आजमगढ़ हत्याकांड:पुजारी के बेटे ने कहा- एक झटके में खत्म हुए 50 साल पुराने रिश्ते, सोचा नहीं था ऐसा दिन देखना पड़ेगा
आजमगढ़ के अहिरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गहजी गांव में मंगलवार शाम हुए हत्याकांड के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है। आरोपी अरविंद सिंह ने फायरिंग कर अपनी पत्नी बबीता सिंह, बेटे शौर्य सिंह और दो पुजारियों महेंद्र पाठक व अखिलेश कुमार मिश्रा की हत्या कर दी। पुजारी अखिलेश मिश्रा के बेटे हिमांशु मिश्रा ने दीवार फांदकर किसी तरह अपनी जान बचाई। बुधवार देर रात पुलिस कार्रवाई में आरोपी अरविंद सिंह भी मारा गया। घटना के बाद दैनिक भास्कर की टीम ने दोनों पुजारियों के परिजनों से बात की। पुजारी महेंद्र पाठक का घर आरोपी के घर से करीब एक किलोमीटर दूर इब्राहिमपुर पटखौली में है। वहीं पुजारी अखिलेश मिश्रा का परिवार करीब 20 किलोमीटर दूर रहता है। अखिलेश मिश्रा के परिजनों ने इस मामले में बात करने से इनकार कर दिया। महेंद्र पाठक के बेटे चंदन पाठक ने बताया कि उनके परिवार और अरविंद सिंह के परिवार के बीच करीब 50 साल पुराने घरेलू संबंध थे। उनके पिता अरविंद के परिवार में लंबे समय से पूजा कराते आ रहे थे। 'एक झटके में खत्म हो गए 50 साल पुराने संबंध' चंदन पाठक ने बताया, "हमारी कोई जातीय दुश्मनी नहीं थी। जो हुआ बहुत गलत हुआ, हमारे साथ भी और उनके परिवार के साथ भी। बाप-दादा के जमाने से हमारे पिता उनके घर पर पूजा करते रहे हैं। इस बार भी अरविंद की मां कमला देवी ने मेरे पिता से घर आकर बेटे की मानसिक शांति के लिए पूजा कराने को कहा था।" उनके मुताबिक, अरविंद की मां लगातार पूजा कराने के लिए कह रही थीं। इसके बाद महेंद्र पाठक ने अपने रिश्ते के भाई पुजारी अखिलेश मिश्रा और उनके बेटे हिमांशु मिश्रा को भी पूजा में शामिल होने के लिए बुलाया था। चंदन ने बताया, "पूजा ठीक चल रही थी। चौथे दिन अचानक अरविंद ने मेरे पिता और मेरे रिश्तेदार अखिलेश मिश्रा को गोली मार दी। हमारे और अरविंद के परिवार के बीच घरेलू रिश्ते थे। कभी नहीं सोचा था कि एक झटके में 50 साल पुराने संबंध खत्म हो जाएंगे।" परिवार की बाधा दूर करने के लिए चल रहा था अनुष्ठान पुजारी अखिलेश मिश्रा के बेटे हिमांशु मिश्रा ने बताया कि वह पांच दिन के अनुष्ठान के लिए अरविंद के घर गए थे। मंगलवार को पूजा का चौथा दिन था और बुधवार को पूर्णाहुति होनी थी। परिवार में चल रही परेशानियों और बाधाओं को दूर करने के लिए अनुष्ठान कराया जा रहा था। हिमांशु के मुताबिक, मंगलवार शाम करीब 6 बजे पूजा खत्म होने के बाद वे लोग वहां से निकलने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान अरविंद ने गाली-गलौज शुरू कर दी और पूछा कि वे लोग उसके घर क्यों आए हैं। इसके बाद उसने आधार कार्ड दिखाने की मांग की। आधार कार्ड तत्काल नहीं होने पर अगले दिन दिखाने की बात कही गई, लेकिन वह उसी समय आधार कार्ड दिखाने की जिद करने लगा। लाठी लेकर दौड़ा, फिर राइफल निकाल ली हिमांशु के मुताबिक, अरविंद ने पहले उन्हें धमकी दी और लाठी लेकर उनकी तरफ दौड़ा। परिवार के लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की। इसी दौरान उसने राइफल निकाल ली। उसकी पत्नी बीच में आई तो उसने उसे गोली मार दी। इसके बाद पुजारी महेंद्र पाठक दरवाजे की ओर भागे, लेकिन अरविंद ने उन्हें भी गोली मार दी। हिमांशु ने बताया कि उनके पिता अरविंद की मां के पीछे छिप गए थे। पहली गोली से वे बच गए, लेकिन दूसरी गोली लगने से उनकी मौत हो गई। हिमांशु दीवार फांदकर वहां से निकल गए। पड़ोसी बोला- बच्चों को कमरे में बंद कर लिया था पड़ोसी गोलू सिंह ने बताया कि अरविंद पूजा का विरोध कर रहा था। उसके मुताबिक, वह अपनी पत्नी और मां से पूजा नहीं कराने की बात कहता था। शाम को विवाद बढ़ने के बाद उसने पत्नी और दोनों पुजारियों पर गोली चला दी। गोलू के मुताबिक, गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। इसके बाद अरविंद ने बच्चों के साथ खुद को कमरे में बंद कर लिया और पुलिस पर भी फायरिंग की। पड़ोसी ने बताया कि पुलिस ने काफी देर तक उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। इसके बाद रात करीब एक बजे पुलिस, एसओजी और एटीएस की कार्रवाई में अरविंद मारा गया। गोलू ने यह भी दावा किया कि अरविंद के बड़े भाई की हत्या के बाद उसके व्यवहार में बदलाव आया था। परिवार आर्थिक परेशानी से भी गुजर रहा था और वह कोई काम नहीं करता था। इन दावों की पुलिस जांच कर रही है।
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