आकाश आनंद की फिर बसपा में वापसी होगी:मायावती कांशीराम की पुण्यतिथि पर करेंगी एलान; मिल सकती है संगठन की जिम्मेदार

Oct 05, 2026 - 17:58
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आकाश आनंद की फिर बसपा में वापसी होगी:मायावती कांशीराम की पुण्यतिथि पर करेंगी एलान; मिल सकती है संगठन की जिम्मेदार
बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद की एक बार फिर पार्टी में वापसी होने जा रही है। 9 अक्टूबर को मान्यवर कांशीराम की पुण्यतिथि के अवसर पर मायावती इसका औपचारिक ऐलान कर सकती हैं और उन्हें संगठन में फिर से बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। 2 अक्टूबर को आकाश आनंद ने सोशल मीडिया 'X' पर एक भावुक पोस्ट लिखी। उन्होंने मायावती को अपना राजनीतिक गुरु, प्रेरणा और "बुआ मां" बताते हुए कहा कि बसपा ही उनका परिवार है और वे किसी अन्य दल में नहीं जाएंगे। उन्होंने अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले का समर्थन किया और माना कि “मिशन और पार्टी से बड़ा कोई रिश्ता नहीं हो सकता।” मायावती की पोस्ट रीपोस्ट न करने पर उन्होंने सफाई दी कि वे उस समय सोशल मीडिया से दूर थे। उन्होंने किसी भी ठेस के लिए माफी मांगते हुए दोबारा सेवा का मौका मांगा। माना जा रहा है कि ये फैसला मायावती ने बसपा नेताओं के फीडबैक के बाद लिया है। आकाश आनंद को निकाले जाने से पार्टी के युवा समर्थकों में काफी नाराजगी थी। अब 2 अक्टूबर की माफी और कार्यकर्ताओं के फीडबैक के बाद 9 अक्टूबर को उनकी आधिकारिक वापसी तय मानी जा रही है। ससुर के संन्यास के बाद भी आकाश को हटाया था 9 सितंबर को मायावती ने आकाश के सामने शर्त रखी थी कि अगर उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास ले लेते हैं, तो उनकी जिम्मेदारियां लौटाने पर विचार हो सकता है। मायावती की इस पोस्ट को आकाश ने रीपोस्ट नहीं किया था। 10 सितंबर को अशोक सिद्धार्थ ने संन्यास का ऐलान तो किया, लेकिन मायावती ने इसे देर से उठाया गया कदम मानते हुए आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह से मुक्त (बाहर) कर दिया था। अब आकाश आनंद की नाराजगी की वजह जान लें बसपा के गिरते ग्राफ को लेकर आकाश आनंद में छटपटाहट देखी जा रही है। इसका प्रमाण यह है कि पिछले दिनों आकाश ने बसपा प्रमुख को एक सलाह दी थी। इसमें कहा गया था कि पार्टी कोष में 650 करोड़ से ज्यादा का फंड है। 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों को जिताने के लिए पार्टी फंड का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जाए। लेकिन, इस सलाह को मायावती ने नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद हाथरस के सादाबाद में रैली हुई। इसमें आकाश के तेवरों को जमकर सराहा गया। इसके तुरंत बाद मीडिया में खबर आई कि इस बार आकाश भी टिकट बंटवारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसे विरोधी गुट के लोगों ने हथियार बनाया। मायावती तक संदेश पहुंचाया गया कि इसके पीछे भी अशोक सिद्धार्थ का दिमाग है। इसके पहले भी मायावती दो बार आकाश पर कार्रवाई कर चुकी थीं। तब आकाश पर अपरिपक्वता का दाग लगाकर उन्हें साइडलाइन किया गया था। जेवर की सभा बिना मायावती से पूछे तय की गई थी। इसे लेकर भी मायावती नाराज हुई थीं। कहा जाता है कि इसे भी विरोधियों ने मायावती के सामने ऐसे पेश किया, जैसे सारे फैसले आकाश ही ले रहे हों। इसके बाद मायावती ने आदेश जारी करके आकाश के भविष्य में होने वाले सभी कार्यक्रमों के लिए अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया था। आकाश को भी निर्देश दिया गया कि ऐसे किसी कार्यक्रम में जाने से पहले मायावती से अनुमति लें। फिर जेवर की सभा का लाइव टेलीकास्ट पार्टी के ऑफिशियल सोशल पेज पर नहीं कराया गया। इस घटनाक्रम ने भी आकाश की नाराजगी बढ़ाई। इसके बाद 25 अगस्त, 31 अगस्त और 3 सितंबर की पार्टी की बैठकों में आकाश को नहीं बुलाया गया। इस बार मायावती ने आकाश पर कार्रवाई तो की, लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट में इसके बारे में आधिकारिक तौर पर ज्यादा साफ नहीं लिखा। आकाश ने अपने सोशल पेज पर बायो बदलकर इसकी आधिकारिक पुष्टि की। 9 सितंबर की पोस्ट में जब मायावती ने आकाश आनंद को संबोधित करते हुए "आपके (अशोक सिद्धार्थ के) दामाद" लिखा, तो यह बात सीधे आकाश आनंद के आत्मसम्मान पर जा लगी। आकाश आनंद के करीबी सूत्रों का कहना है कि वे (आकाश) इस बात से बेहद आहत हैं। अशोक सिद्धार्थ ने भी अपने राजनीतिक संन्यास वाले पोस्ट में इसी भावनात्मक पहलू को छुआ। उन्होंने आकाश आनंद को लेकर लिखा कि वे मेरे दामाद बाद में बने, उससे पहले वे आपके (मायावती) भतीजे हैं। आपका खून का रिश्ता है। ------------ ये भास्कर एक्सक्लूसिव पढ़िए- अखिलेश जिस मुस्लिम नेता का टिकट काटेंगे, ओवैसी उसे लड़वाएंगे:सपा से गठबंधन नहीं हुआ तो 200 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सपा-कांग्रेस को गठबंधन के लिए 2 अक्टूबर तक का समय दिया था। डेडलाइन खत्म हो चुकी है। अब पार्टी अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। ओवैसी कम से कम 200 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं। इनमें 100 मुस्लिम बहुल सीटें होंगी। यहां पार्टी ऐसे मजबूत उम्मीदवार उतारना चाहती है, जिनके जीतने की संभावना ज्यादा हो। पढ़िए पूरी खबर…

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