‘जजों ने बिना डरे अपनी बात रखी’, एसआईआर पर सिंघवी का बड़ा बयान

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन की टिप्पणियों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने दोनों न्यायविदों के बयानों का समर्थन करते हुए उनकी बेबाकी और निडरता की प्रशंसा की है।

Oct 05, 2026 - 12:14
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‘जजों ने बिना डरे अपनी बात रखी’, एसआईआर पर सिंघवी का बड़ा बयान

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 5 अक्टूबर 2026

कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दोनों न्यायविदों को बेहद विद्वान और सम्मानित बताया। सिंघवी ने कहा कि न्यायमूर्ति भुइयां उन लोगों में शामिल हैं, जो बिना किसी डर या झिझक के अपनी बात स्पष्ट रूप से रखते हैं।

‘बिना डर और झिझक के अपनी बात रखते हैं’

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन को वकील, विधि अधिकारी और न्यायाधीश के रूप में बेहद विद्वान माना जाता है। उन्होंने न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां को देश के सबसे सम्मानित और बेबाक लोगों में से एक बताया। सिंघवी के मुताबिक, दोनों ने जिस मुद्दे पर अपनी बात रखी, वह लोकतंत्र और आम नागरिक के अधिकारों से सीधे जुड़ा हुआ है।

‘उन्होंने निडर होकर अपनी बात कही’

सिंघवी ने कहा कि न्यायमूर्ति नरीमन और न्यायमूर्ति भुइयां ने मताधिकार और लोकतंत्र से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों ने वोट की अहमियत कम होने और नागरिकों के मतदान के अधिकार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई। सिंघवी ने कहा कि उनके बयान में कोई नई बात नहीं है, लेकिन अपनी बात को इतनी स्पष्टता और निडरता से रखना जरूर महत्वपूर्ण है।

नागरिक समाज से भी आगे आने की अपील

कांग्रेस सांसद ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि देश में नागरिक समाज के दूसरे वर्ग भी ऐसे मुद्दों पर खुलकर विचार करेंगे। उन्होंने इंजीनियर, चिकित्सक, वास्तुकार, वकील और गृहिणियों सहित समाज के अलग-अलग वर्गों से लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर अपनी राय रखने की अपील की। सिंघवी ने कहा कि वह दोनों न्यायविदों की सोच और अपनी बात स्पष्ट रूप से कहने की हिम्मत का स्वागत करते हैं।

न्यायमूर्ति भुइयां ने क्या कहा था

न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने रविवार को नालसर विधि विश्वविद्यालय में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि लाखों भारतीय नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने वाली किसी प्रक्रिया को किसी भी तर्क के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने इसे संविधान की मूल संरचना से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए संवैधानिक व्यवस्था पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी।

न्यायमूर्ति नरीमन ने भी उठाया सवाल

सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर सवाल उठाया था। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बावजूद शीर्ष अदालत ने इस प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने बड़ी संख्या में मतदाताओं के मतदान अधिकार से वंचित होने को बेहद गंभीर और चौंकाने वाला विषय बताया।

एसआईआर को लेकर क्यों बढ़ा विवाद

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच पहले से ही राजनीतिक और कानूनी विवाद चल रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, चुनाव व्यवस्था से जुड़े पक्ष इसे मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने की प्रक्रिया के रूप में देखते हैं। न्यायपालिका से जुड़े वरिष्ठ लोगों की टिप्पणियों के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

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