अखिलेश यादव की हिरासत के विरोध में सपा का प्रदर्शन:उन्नाव में अन्नू टंडन बोलीं- विपक्ष की आवाज दबाना बर्दाश्त नहीं
दिल्ली में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में मंगलवार दोपहर करीब दो बजे समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। सपा नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मामले पर विरोध जताया। जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपकर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करने की मांग की। धरने में शामिल सपा की राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व सांसद अन्नू टंडन ने कहा कि दिल्ली में विपक्षी नेताओं की ओर से शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा था। इसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले नेताओं को हिरासत में लिया गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। सपा इसका विरोध करती है। अन्नू टंडन ने कहा कि संविधान में प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल को अपनी बात रखने तथा शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि देश में संवैधानिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की हिरासत की जानकारी मिलने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। सपा कार्यकर्ता और सहयोगी इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास किया गया तो पार्टी कार्यकर्ता इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेंगे। प्रदर्शन के दौरान सपा नेताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना उचित नहीं है। ज्ञापन में हिरासत में लिए गए नेताओं के मामलों में उचित कार्रवाई करने और भविष्य में इस तरह की कार्रवाई से बचने की मांग की गई। अन्नू टंडन से जब उनके चुनाव में कम अंतर से हारने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि इस सवाल का जवाब देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने मीडिया से कहा कि नारों और घटनाक्रम से सही और गलत का आकलन किया जा सकता है। उन्होंने मीडिया से लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भूमिका निभाते हुए सच्चाई सामने रखने की अपील की। धरने के दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने ‘तानाशाही सरकार नहीं चलेगी’ और ‘वोट लुटेरों की सरकार नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लोकतंत्र में जनता और विपक्ष की आवाज को दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए। सपा नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम दिए ज्ञापन में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार की रक्षा, हिरासत में लिए गए विपक्षी नेताओं के मामलों में उचित कार्रवाई तथा लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की।
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