आठ हफ्तों से बाजार में गिरावट, 26 लाख करोड़ रुपये डूबे!

भारतीय शेयर बाजार लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है। इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट आई, जबकि निवेशकों की करीब 26 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घट गई। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, अमेरिकी बांड प्रतिफल में बढ़ोतरी, महंगा कच्चा तेल, रुपये की कमजोरी और ब्याज दरों को लेकर चिंता बाजार पर दबाव की प्रमुख वजहें बनीं। वाहन, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु, सूचना प्रौद्योगिकी, रियल्टी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जबकि औषधि क्षेत्र ने मामूली बढ़त दर्ज की।

Oct 02, 2026 - 15:03
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आठ हफ्तों से बाजार में गिरावट, 26 लाख करोड़ रुपये डूबे!

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 2 अक्टूबर 2026

भारतीय शेयर बाजार लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है। यह पिछले करीब 25 वर्षों में सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट है। आठ सप्ताह में सेंसेक्स करीब 6,590 अंक और निफ्टी करीब 2,149 अंक नीचे आ चुके हैं, जबकि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में 26 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, अमेरिकी बांड प्रतिफल में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रुपये की कमजोरी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को बाजार में दबाव की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। वाहन, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु, सूचना प्रौद्योगिकी, रियल्टी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग शेयरों में खासा दबाव देखने को मिला है।

बाजार में लगातार आठ सप्ताह से गिरावट क्यों

भारतीय शेयर बाजार में लगातार आठ सप्ताह की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगातार दबाव बना रहा। वैश्विक स्तर पर बढ़ते बांड प्रतिफल, महंगा कच्चा तेल और विदेशी पूंजी की निकासी ने भारतीय बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों के अनुसार कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण एक साथ बाजार पर दबाव डाल रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली शामिल है। सितंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाली, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने कुछ हद तक बाजार को सहारा दिया। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से शेयरों पर बिक्री का दबाव बढ़ा है।

अमेरिकी बांड प्रतिफल में बढ़ोतरी

अमेरिकी सरकारी बांडों पर मिलने वाला प्रतिफल तेजी से बढ़ा है। दस वर्षीय अमेरिकी बांड का प्रतिफल अक्टूबर की शुरुआत में करीब 5.3 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिससे वैश्विक निवेशकों के लिए अमेरिकी ऋण बाजार अधिक आकर्षक हुआ है। इसका असर उभरते बाजारों पर पड़ा और भारत से विदेशी पूंजी की निकासी का दबाव बढ़ा।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए तेल महंगा होने पर आयात खर्च बढ़ सकता है। इससे महंगाई, कंपनियों की लागत और उनके मुनाफे पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है।

रुपये की कमजोरी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। कमजोर रुपया आयात को महंगा कर सकता है और विदेशी निवेशकों के लिए मुद्रा से जुड़ा जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक उभरते बाजारों में अपने निवेश को लेकर अधिक सावधानी बरतते हैं।

ब्याज दरों को लेकर चिंता

वैश्विक स्तर पर ऊंचे बांड प्रतिफल और महंगाई से जुड़ी चिंताओं के बीच ब्याज दरों को लेकर भी बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ब्याज दरें बढ़ने पर कर्ज महंगा हो सकता है, जिससे कंपनियों की लागत और उपभोक्ताओं की मांग दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसी वजह से ब्याज दरों से संवेदनशील क्षेत्रों में दबाव देखने को मिला है।

किस क्षेत्र में कितना नुकसान हुआ

वाहन क्षेत्र में सितंबर के दौरान कमजोर बिक्री आंकड़ों के बाद भारी बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी वाहन सूचकांक में सितंबर श्रृंखला के दौरान करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 1 अक्टूबर को भी वाहन शेयरों पर दबाव रहा और बजाज ऑटो में करीब 8 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। कई वाहन कंपनियों की सितंबर बिक्री बाजार की उम्मीदों से कम रही। कमजोर मानसून और ग्रामीण मांग को लेकर बनी चिंता ने भी वाहन क्षेत्र की धारणा को प्रभावित किया। महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी और आयशर मोटर्स जैसे शेयरों में भी दबाव देखने को मिला।

उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु क्षेत्र

उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के क्षेत्र में सितंबर श्रृंखला के दौरान करीब साढ़े छह प्रतिशत की गिरावट रही। ग्रामीण खपत में सुस्ती और मांग को लेकर चिंता इस क्षेत्र पर दबाव डालने वाले प्रमुख कारणों में रही। बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली का असर दिखाई दिया।

सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र

सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र भी सितंबर में दबाव में रहा। इस क्षेत्र के सूचकांक में करीब 9 से 11 प्रतिशत तक की गिरावट के आंकड़े अलग-अलग बाजार रिपोर्टों में सामने आए हैं। वैश्विक तकनीकी खर्च में सावधानी, ऊंची ब्याज दरें और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण पारंपरिक सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के कारोबार पर पड़ रहे दबाव को इसकी वजहों में बताया गया है।

रियल्टी क्षेत्र

रियल्टी क्षेत्र में भी सितंबर श्रृंखला के दौरान करीब 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका इस क्षेत्र के लिए विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि महंगे गृह ऋण से घरों की मांग प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा बाजार में समग्र कमजोरी का असर रियल्टी कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ा।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में भी सितंबर में व्यापक बिकवाली देखने को मिली। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सूचकांक में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट रही। विदेशी निवेशकों की वित्तीय क्षेत्र में बिकवाली और बाजार में नकदी को लेकर चिंता ने बैंकिंग शेयरों पर दबाव बढ़ाया।

धातु क्षेत्र

धातु क्षेत्र में भी गिरावट का दौर रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से परिवहन और आपूर्ति लागत बढ़ने की चिंता ने कंपनियों के मार्जिन को लेकर बाजार की आशंकाएं बढ़ाईं। इसके अलावा व्यापक बाजार में बिकवाली का असर धातु कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दिया।

दैनिक उपयोग की वस्तुओं का क्षेत्र

दैनिक उपयोग की वस्तुओं से जुड़ी कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। ग्रामीण मांग में कमजोरी और महंगाई से जुड़ी चिंताओं ने इस क्षेत्र की कंपनियों को प्रभावित किया। बाजार में व्यापक बिकवाली के कारण बड़ी कंपनियों के शेयर भी गिरावट से नहीं बच सके।

आधारभूत ढांचा क्षेत्र

आधारभूत ढांचा क्षेत्र में सितंबर श्रृंखला के दौरान करीब 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। ऊंची ब्याज दरों और सरकारी खर्च की गति को लेकर बनी चिंताओं का असर इस क्षेत्र पर पड़ा। बड़ी आधारभूत ढांचा कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली देखी गई।

औषधि क्षेत्र

औषधि क्षेत्र ने बाजार की व्यापक गिरावट के बीच अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई। सितंबर श्रृंखला में इस क्षेत्र में करीब 0.7 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई। दवाओं की मांग अपेक्षाकृत स्थिर रहने के कारण बाजार में गिरावट के दौरान औषधि क्षेत्र ने अन्य क्षेत्रों की तुलना में अलग प्रदर्शन किया।

आठ सप्ताह में कितना नुकसान हुआ

आठ सप्ताह की लगातार गिरावट में सेंसेक्स करीब 6,590 अंक और निफ्टी करीब 2,149 अंक नीचे आ चुके हैं। 1 अक्टूबर को सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत गिरकर 22,421.95 पर बंद हुआ। इस लगातार गिरावट का असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर भी पड़ा है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में आठ सप्ताह के दौरान 26 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई है। अकेले इस सप्ताह बाजार पूंजीकरण में लगभग 20 लाख करोड़ रुपये की कमी आने की रिपोर्ट सामने आई है।

आगे बाजार पर क्या असर पड़ सकता है

आने वाले समय में बाजार की दिशा कई वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगी। अमेरिकी बांड प्रतिफल, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और रुपये की चाल बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बने रहेंगे। भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर अनिश्चितता भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में अचानक तेजी या गिरावट की जगह शेयरों में क्षेत्र और कंपनी के आधार पर अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। सितंबर की गिरावट के दौरान भी सभी क्षेत्रों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा और औषधि क्षेत्र ने मामूली बढ़त दर्ज की। ऐसे में निवेशकों के लिए बाजार के आंकड़ों और कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन को समझना महत्वपूर्ण हो जाता है।

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