आशाएं बोलीं-तीन हजार में पूरा परिवार गुलाम बना लिया:झांसी CMO ऑफिस पर मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया, 31 अक्टूबर तक हड़ताल पर गईं आशाएं
झांसी में आशाओं ने कहा कि तीन हजार रुपए महीने में दिन-रात काम करना पड़ रहा है। ऊपर से डिलीवरी और टीकाकरण के अलावा ऑनलाइन काम का भी दबाव बनाया जा रहा है। अब यह शोषण बर्दाश्त नहीं करेंगे। वह शनिवार दोपहर 2:30 बजे मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय के सामने प्रदर्शन करने पहुंची थीं। साथ ही वह मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अपनी हड़ताल की सूचना देने और मांगों से जुड़ा पत्र भी सौंपने पहुंची थीं, लेकिन महीने का दूसरा शनिवार होने के कारण कार्यालय बंद मिला। इसके बाद आशा कार्यकर्ताओं ने ईमेल के माध्यम से सीएमओ को पत्र भेजा। मौके पर पहुंची पुलिस ने बिना अनुमति आंदोलन नहीं करने की बात कहते हुए उन्हें वापस भेज दिया। इससे पहले जिलेभर की सैकड़ों आशा कार्यकर्ता लक्ष्मीबाई पार्क में एकत्र हुईं। यहां से नारेबाजी करते हुए सीएमओ कार्यालय पहुंचीं। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग की जा रही है। इसके अलावा अन्य राज्य कर्मचारियों की तरह सुविधाएं देने की मांग भी उठाई जा रही है। इसके बावजूद उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 31 अक्टूबर तक हड़ताल पर रहेंगी आशाएं आशा कार्यकर्ता भारती सिंह ने कहा कि लगातार उनका शोषण हो रहा है। दिन-रात मेहनत करने के बावजूद उन्हें न्यूनतम मजदूरी के बराबर भी भुगतान नहीं मिल रहा है। तीन हजार रुपए महीने यानी करीब 100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से काम लिया जा रहा है। अब वे इस व्यवस्था को बर्दाश्त नहीं करेंगी।
उन्होंने कहा कि शनिवार को सीएमओ को हड़ताल के संबंध में पत्र देने पहुंची थीं, लेकिन कार्यालय बंद होने के कारण ईमेल से पत्र भेजा गया है। जिले की आशा और आशा संगिनी 31 अक्टूबर तक हड़ताल पर रहेंगी। जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक वे काम नहीं करेंगी। डिलीवरी-टीकाकरण के साथ ऑनलाइन काम का भी दबाव
आशा कार्यकर्ता ऊषा ने आरोप लगाया कि उन्हें धमकी देकर काम कराया जा रहा है। उनका कहना है कि आशा कार्यकर्ताओं की मुख्य जिम्मेदारी गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी और टीकाकरण से जुड़े कार्यों में सहयोग करना है, लेकिन अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) से जुड़े ऑनलाइन काम भी उनसे कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई आशा कार्यकर्ता ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं। इसके बावजूद ऑनलाइन काम पूरा करने का दबाव बनाया जाता है। जब वे यह काम नहीं कर पातीं तो उन्हें परिवार के सदस्यों से काम कराने के लिए कहा जाता है। ऊषा ने कहा कि तीन हजार रुपए में पूरे परिवार को काम में लगा दिया गया है। अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लखनऊ में किया प्रदर्शन, नहीं सुनी मांग आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर उनकी अनदेखी करने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि तीन दिन पहले हमारे साथ प्रदेश की हजारों आशा कार्यकर्ता लखनऊ पहुंची थीं। लेकिन यहां उनसे मिलने या उनकी बात सुनने कोई नहीं आया। बताया कि वहां कहा जा रहा था कि दो-चार लोग भेजकर बात करें। बोलीं, सरकार हम लोगों को हक़ देना नहीं चाहती। लेकिन हम लोग भी पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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