तिरंगा मार्च पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा व्यापारियों के नुकसान पर जताई चिंता

कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी के तिरंगा मार्च के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। अदालत ने तत्काल रोक लगाने से इनकार करते हुए लोगों से समझदारी से काम लेने की उम्मीद जताई। मामले की अगली सुनवाई 26 या 27 अक्टूबर को हो सकती है।

Oct 16, 2026 - 15:38
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तिरंगा मार्च पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा व्यापारियों के नुकसान पर जताई चिंता

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 16 अक्टूबर 2026

दिल्ली के कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की ओर से घोषित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर कानूनी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। प्रस्तावित प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि प्रदर्शन के कारण छोटे दुकानदारों और व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो सकता है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कहा कि जरूरत पड़ने पर आगे आदेश पारित किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल आदेश देने से किया इनकार

कनॉट प्लेस में प्रस्तावित तिरंगा मार्च के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल कोई आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। याचिका में छोटे दुकानदारों के संभावित आर्थिक नुकसान का हवाला देते हुए प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत ने उम्मीद जताई कि प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोग समझदारी से काम लेंगे और व्यापारियों की परेशानियों को ध्यान में रखेंगे। अदालत ने यह भी कहा कि व्यापार से पूरे परिवार का जीवन चलता है और जरूरत पड़ने पर आगे उचित आदेश दिया जा सकता है।

26 या 27 अक्टूबर को हो सकती है अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 26 या 27 अक्टूबर को करने की बात कही है। अदालत ने तत्काल आदेश देने के बजाय संबंधित परिस्थितियों को देखते हुए आगे विचार करने का संकेत दिया। याचिका में मुख्य चिंता कनॉट प्लेस जैसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र में प्रदर्शन के कारण कारोबार प्रभावित होने की थी। अब अगली सुनवाई में मामले से जुड़े पक्षों की दलीलों और परिस्थितियों के आधार पर आगे की दिशा तय हो सकती है।

अभिजीत दीपके ने शाम पांच बजे तिरंगा मार्च का किया ऐलान

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 16 अक्टूबर को शाम पांच बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च आयोजित करने की घोषणा की थी। उन्होंने समर्थकों से पार्टी नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास के समर्थन में खड़े होने की अपील की। यह प्रदर्शन दोनों नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में आयोजित किया जाना प्रस्तावित था। कार्यक्रम को लेकर दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी।

 जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार हुए थे आशुतोष रांका और सौरव दास

समाचार के अनुसार, आशुतोष रांका और सौरव दास 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान प्रवेश द्वार पार करके अंदर पहुंचे थे। दोनों ने तिरंगा लेकर नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। अगले दिन दोनों नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया और मजिस्ट्रेट ने उन्हें पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसी कार्रवाई के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी ने तिरंगा मार्च का आह्वान किया।

दिल्ली उच्च न्यायालय में भी दाखिल हुई थी याचिका

कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में भी याचिका दाखिल की गई थी। 15 अक्टूबर को अदालत ने प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान पुलिस ने कहा था कि गतिविधियों को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सेंट्रल पार्क के बीचों-बीच प्रदर्शन होने से दुकानदारों को नुकसान हो सकता है और कुछ व्यापारियों ने दुकानें बंद करनी शुरू कर दी हैं।

कनॉट प्लेस में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

प्रस्तावित मार्च को देखते हुए नई दिल्ली क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। खबर के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के छह हजार से अधिक जवानों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 220 कंपनियों की तैनाती की गई। अधिकारियों का ध्यान व्यावसायिक क्षेत्र के प्रवेश और निकास मार्गों को सुरक्षित रखने तथा आम लोगों की आवाजाही बनाए रखने पर था। निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा था।

 सेंट्रल पार्क दो दिनों के लिए बंद

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए शुक्रवार और शनिवार को कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क आम जनता के लिए बंद रखने की घोषणा की थी। यह वही स्थान है, जहां अभिजीत दीपके ने तिरंगा मार्च आयोजित करने की बात कही थी। पार्क बंद होने से प्रदर्शन के आयोजन और आसपास के कारोबार को लेकर चर्चा बढ़ गई। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि कुछ चुनिंदा लोगों को किसी उपयुक्त स्थान पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान गाने की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है।

व्यापारियों के कारोबार और प्रदर्शन के अधिकार पर बहस

इस पूरे मामले में एक ओर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार का सवाल है, तो दूसरी ओर सार्वजनिक स्थानों और व्यावसायिक क्षेत्रों में सामान्य गतिविधियां बनाए रखने की चुनौती है। कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख कारोबारी केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में दुकानें, कार्यालय और अन्य प्रतिष्ठान हैं। प्रदर्शन के कारण यातायात, ग्राहकों की आवाजाही और दुकानदारों के कारोबार पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। अदालत के सामने भी इसी संभावित नुकसान को लेकर याचिका दाखिल की गई है।

आगे की सुनवाई पर टिकी निगाहें

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल रोक लगाने का आदेश नहीं दिया है, लेकिन मामले पर आगे सुनवाई किए जाने की बात कही है। ऐसे में प्रदर्शन, व्यापारियों की चिंताओं और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल बने हुए हैं। अगली सुनवाई में अदालत यह देख सकती है कि संबंधित पक्षों की दलीलों और परिस्थितियों के आधार पर किसी निर्देश की जरूरत है या नहीं। फिलहाल, अदालत की ओर से तत्काल रोक लगाए जाने की पुष्टि नहीं है।

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