन ऑपरेशन:दिमाग में नसों की गड़बड़ी से हो चुकी है ब्लीडिंग, पड़ते थे दौरे
दिमाग में खून बहने के बाद 19 साल के युवक को दौरे पड़ने लगे और शरीर के एक तरफ कमजोरी आ गई। जांच में पता चला कि उसके दिमाग की नसें गलत तरीके से जुड़ी हुई थीं। एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने बिना दिमाग को खोलकर ऑपरेशन किए, खून की नसों के रास्ते विशेष तकनीक से उसका इलाज किया। कॉलेज के अनुसार, यहां पहली बार इस तरीके से ब्रेन एवीएम का सफल इलाज किया गया है। इलाज के बाद युवक को स्वस्थ हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। दो महीने पहले दिमाग में हुआ था खून का रिसाव जानकारी के अनुसार, युवक को करीब दो महीने पहले दिमाग में खून बहने की परेशानी हुई थी। इसके बाद उसके शरीर के एक तरफ कमजोरी आ गई और दौरे पड़ने लगे। जांच करने पर दिमाग के दाहिने हिस्से में एवीएम की बीमारी का पता चला। इसमें दिमाग की खून पहुंचाने वाली नसें और खून वापस ले जाने वाली नसें आपस में गलत तरीके से जुड़ जाती हैं। इससे दिमाग में खून बहने का खतरा रहता है। नसों के रास्ते किया इलाज एसएन मेडिकल कॉलेज के न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम ने खून की नसों के रास्ते विशेष तकनीक से इलाज किया। उपचार के बाद दिमाग की असामान्य नसों का जुड़ाव पूरी तरह बंद पाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, इलाज के दौरान युवक को कोई नई परेशानी नहीं हुई और उसकी हालत में सुधार होने पर उसे छुट्टी दे दी गई। इस मौके पर एवीएम लाइव कार्यशाला भी आयोजित की गई। इसमें नोएडा से आए विशेषज्ञ डॉ. अंशुल जैन शामिल हुए। डॉक्टरों ने बताया चुनौतीपूर्ण मामला डॉ. तरुणेश शर्मा ने बताया कि दिमाग की नसों की इस बीमारी का इलाज काफी मुश्किल होता है। युवक का सफल इलाज कॉलेज के लिए बड़ी उपलब्धि है। वहीं, डॉ. मयंक अग्रवाल ने बताया कि एसएन मेडिकल कॉलेज में करीब एक साल से नसों के रास्ते इलाज की प्रक्रिया की जा रही है। ब्रेन एवीएम का यह पहला मामला है। आयुष्मान योजना से मिल रहा मुफ्त इलाज न्यूरोसर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. गौरव धाकरे ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत जरूरतमंद मरीजों को ऐसे आधुनिक इलाज मुफ्त दिए जा रहे हैं। कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि संस्थान का प्रयास है कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को गंभीर बीमारियों का बेहतर इलाज कॉलेज में ही मिल सके। इस इलाज में डॉ. राहुल सिंह, डॉ. मोहित मंगला, एनेस्थीसिया टीम की डॉ. अर्चना अग्रवाल और डॉ. लवप्रिया शर्मा के साथ रेजिडेंट डॉक्टरों और अन्य स्टाफ का सहयोग रहा।
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