अचल मंदिर में स्वागत कार्यक्रम पर सियासी घमासान:मंदिर में दूसरे समुदाय के लोगों के पहुंचने पर उठे सवाल, शुद्धीकरण की बात तक पहुंचा विवाद
शहर के अचल ताल स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर में 22 सितंबर को हुआ भाजपा का एक स्वागत कार्यक्रम अब सियासी घमासान में बदल गया है। भाजपा नेताओं के स्वागत से शुरू हुई कहानी मंदिर में दूसरे समुदाय के कुछ लोगों के पहुंचने के फोटो-वीडियो से होते हुए सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप और फिर ‘शुद्धीकरण’ की मांग तक पहुंच गई। विवाद के केंद्र में भाजपा नेता मौनू अग्रवाल हैं, जो महानगर युवा मोर्चा अध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर सक्रिय हैं।
22 सितंबर को मंदिर परिसर में पर्यटन विभाग के हॉल में भाजपा नेताओं के स्वागत और दाल-बाटी कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें भाजपा ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष पूरनलाल लोधी और क्षेत्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण राज सिंह समेत भाजपा से जुड़े लोग मौजूद थे। आयोजन मौनू अग्रवाल की ओर से कराया गया था।
कार्यक्रम के बाद सामने आए एक वीडियो में कुछ मुस्लिम समुदाय के लोग मंदिर परिसर के अंदर नजर आए। वीडियो में उनके जूते-चप्पल पहने होने और नंदी के नजदीक तक पहुंचने को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। देखते ही देखते वीडियो वायरल हुआ और टिप्पणीबाजी का सिलसिला शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर मौनू अग्रवाल पर इन लोगों को कार्यक्रम में बुलाने के आरोप लगाए जाने लगे।
वीडियो से बढ़ी बात, ‘शुद्धीकरण’ तक पहुंचा विवाद
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब बजरंग बल के संयोजक गौरव शर्मा ने फेसबुक लाइव के जरिए इस पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताई। उन्होंने मंदिर परिसर में दूसरे समुदाय के लोगों के पहुंचने पर सवाल उठाए और पुलिस-प्रशासन से मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने मंदिर के शुद्धीकरण की बात कही। साथ ही सोशल मीडिया पर मौनू अग्रवाल के शुद्धीकरण से जुड़ी टिप्पणी भी सामने आई। इसके बाद विवाद सिर्फ मंदिर में हुए कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भाजपा की स्थानीय राजनीति तक पहुंच गया। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौनू अग्रवाल और कार्यक्रम से जुड़े लोगों को लेकर पक्ष-विपक्ष में बयानबाजी शुरू हो गई।
मौनू का पलटवार- मुझे फंसाने की राजनीतिक साजिश
विवाद बढ़ने के बाद मौनू अग्रवाल ने फेसबुक लाइव के जरिए अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनका मकसद सिर्फ भाजपा नेताओं का स्वागत करना था। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में कौन लोग आए, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है और उन लोगों से उन्हें जोड़कर गलत प्रचार किया जा रहा है। मौनू ने पूरे विवाद को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि कुछ लोग उन्हें महानगर युवा मोर्चा अध्यक्ष बनने की तैयारी से रोकना चाहते हैं। उनका दावा है कि इससे पहले भी उनकी तस्वीर एडिट कर भाजपा प्रदेश संगठन को भेजी जा चुकी है। अब उन्हें जान-माल की धमकियां भी मिल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तरह उन्हें घेरकर संगठन में उनकी दावेदारी कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
मंदिर समिति: स्वागत कार्यक्रम बताया था, आगे रखेंगे विशेष निगरानी
अचलेश्वर महादेव मंदिर समिति से जुड़े पुजारी पंकज गुप्त स्वामी ने बताया कि मौनू अग्रवाल ने उनसे भाजपा नेताओं के स्वागत और दाल-बाटी कार्यक्रम की जानकारी दी थी। इसी आधार पर मंदिर परिसर के हॉल में कार्यक्रम की अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में कौन-कौन लोग पहुंचे, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। आगे ऐसे आयोजनों में विशेष निगरानी रखी जाएगी, ताकि बिना जानकारी के कोई व्यक्ति मंदिर परिसर के अंदर न पहुंच सके।
फिलहाल एक स्वागत कार्यक्रम के बहाने उठा विवाद अब भाजपा की स्थानीय राजनीति, सोशल मीडिया की बयानबाजी और मंदिर की व्यवस्थाओं के सवाल पर आकर टिक गया है। खास बात यह है कि जिस आयोजन का मकसद भाजपा नेताओं का स्वागत बताया गया था, वही आयोजन अब मौनू अग्रवाल की युवा मोर्चा अध्यक्ष पद की दावेदारी के बीच सियासी परीक्षा बनता नजर आ रहा है।
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