आजमगढ़ के दक्षिणमुखी काली मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़:नवमी पर हवन-पूजन के बाद व्रत खोल रहे श्रद्धालु, 200 साल पुराना है मंदिर
आजमगढ़ में शारदीय नवरात्र की नवमी पर मां दुर्गा की भक्ति में श्रद्धालु लीन हैं। शहर के चौक स्थित दक्षिणमुखी मां काली मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुट रही है। कोई माता के दर्शन कर रहा है तो कोई मंदिर परिसर में बने हवन कुंड में आहुति देकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहा है। नौ दिन का व्रत रखने वाले श्रद्धालु हवन-पूजन के बाद पारण कर अपना व्रत भी खोल रहे हैं। इस मंदिर में नवरात्र के दौरान दूर-दराज के जिलों से भी भक्त पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद यहां मां काली जरूर पूरी करती हैं। मंदिर के पुजारी शरद त्रिपाठी के मुताबिक, करीब 200 साल पुराने इस मंदिर में भक्तों की गहरी आस्था है। नवमी के अवसर पर दोपहर बाद जिले में कन्या पूजन भी किया जाएगा। सुबह से हवन-पूजन में जुटे श्रद्धालु नवमी पर दक्षिणमुखी मां काली मंदिर में सुबह से ही पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। मंदिर परिसर में बनाए गए हवन कुंड में पुजारी श्रद्धालुओं को हवन करा रहे हैं। भक्त आहुतियां देकर मां का आशीर्वाद मांग रहे हैं। नौ दिन तक व्रत रखने वाले लोग हवन और पूजा के बाद पारण कर रहे हैं। नवरात्र के पहले दिन भी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। नवमी पर भी दर्शन के लिए भक्तों की आवाजाही बनी हुई है। मंदिर परिसर में धार्मिक माहौल दिखाई दे रहा है। 200 साल पहले हुई थी मंदिर की स्थापना मंदिर के पुजारी शरद त्रिपाठी ने बताया कि दक्षिणमुखी मां काली मंदिर करीब 200 साल पुराना है। इसे तांत्रिक मंदिर भी माना जाता है, जिसके चलते यहां श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है। भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और मां से परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। पुजारी के अनुसार, आजमगढ़ में तैनात रहे कई अधिकारी तबादले के बाद भी यहां दर्शन करने आते हैं। इसके अलावा प्रदेश के दूसरे जिलों से भी लोग मां का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। कोलकाता के बाद आजमगढ़ के मंदिर की चर्चा मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, देश में दक्षिणमुखी मंदिरों में कोलकाता और आजमगढ़ के इस मंदिर का विशेष उल्लेख किया जाता है। नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। भक्त मां के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि मां काली अपने भक्तों की पुकार सुनती हैं। इसी विश्वास के चलते बड़ी संख्या में लोग हर साल नवरात्र में मंदिर पहुंचते हैं। नवमी पर होगा कन्या पूजन शारदीय नवरात्र की नवमी पर पूजा-अर्चना के साथ कन्या पूजन का भी विशेष महत्व है। आजमगढ़ जिले में दोपहर बाद कन्या पूजन के आयोजन किए जाएंगे। श्रद्धालु कन्याओं को भोजन कराकर और उनका पूजन करके नवरात्र की धार्मिक परंपरा पूरी करेंगे। मंदिर में सुबह से जारी हवन-पूजन के बीच भक्त मां काली के दर्शन कर नवरात्र का समापन कर रहे हैं।
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