अभाविप ने संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का विरोध किया:भदोही में नेता बोले- लोकतंत्र कमजोर करने की कोशिश
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे लोकतंत्र अपनाओ–अराजकता हटाओ नारे के साथ प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में अभाविप ने देश की संवैधानिक संस्थाओं, खासकर निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका की गरिमा को कम करने और उन पर गलत सवाल उठाने की कोशिशों की निंदा की। अभाविप का कहना है कि राजनीतिक फायदे के लिए हिंसा और अराजकता फैलाना गलत है। कार्यकर्ताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और राष्ट्रीय एकता के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई। संगठन ने कहा कि निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, जो निष्पक्ष चुनाव कराती है। किसी भी आपत्ति के लिए संविधान में नियम और मंच बने हुए हैं। अभाविप का मानना है कि संवैधानिक संस्थाओं की आजादी और मर्यादा बचाना हर नागरिक का फर्ज है। जागरूक युवा और छात्र लोकतंत्र को कमजोर करने वाली इन ताकतों का विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान अभाविप के ने कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और चुनावी सुधार प्रक्रियाओं पर निराधार प्रश्नचिह्न उठाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के सर्वथा विपरीत है। राजनीतिक असहमति की आड़ में देश में अराजकता और अव्यवस्था फैलाने का प्रयास अत्यंत निंदनीय है। विरोध के नाम पर भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी अस्थिरता उत्पन्न करने की बात करना सीधे तौर पर हमारे संविधान और लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार है। देश विरोधी कृत्य करने वाली ऐसी शक्तियों और साजिशों को भारत का जागरूक युवा और छात्र समाज एकजुट होकर मुंहतोड़ जवाब देगा। सागर ने कहा- चुनाव सुधार की पारदर्शी प्रक्रियाओं को विवादित बनाकर और निष्पक्ष संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करके देश में अराजकता का वातावरण बनाना अलोकतांत्रिक मानसिकता का परिचायक है। भारत जैसे मजबूत लोकतंत्र में पड़ोसी देशों जैसी हिंसा और अस्थिरता फैलाने की बात करना राष्ट्रहित के विरुद्ध है। देश की शांति, अखंडता और संवैधानिक व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले ऐसे किसी भी देश विरोधी कृत्य को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और भारत की छात्रशक्ति व युवा इसका पूरी ताकत से कड़ा प्रतिकार करेंगे।
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